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Jhansi: पीएम ने जिस घुरारी नदी का किया था जिक्र, उसके जलग्रहण क्षेत्र पर हो रहा कब्जा

अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sat, 10 Jan 2026 04:57 PM IST
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सार

जलसहेलियों ने आईजीआरएस पर इस मामले की शिकायत की है। उनका कहना है कि नदी के प्रवाह के पास प्लॉटिंग भी हो गई है। नदी के आस-पास भी अतिक्रमण हो गया है।

Jhansi: The Ghurari river, which the PM had mentioned, is facing encroachment in its catchment area.
मौके पर पहुंचा प्रशासन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सवा साल पहले ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस घुरारी नदी का जिक्र किया था, उसके जलग्रहण क्षेत्र पर कब्जा हो रहा है। इसकी शिकायत जलसहेलियों ने आईजीआरएस पर की है। उनका कहना है कि नदी के प्रवाह के पास प्लॉटिंग भी हो गई है। इसके अलावा पहूज नदी के पास भी अतिक्रमण होने का आरोप लगाया है। जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गया है।
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परमार्थ संस्था की जलसहेली अंतिम झा की शिकायत है कि झांसी से लगभग 15 किलोमीटर दूर सिमरावरी गांव में घुरारी नदी के क्षेत्र में अतिक्रमण किया जा रहा है। नदी के मुख्य प्रवाह के पास भू-माफिया द्वारा 300 मीटर से अधिक लंबाई में प्लॉटिंग की गई है। नदी किनारे 10 से 15 फीट भीतर तक अतिक्रमण कर लिया गया है। मुख्य धारा के बिल्कुल किनारे दीवार बना दी गई है। इसके साथ ही नदी के बफर अथवा जलग्रहण क्षेत्र पर भी कब्जा किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप और प्रवाह प्रभावित हो रहा है। बताया कि आईजीआरएस पर शिकायत प्राप्त होने के बाद सीओ सदर को कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया गया है। वहीं परमार्थ संस्था के अध्यक्ष संजय सिंह का कहना है कि नदियों को बचाना है तो जिला प्रशासन को व्यवस्थित टीम बनानी होगी। राजस्व और वन विभाग को भी इसमें शामिल करना होगा।
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बोरियों में बालू भर चेकडैम तैयार किया था, पीएम और सीएम ने सराहा था
29 सितंबर 2024 को पीएम ने मन की बात में झांसी की जलसहेलियों की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इन महिलाओं ने मृतप्राय हो चुकी घुरारी नदी को जिस तरह बचाया है, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। झांसी और यहां की जल सहेलियों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा था कि पानी के संरक्षण को लेकर कई लोग नई पहल कर रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयास झांसी में देखने को मिला है। जलसहेलियों ने बोरियों में बालू भरकर चेकडैम तैयार किया है। बारिश का पानी बर्बाद होने से रोका और नदी को पानी से लबालब कर दिया। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जलसहेलियों के इस कार्य की सराहना की थी। कहा था कि नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रयासों का उल्लेख पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।


पहूज की बहाव सीमा को चिह्नित कर अवैध निर्माण रोकने के आदेश
पिछले साल नवंबर में एनजीटी के जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने सुनवाई के दौरान पहूज नदी में बढ़ते प्रदूषण, सीवेज, ठोस कचरे की डंपिंग और नदी तटों पर हो रहे अतिक्रमण पर सख्त रुख अपनाया था। निर्देश दिए थे कि बिना उपचारित सीवेज नदी में जाने से तुरंत रोकें। नालों को एसटीपी से 100 फीसदी जोड़ें। नदी की बहाव सीमा चिह्नित कर अवैध निर्माण रोकें। आवेदक भानू सहाय द्वारा दायर वाद पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को छह हफ्ते में रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है।


यह मामला मूल रूप से राजस्व विभाग से जुड़ा है। साझा टीम बनाकर इस मामले की छानबीन कराई जाएगी। मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई भी कराई जाएगी।- रामवीर सिंह, सीओ सदर
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