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Jhansi: जमीन से आसमान तक सेना ने जांची अपनी मारक क्षमता, 12 दिनी सैन्य अभ्यास ‘अमोघ ज्वाला’ का समापन

अमर उजाला नेटवर्क Published by: दीपक महाजन Updated Thu, 19 Mar 2026 08:47 AM IST
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सार

इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक और एकीकृत युद्ध क्षमता के समन्वय को परखना था। टैंक, ड्रोन, मानवरहित हवाई प्रणाली और लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के जरिए थल और वायु सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

Jhansi: The army tested its firepower from ground to sky, concluding the 12-day military exercise
बबीना रेंज में होता सैन्य अभ्यास। - फोटो : स्वयं
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विस्तार

बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में 12 दिनों तक चला सैन्य अभ्यास ‘अमोघ ज्वाला’ बुधवार को दमदार प्रदर्शन के साथ संपन्न हो गया। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक और एकीकृत युद्ध क्षमता के समन्वय को परखना था। टैंक, ड्रोन, मानवरहित हवाई प्रणाली और लड़ाकू हेलिकॉप्टरों के जरिए थल और वायु सेना ने अपनी ताकत दिखाई, वहीं ड्रोन-रोधी सिस्टम और एयर डिफेंस की मजबूती भी परखी गई।
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बुधवार को अभ्यास के अंतिम चरण का निरीक्षण करने पहुंचे दक्षिणी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों के पेशेवर अंदाज और युद्ध तत्परता की सराहना की। जनरल सेठ ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक का समावेश, थल, नभ, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का आपसी समन्वय अनिवार्य है। एक चुस्त और अनुकूल बल बनाने के लिए खुफिया निगरानी (आईएसआर) और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का एकीकरण ही आधुनिक युद्धक्षेत्र में जीत का आधार है।
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नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली का किया प्रदर्शन
इस युद्धाभ्यास के दौरान सेना ने फाइटर जेट्स, अटैक हेलिकॉप्टरों, अत्याधुनिक ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम का एक साथ इस्तेमाल कर अपनी नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली का प्रदर्शन किया। रीयल टाइम डाटा शेयरिंग के जरिए दुश्मन पर सटीक प्रहार और रात में लड़ने की क्षमता पर विशेष जोर दिया गया। विज्ञप्ति में बताया गया कि इस अभ्यास ने न केवल नई सैन्य संरचनाओं को पुख्ता किया, बल्कि सुरक्षित संचार और त्वरित निर्णय लेने की सेना की क्षमता को भी नई धार दी है। यह आयोजन भारतीय सेना के भविष्य के लिए तैयार बल बनने के संकल्प को दर्शाता है। बता दें कि भारतीय सेना की दक्षिणी कमान 6 मार्च से ही इस अभ्यास में जुटी थी, जिसमें थल और नभ इकाइयों ने हिस्सा लिया। अंतिम दिन सभी इकाइयों के बीच तालमेल की व्यापक परीक्षा हुई।
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