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Jhansi: रिश्वतखोरी में दो और कारोबारियों पर केस दर्ज, सीबीआई ने सीजीएसटी अफसरों समेत पांच को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 02 Jan 2026 08:37 AM IST
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सार
घूसखोरी के मामले में सीबीआई ने दो और कारोबारियों के नाम प्राथमिकी में दर्ज किए हैं। गिरफ्तार किए गए सेंट्रल जीएसटी के तीन अफसरों समेत पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
अनिल तिवारी, प्रभा भंडारी, अजय शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झांसी में घूसखोरी के मामले में सीबीआई ने दो और कारोबारियों जय अंबे प्लाईवुड फर्म के लोकेश तोलानी और जय दुर्गा हार्डवेयर फर्म के तेजपाल मंगतानी समेत अन्य को भी प्राथमिकी में नामजद किया है। वहीं गिरफ्तार किए गए सेंट्रल जीएसटी के तीन अफसरों समेत पांचों आरोपियों को बृहस्पतिवार को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी को 13 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस मामले में जीएसटी के अफसरों के निलंबन के साथ विभागीय कार्यवाही भी होगी।
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार वकील नरेश कुमार गुप्ता जीएसटी अफसरों के बिचौलिये के रूप में कारोबारियों के मामले रफा-दफा करने के बदले लाखों रुपये की घूस ले रहा था। दरअसल, झांसी के जीएसटी अफसरों ने बीती 18 दिसंबर को दो कारोबारियों मेसर्स जय अंबे प्लाईवुड और मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदाम पर छापा मारकर टैक्स चोरी के सुराग जुटाए थे। सीबीआई को गोपनीय सूचना मिली थी कि दोनों फर्मों के संचालकों ने वकील नरेश कुमार गुप्ता से मामला रफा-दफा कराने के लिार संपर्क किया है।
वकील ने जब अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी से संपर्क किया तो उसने बताया कि दोनों फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी के तमाम सबूत मिले हैं, हालांकि डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी ने मदद करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कारोबारी लोकेश तोलानी और राजू मंगतानी अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय शर्मा के घर जाकर मिले। तेजपाल मंगतानी के कहने पर 23 दिसंबर को राजू मंगतानी ने वकील को घूस के 30 लाख रुपये दे दिए। राजू ने 25 दिसंबर को झांसी निवासी जगदीश बजाज से 40 लाख रुपये का इंतजाम करने को कहा ताकि घूस की बाकी रकम दी जा सके।
सीजीएसटी के जूनियर अधिकारी भी जांच के घेरे में
केंद्रीय जीएसटी के रिश्वत प्रकरण में पांच अधिकारियों की लिप्तता के बाद अब जूनियर अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए है। इनमें इंस्पेक्टर रैंक से लेकर के अन्य कर्मचारी शामिल हैं। झांसी में सीबीआई द्वारा सीजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी सहित पांच लोगों को डेढ़ करोड़ की रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तारी की अवधि 48 घंटे होने के साथ डिप्टी कमिश्नर तथा दो कर अधीक्षक पर निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आरोपियों के निलंबन की तैयारी
सीबीआई की चार्जशीट में जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम आएंगे उन सभी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही होगी। झांसी में लंबे समय से तैनात सभी कार्मिकों को वहां से अन्यत्र स्थानांतरित करने की तैयारी भी चल रही है। डिप्टी कमिश्नर के पिछले कई वर्षों से झांसी में जमे रहने के बारे में बताया जाता है कि बीच-बीच में एक या दो दो वर्ष के लिए किसी और शहर में स्थानांतरण लेने के बाद फिर झांसी लौट आते रहे हैं। सीजीएसटी लखनऊ के प्रिंसिपल कमिश्नर केपी सिंह के मुताबिक डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी का निलंबन वित्त मंत्रालय से तथा दोनों कर अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा का निलंबन कमिश्नर कानपुर द्वारा किया जाएगा। सीबीआई की चार्जशीट में विभाग के जिन भी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम आएंगे उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू होगी।
टैक्स चोरी के मिले सबूत
