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Jhansi News: ठगी के बढ़ते मामलों ने कटेरा को बनाया हॉटस्पॉट
Sun, 09 Aug 2026 02:39 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:39 AM IST
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झांसी। जनपद के गांव अब साइबर अपराध के नए केंद्र के रूप में भी सामने आने लगे हैं। पिछले एक साल में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े 217 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। कटेरा थाना क्षेत्र के तीन गांवों में सामने आए साइबर ठगी के नेटवर्क ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर कटेरा को साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के तौर पर चिह्नित किए जाने के बाद पुलिस ने यहां सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।
जांच में सामने आया कि गिरोह में सरगना से लेकर फील्ड ऑपरेटर तक अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे। फर्जी पहचान के जरिये ठगी के साथ ही डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हर महीने लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। इनके नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। कोई फर्जी बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराता था तो कोई पीड़ितों को फोन कर ठगी करता था। ठगी की रकम को निकालने और दूसरे खातों में भेजने के लिए भी अलग लोग काम करते थे।
ड्रोन से खेतों और गलियों में तलाश
कटेरा के तीन गांवों में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ड्रोन की मदद से खेतों और संकरी गलियों में सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस टीमों के गांव में पहुंचते ही कुछ लोग भागने में भी सफल रहे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ जमीनी स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई थी।
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एसपी साइबर क्राइम अरीबा नोमान के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और संचार साथी पोर्टल से मिले डिजिटल इनपुट के आधार पर कटेरा में कई मोबाइल नंबर लगातार सक्रिय पाए गए। जांच में करीब 150 मोबाइल नंबर और दर्जनों बैंक खाते ऐसे मिले, जिनका संबंध इन गांवों से जुड़ा था। इन्हीं इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
सरगना भी नेटवर्क चलाते हुए पकड़ा गया
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के सरगना से लेकर फील्ड स्तर पर काम करने वाले सदस्य तक शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है और अलग-अलग समूह अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं।
पुलिस के मुताबिक, कडोर गांव के लाल सिंह उर्फ लक्ष्मण ने सबसे पहले साइबर ठगी शुरू की थी। बाद में उसने धीरे-धीरे अपने साथियों को भी नेटवर्क में शामिल कर लिया। पुलिस ने लक्ष्मण को भी गिरफ्तार किया है। अब उससे पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के तौर-तरीकों की जानकारी जुटाई जा रही है।
झांसी के आसपास के इलाके भी साइबर हॉटस्पॉट
जांच एजेंसियों के अनुसार नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मथुरा, भरतपुर, कानपुर और आगरा समेत कई इलाकों को साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। झांसी के आसपास के इन इलाकों में भी साइबर ठगी के नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी है। ऐसे में पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कटेरा के गिरोह के इन क्षेत्रों में सक्रिय जालसाजों से कोई संपर्क या लेनदेन तो नहीं था।
मऊरानीपुर समेत कई गांवों की मैपिंग
कटेरा के तीन गांवों के अलावा जांच एजेंसियों ने मऊरानीपुर और आसपास के कई गांवों की भी मैपिंग की है। इन गांवों में संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित होने की आशंका है। इनमें कई गांव मध्य प्रदेश की सीमा से सटे हैं, जबकि कुछ की सीमाएं दूसरे जिलों से लगती हैं। पुलिस को आशंका है कि सीमा से सटे इलाकों का फायदा उठाकर आरोपी कार्रवाई के दौरान दूसरे राज्य या जिले में भाग सकते हैं।
खेत और नदी किनारे बैठकर करते थे ठगी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी गांव के घरों के बजाय खेतों और सुनसान स्थानों से ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस की निगाह से बचने के लिए कई बार वे गांव से दूर नदी किनारे भी बैठते थे। यहां से मोबाइल और इंटरनेट के जरिये देशभर में लोगों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा ओएलएक्स पर फर्जी खरीद-बिक्री, क्यूआर कोड स्कैम और फर्जी एडवांस पेमेंट समेत साइबर ठगी के कई तरीके अपनाए जाते थे।
पुलिस से बचने के लिए घरों के बाहर बांधते थे कुत्ते
गांव में पुलिस की गतिविधियों की भनक पहले ही लग जाए, इसके लिए कई घरों के बाहर कुत्ते बांधे जाते थे। ग्रामीण इलाकों में रात के समय किसी अनजान व्यक्ति के पहुंचते ही कुत्तों के भौंकने से घरों में मौजूद जालसाज सतर्क हो जाते थे।
