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Kannauj News: 31 हेक्टेयर सीलिंग जमीन दिग्विजय नारायण को वापस
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तिर्वा। न्यायालय अपर आयुक्त प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण आदेश में 31 हेक्टेयर सीलिंग जमीन को दिग्विजय नारायण की स्वेच्छा पर सीलिंग से बाहर कर दिया है। यह जमीन शारदा नारायण के भाई देवेंद्र नारायण से संबंधित थी, जिस पर वर्ष 2009 में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित किया गया था। इस फैसले से राज परिवार की दशकों पुरानी कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई है।
यह जमीन 40 किता गाटा संख्या में आती है। पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज है। शारदा नारायण की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे दिग्विजय नारायण ने इस मामले में न्यायालय में पैरवी की थी। राज परिवार का इतिहास शिक्षा से जुड़ा है। दुर्गा नारायण सिंह ने वर्ष 1923 में दुर्गा नारायण इंटर कॉलेज और आदित्य स्कूल की स्थापना की थी। ये शिक्षण संस्थान अभी भी संचालित हैं। आजादी के बाद, सीलिंग अधिनियम लागू होने से पहले, राज परिवार ने अपनी जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया था। उन्होंने कई सरकारी विभागों के लिए भी जमीनें दान की थीं। पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार बढ़ने से जमीनों का बंटवारा होता रहा। कुछ बाग और तालाब सीलिंग से बाहर रखे गए थे।
कई सरकारी विभागों को दान में दीं जमीनें
सीलिंग अधिनियम के तहत दुर्गा नारायण सिंह के बेटे देवेंद्र नारायण की जमीन पर पहले ही आदेश हो चुका था। इसी जमीन पर वर्ष 2009 में बसपा सरकार ने कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की थी। राज परिवार ने सीलिंग अधिनियम से पूर्व अपनी जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया था। उन्होंने कई सरकारी विभागों के लिए भी जमीनें दी थीं।
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सीलिंग से बाहर जमीन रहेगी राज परिवार के पास
न्यायालय अपर आयुक्त प्रशासन ने विचाराधीन मुकदमे में यह आदेश दिया है। वादी दिग्विजय नारायण की स्वेच्छा पर 40 किता गाटा संख्या की 31 हेक्टेयर जमीन सीलिंग से बाहर की गई। न्यायालय के आदेशानुसार यह जमीन अब दिग्विजय नारायण के पास रहेगी। यह फैसला राज परिवार के लिए एक बड़ी राहत है।
यह जमीन 40 किता गाटा संख्या में आती है। पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज है। शारदा नारायण की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे दिग्विजय नारायण ने इस मामले में न्यायालय में पैरवी की थी। राज परिवार का इतिहास शिक्षा से जुड़ा है। दुर्गा नारायण सिंह ने वर्ष 1923 में दुर्गा नारायण इंटर कॉलेज और आदित्य स्कूल की स्थापना की थी। ये शिक्षण संस्थान अभी भी संचालित हैं। आजादी के बाद, सीलिंग अधिनियम लागू होने से पहले, राज परिवार ने अपनी जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया था। उन्होंने कई सरकारी विभागों के लिए भी जमीनें दान की थीं। पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार बढ़ने से जमीनों का बंटवारा होता रहा। कुछ बाग और तालाब सीलिंग से बाहर रखे गए थे।
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कई सरकारी विभागों को दान में दीं जमीनें
सीलिंग अधिनियम के तहत दुर्गा नारायण सिंह के बेटे देवेंद्र नारायण की जमीन पर पहले ही आदेश हो चुका था। इसी जमीन पर वर्ष 2009 में बसपा सरकार ने कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना की थी। राज परिवार ने सीलिंग अधिनियम से पूर्व अपनी जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया था। उन्होंने कई सरकारी विभागों के लिए भी जमीनें दी थीं।
सीलिंग से बाहर जमीन रहेगी राज परिवार के पास
न्यायालय अपर आयुक्त प्रशासन ने विचाराधीन मुकदमे में यह आदेश दिया है। वादी दिग्विजय नारायण की स्वेच्छा पर 40 किता गाटा संख्या की 31 हेक्टेयर जमीन सीलिंग से बाहर की गई। न्यायालय के आदेशानुसार यह जमीन अब दिग्विजय नारायण के पास रहेगी। यह फैसला राज परिवार के लिए एक बड़ी राहत है।