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Kannauj News: पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण नाकाफी, सर्वे के दिए निर्देश
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फोटो :26: समीक्षा बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य से सवाल करते राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग सदस्य। संवाद
फोटो :27: ब्लॉक सभागार में बीडीसी सदस्यों व ग्राम प्रधानाें से बात करते राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग सदस्य। संवाद
- पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की समीक्षा में निरुत्तर हुईं जिला पंचायत अध्यक्ष, गूंजा भ्रष्टाचार का मुद्दा
- आयोग के अध्यक्ष के सामने लगी मांगों की झड़ी, आबादी के हिसाब से राजनीतिक सीटों की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। इत्रनगरी में मंगलवार को विकास और सामाजिक कल्याण के दावों की हवा उस समय निकल गई, जब राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की उच्चस्तरीय टीम समीक्षा बैठक के लिए विकास भवन के हर्षवर्धन सभागार पहुंची। आयोग की टीम जिले में अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने आई थी। हालांकि, बैठक की शुरुआत में ही स्थिति तब असहज हो गई, जब आयोग के सदस्यों ने सीधे जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य से जिले में पिछड़ा वर्ग की कुल जनसंख्या और उससे संबंधित सटीक आंकड़े पूछ लिए। अचानक पूछे गए इस सवाल पर जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की इस बगलें झांकती खामोशी पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायामूर्ति रामऔतार सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा, जिम्मेदार प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के जमीनी आंकड़ों की उंगलियों पर जानकारी होनी चाहिए। समीक्षा के दौरान आयोग की टीम ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए वर्तमान में दिया जा रहा 27 प्रतिशत आरक्षण आबादी के अनुपात में नाकाफी है। उन्होंने जोर दिया कि पिछड़े वर्ग की विशाल जनसंख्या को देखते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और नौकरियों का वास्तविक लाभ पहुंच सके। आयोग ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत को जिले में पिछड़े वर्ग की सटीक आबादी का तत्काल सर्वेक्षण कराकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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जिले की जनसांख्यिकीय स्थिति
कुल जनसंख्या: 13,63,419
पिछड़ा वर्ग (ओबीसी): 8,22,067
अनुसूचित जाति (एससी): 2,73,072
अनुसूचित जनजाति (एसटी): 14
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पीएम आवास योजना में 10 हजार रिश्वत का आरोप
बैठक में पारदर्शी विकास के दावों की पोल तब खुली जब जलालाबाद के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अवनीश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में फैले भ्रष्टाचार की परतें उखाड़ीं। उन्होंने आयोग के सामने आरोप लगाया कि धरातल पर करीब 20 प्रतिशत पात्र गरीब आज भी बेघर हैं। ग्राम प्रधानों और सचिवों की साठगांठ से दस हजार रुपये लेकर अपात्रों के नाम सूची में जोड़े जा रहे हैं, जबकि असली जरूरतमंद झोपड़ियों में दिन काटने को मजबूर हैं।
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आबादी के हिसाब से मिले राजनीतिक सीटें
उमर्दा ब्लॉक सभागार में आयोजित एक अन्य बैठक में ओबीसी वर्ग के बीडीसी सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने जनसंख्या के अनुपात में चुनावी सीटों के आरक्षण की पुरजोर मांग उठाई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सबसे बड़ी आबादी होने के बावजूद राजनीतिक हिस्सेदारी सीमित है। साथ ही, गांव-गांव खुल रही शराब की दुकानों से युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे बुरे प्रभाव पर चिंता जताते हुए वर्तमान शराब नीति की समीक्षा की मांग की गई। बैठक में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रामऔतार सिंह, सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एसपी सिंह, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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फोटो :27: ब्लॉक सभागार में बीडीसी सदस्यों व ग्राम प्रधानाें से बात करते राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग सदस्य। संवाद
- पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की समीक्षा में निरुत्तर हुईं जिला पंचायत अध्यक्ष, गूंजा भ्रष्टाचार का मुद्दा
- आयोग के अध्यक्ष के सामने लगी मांगों की झड़ी, आबादी के हिसाब से राजनीतिक सीटों की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। इत्रनगरी में मंगलवार को विकास और सामाजिक कल्याण के दावों की हवा उस समय निकल गई, जब राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की उच्चस्तरीय टीम समीक्षा बैठक के लिए विकास भवन के हर्षवर्धन सभागार पहुंची। आयोग की टीम जिले में अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने आई थी। हालांकि, बैठक की शुरुआत में ही स्थिति तब असहज हो गई, जब आयोग के सदस्यों ने सीधे जिला पंचायत अध्यक्ष प्रिया शाक्य से जिले में पिछड़ा वर्ग की कुल जनसंख्या और उससे संबंधित सटीक आंकड़े पूछ लिए। अचानक पूछे गए इस सवाल पर जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रशासनिक अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की इस बगलें झांकती खामोशी पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायामूर्ति रामऔतार सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा, जिम्मेदार प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के जमीनी आंकड़ों की उंगलियों पर जानकारी होनी चाहिए। समीक्षा के दौरान आयोग की टीम ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए वर्तमान में दिया जा रहा 27 प्रतिशत आरक्षण आबादी के अनुपात में नाकाफी है। उन्होंने जोर दिया कि पिछड़े वर्ग की विशाल जनसंख्या को देखते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और नौकरियों का वास्तविक लाभ पहुंच सके। आयोग ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत को जिले में पिछड़े वर्ग की सटीक आबादी का तत्काल सर्वेक्षण कराकर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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जिले की जनसांख्यिकीय स्थिति
कुल जनसंख्या: 13,63,419
पिछड़ा वर्ग (ओबीसी): 8,22,067
अनुसूचित जाति (एससी): 2,73,072
अनुसूचित जनजाति (एसटी): 14
पीएम आवास योजना में 10 हजार रिश्वत का आरोप
बैठक में पारदर्शी विकास के दावों की पोल तब खुली जब जलालाबाद के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अवनीश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में फैले भ्रष्टाचार की परतें उखाड़ीं। उन्होंने आयोग के सामने आरोप लगाया कि धरातल पर करीब 20 प्रतिशत पात्र गरीब आज भी बेघर हैं। ग्राम प्रधानों और सचिवों की साठगांठ से दस हजार रुपये लेकर अपात्रों के नाम सूची में जोड़े जा रहे हैं, जबकि असली जरूरतमंद झोपड़ियों में दिन काटने को मजबूर हैं।
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आबादी के हिसाब से मिले राजनीतिक सीटें
उमर्दा ब्लॉक सभागार में आयोजित एक अन्य बैठक में ओबीसी वर्ग के बीडीसी सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने जनसंख्या के अनुपात में चुनावी सीटों के आरक्षण की पुरजोर मांग उठाई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सबसे बड़ी आबादी होने के बावजूद राजनीतिक हिस्सेदारी सीमित है। साथ ही, गांव-गांव खुल रही शराब की दुकानों से युवाओं के भविष्य पर पड़ रहे बुरे प्रभाव पर चिंता जताते हुए वर्तमान शराब नीति की समीक्षा की मांग की गई। बैठक में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति रामऔतार सिंह, सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एसपी सिंह, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र कुमार श्रीवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।