पुलिस ने पहले भी इन आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही कई लोग भाग निकलते थे। इस बार तकनीकी इनपुट, निगरानी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मदद से एक साथ कार्रवाई की गई। - बीबी जीटीएस मूर्ति, एसएसपी
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जांच में सामने आया कि गिरोह में सरगना से लेकर फील्ड ऑपरेटर तक अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे। फर्जी पहचान के जरिये ठगी के साथ ही डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी हर महीने लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। इनके नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। कोई फर्जी बैंक खाते और सिम उपलब्ध कराता था तो कोई पीड़ितों को फोन कर ठगी करता था। ठगी की रकम को निकालने और दूसरे खातों में भेजने के लिए भी अलग लोग काम करते थे।
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ड्रोन से खेतों और गलियों में तलाश
कटेरा के तीन गांवों में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ड्रोन की मदद से खेतों और संकरी गलियों में सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस टीमों के गांव में पहुंचते ही कुछ लोग भागने में भी सफल रहे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ जमीनी स्तर पर भी जानकारी जुटाई गई थी।
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एसपी साइबर क्राइम अरीबा नोमान के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और संचार साथी पोर्टल से मिले डिजिटल इनपुट के आधार पर कटेरा में कई मोबाइल नंबर लगातार सक्रिय पाए गए। जांच में करीब 150 मोबाइल नंबर और दर्जनों बैंक खाते ऐसे मिले, जिनका संबंध इन गांवों से जुड़ा था। इन्हीं इनपुट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की।
सरगना भी नेटवर्क चलाते हुए पकड़ा गया
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के सरगना से लेकर फील्ड स्तर पर काम करने वाले सदस्य तक शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है और अलग-अलग समूह अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हैं।
पुलिस के मुताबिक, कडोर गांव के लाल सिंह उर्फ लक्ष्मण ने सबसे पहले साइबर ठगी शुरू की थी। बाद में उसने धीरे-धीरे अपने साथियों को भी नेटवर्क में शामिल कर लिया। पुलिस ने लक्ष्मण को भी गिरफ्तार किया है। अब उससे पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी के तौर-तरीकों की जानकारी जुटाई जा रही है।
झांसी के आसपास के इलाके भी साइबर हॉटस्पॉट
जांच एजेंसियों के अनुसार नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर मथुरा, भरतपुर, कानपुर और आगरा समेत कई इलाकों को साइबर अपराध के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। झांसी के आसपास के इन इलाकों में भी साइबर ठगी के नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी है। ऐसे में पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कटेरा के गिरोह के इन क्षेत्रों में सक्रिय जालसाजों से कोई संपर्क या लेनदेन तो नहीं था।
मऊरानीपुर समेत कई गांवों की मैपिंग
कटेरा के तीन गांवों के अलावा जांच एजेंसियों ने मऊरानीपुर और आसपास के कई गांवों की भी मैपिंग की है। इन गांवों में संगठित साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित होने की आशंका है। इनमें कई गांव मध्य प्रदेश की सीमा से सटे हैं, जबकि कुछ की सीमाएं दूसरे जिलों से लगती हैं। पुलिस को आशंका है कि सीमा से सटे इलाकों का फायदा उठाकर आरोपी कार्रवाई के दौरान दूसरे राज्य या जिले में भाग सकते हैं।
खेत और नदी किनारे बैठकर करते थे ठगी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी गांव के घरों के बजाय खेतों और सुनसान स्थानों से ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस की निगाह से बचने के लिए कई बार वे गांव से दूर नदी किनारे भी बैठते थे। यहां से मोबाइल और इंटरनेट के जरिये देशभर में लोगों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों द्वारा ओएलएक्स पर फर्जी खरीद-बिक्री, क्यूआर कोड स्कैम और फर्जी एडवांस पेमेंट समेत साइबर ठगी के कई तरीके अपनाए जाते थे।
पुलिस से बचने के लिए घरों के बाहर बांधते थे कुत्ते
गांव में पुलिस की गतिविधियों की भनक पहले ही लग जाए, इसके लिए कई घरों के बाहर कुत्ते बांधे जाते थे। ग्रामीण इलाकों में रात के समय किसी अनजान व्यक्ति के पहुंचते ही कुत्तों के भौंकने से घरों में मौजूद जालसाज सतर्क हो जाते थे।
पुलिस ने पहले भी इन आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही कई लोग भाग निकलते थे। इस बार तकनीकी इनपुट, निगरानी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मदद से एक साथ कार्रवाई की गई। - बीबी जीटीएस मूर्ति, एसएसपी