झांसी में घूसखोरी के मामले में सीबीआई की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार वकील नरेश कुमार गुप्ता जीएसटी अफसरों के बिचौलिये के रूप में आमलकी काय करने के बदले लाखों रुपये की घूस ले रहा था। 18 दिसंबर को मेसर्स जय अंबे प्लाईवुड और मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदाम पर छापे में टैक्स चोरी के सुराग मिले थे। दोनों फर्मों के संचालकों ने वकील नरेश कुमार गुप्ता से मामला रफा-दफा कराने के लिए संपर्क किया हैं। वकील ने जब अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी से संपर्क किया तो उसने बताया कि दोनों फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी के तमाम सबूत मिले हैं।
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सीबीआई की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार वकील नरेश कुमार गुप्ता जीएसटी अफसरों के बिचौलिये के रूप में कारोबारियों के मामले रफा-दफा करने के बदले लाखों रुपये की घूस ले रहा था। दरअसल, झांसी के जीएसटी अफसरों ने बीती 18 दिसंबर को दो कारोबारियों मेसर्स जय अंबे प्लाईवुड और मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदाम पर छापा मारकर टैक्स चोरी के सुराग जुटाए थे। सीबीआई को गोपनीय सूचना मिली थी कि दोनों फर्मों के संचालकों ने वकील नरेश कुमार गुप्ता से मामला रफा-दफा कराने के लिार संपर्क किया है।
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वकील ने जब अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी से संपर्क किया तो उसने बताया कि दोनों फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी के तमाम सबूत मिले हैं, हालांकि डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी ने मदद करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कारोबारी लोकेश तोलानी और राजू मंगतानी अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय शर्मा के घर जाकर मिले। तेजपाल मंगतानी के कहने पर 23 दिसंबर को राजू मंगतानी ने वकील को घूस के 30 लाख रुपये दे दिए। राजू ने 25 दिसंबर को झांसी निवासी जगदीश बजाज से 40 लाख रुपये का इंतजाम करने को कहा ताकि घूस की बाकी रकम दी जा सके।
सीजीएसटी के जूनियर अधिकारी भी जांच के घेरे में
केंद्रीय जीएसटी के रिश्वत प्रकरण में पांच अधिकारियों की लिप्तता के बाद अब जूनियर अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए है। इनमें इंस्पेक्टर रैंक से लेकर के अन्य कर्मचारी शामिल हैं। झांसी में सीबीआई द्वारा सीजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी सहित पांच लोगों को डेढ़ करोड़ की रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तारी की अवधि 48 घंटे होने के साथ डिप्टी कमिश्नर तथा दो कर अधीक्षक पर निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आरोपियों के निलंबन की तैयारी
सीबीआई की चार्जशीट में जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम आएंगे उन सभी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही होगी। झांसी में लंबे समय से तैनात सभी कार्मिकों को वहां से अन्यत्र स्थानांतरित करने की तैयारी भी चल रही है। डिप्टी कमिश्नर के पिछले कई वर्षों से झांसी में जमे रहने के बारे में बताया जाता है कि बीच-बीच में एक या दो दो वर्ष के लिए किसी और शहर में स्थानांतरण लेने के बाद फिर झांसी लौट आते रहे हैं। सीजीएसटी लखनऊ के प्रिंसिपल कमिश्नर केपी सिंह के मुताबिक डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी का निलंबन वित्त मंत्रालय से तथा दोनों कर अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा का निलंबन कमिश्नर कानपुर द्वारा किया जाएगा। सीबीआई की चार्जशीट में विभाग के जिन भी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम आएंगे उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू होगी।
टैक्स चोरी के मिले सबूत
झांसी में घूसखोरी के मामले में सीबीआई की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार वकील नरेश कुमार गुप्ता जीएसटी अफसरों के बिचौलिये के रूप में आमलकी काय करने के बदले लाखों रुपये की घूस ले रहा था। 18 दिसंबर को मेसर्स जय अंबे प्लाईवुड और मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के ऑफिस और गोदाम पर छापे में टैक्स चोरी के सुराग मिले थे। दोनों फर्मों के संचालकों ने वकील नरेश कुमार गुप्ता से मामला रफा-दफा कराने के लिए संपर्क किया हैं। वकील ने जब अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी से संपर्क किया तो उसने बताया कि दोनों फर्मों के खिलाफ टैक्स चोरी के तमाम सबूत मिले हैं।
