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झांसी: 129 करोड़ रुपये लावारिस, 4.28 लाख बैंक खाते 10 साल से बंद, आरबीआई की मुहिम के बाद सिर्फ 4 करोड़ ही लौटे

Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 01:27 AM IST
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सार

वर्तमान में जिले भर में विभिन्न सरकारी बैंकों की 227 शाखाओं में लगभग 22 लाख खाते संचालित हो रहे हैं। जांच-पड़ताल के बाद अब तक 4,28,310 खाते ऐसे मिले, जिनसे पिछले दस साल से पैसों की जमा-निकासी नहीं हुई।

Jhansi: Rs 129 crore unclaimed, 4.28 lakh bank accounts closed for 10 years
आरबीआई (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार

बैंकिंग सिस्टम की लापरवाही और लोगों की अनदेखी के चलते 4.28 लाख से अधिक खाते पिछले 10 वर्षों से ऑपरेट ही नहीं किए गए। इन खातों में जमा रकम अब बढ़कर करीब 129 करोड़ रुपये हो चुकी, लेकिन इन्हें क्लेम करने कोई सामने नहीं आ रहा। कई बैंक खाते दो दशक से भी अधिक पुराने हैं। उनके बारे में कुछ पता नहीं चल रहा है। वहीं, हजारों जनधन खाते भी निष्क्रिय पड़े हैं। आरबीआई के मुहिम शुरू करने पर भी पांच महीने में सिर्फ 4 करोड़ रुपये ही लौटाए जा सके।
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वर्तमान में जिले भर में विभिन्न सरकारी बैंकों की 227 शाखाओं में लगभग 22 लाख खाते संचालित हो रहे हैं। जांच-पड़ताल के बाद अब तक 4,28,310 खाते ऐसे मिले, जिनसे पिछले दस साल से पैसों की जमा-निकासी नहीं हुई। इन खातों को बैंक ने इन ऑपरेटिव घोषित कर दिया। सबसे अधिक संख्या दो लाख से पीएनबी बैंक का है जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में भी एक लाख से अधिक बैंक खाते निष्क्रिय पाए गए। तीसरे स्थान पर उप्र ग्रामीण बैंक हैं। यहां भी बड़ी संख्या में बंद खातों में पैसा है। अभी तक हुई जांच पड़ताल में 129.45 करोड़ रुपये इन खातों में मिले हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि इनमें से कई खाते ऐसे हैं, जिनका संचालन दो दशक से अधिक समय से नहीं हुआ, जबकि इन खातों में लाखों रुपये जमा है। एलडीएम अजय शर्मा का कहना है कि बैंक अपने स्तर से भी ऐसे खातों में जमा रकम को उनके परिजनों को वापस करने का अभियान चला रहे हैं।
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परिजनों का नहीं चल रहा पता
निष्क्रिय खातों में जमा रकम खातेधारक अथवा उनके परिजनों को वापस करने के लिए आरबीआई ने अक्तूबर 2025 से अभियान शुरू किया था। ऐसे खातों की जांच-पड़ताल कराई गई। बैंक अफसरों का कहना है कि सामान्य तौर पर दो दशक से अधिक पुराने खातों को तलाशने पर उनके परिजनों का भी पता नहीं चल रहा है। हालांकि कई दावेदारों ने बैंकों से पैसे वापस भी मांगे। अभी तक 274 खातों से अधिक खातों से 4.08 करोड़ रुपये राशि क्लेम की गई। भारतीय जीवन बीमा निगम की ओर से 23 पॉलिसी में राशि 7.48 लाख रुपये क्लेम की गई। हालांकि अधिक राशि क्लेम न होने की वजह से अब यह अभियान फरवरी तक चलाया जाएगा।


कैसे बनते हैं खाते ‘नॉन-ऑपरेटिंग’
बैंक अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक लेन-देन न होने, खाताधारक की मृत्यु के बाद परिवार की ओर से दावा न करना, नौकरी या शहर बदलने के बाद पुराने खाते भूल जाना जैसी वजहों से खाते धीरे-धीरे निष्क्रिय श्रेणी में चले जाते हैं। बाद में ये रकम अनक्लेम्ड डिपॉजिट की श्रेणी में पहुंच जाती है।

पूरी करनी होगी यह शर्त
बैंक अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के पुराने खाते बंद पड़े हैं, वे संबंधित बैंक शाखा में संपर्क करें। केवाईसी दस्तावेज जमा करें। मृत्यु होने की स्थिति में वारिस प्रमाण और पहचान पत्र दें। सत्यापन के बाद रकम वापस मिल सकती है।
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