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Kannauj News: खड़िनी में जमीन प्रबंध समिति का गठन, चकबंदी प्रक्रिया जल्द
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खड़िनी। ग्राम सभा के लोग पिछले 36 वर्षों से जमीन होते हुए भी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे। राजस्व अभिलेखों के दोबारा तैयार किए जाने की दिशा में बुधवार को महत्वपूर्ण पहल हुई। ग्राम पंचायत सचिवालय में आयोजित एक खुली बैठक में सर्वसम्मति से 11 सदस्यीय भूमि प्रबंध समिति का गठन किया गया। यह समिति क्षेत्र में चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
खड़िनी ग्राम पंचायत सचिवालय में ग्राम प्रधान सतेंद्र सिंह उर्फ सुधीर पाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सहायक चकबंदी अधिकारी मनोज कुमार नीरस भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में, सर्वसम्मति से 11 सदस्यीय चकबंदी समिति का चयन किया गया। समिति में ग्राम प्रधान सतेंद्र सिंह उर्फ सुधीर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख मगन सिंह बैस, राम बाबू गुप्ता, ओमप्रकाश शाक्य, राकेश चंद्र चक्रवर्ती, रामलखन वर्मा, सियाराम, कैलाश चंद्र, स्वामीदयाल, चंद्र शेखर और पूजा शाक्य को शामिल किया गया है।
सहायक चकबंदी अधिकारी मनोज कुमार नीरस ने बैठक में बताया कि वर्ष 1990 में एक अग्निकांड में ग्राम सभा के सभी राजस्व अभिलेख जलकर नष्ट हो गए थे। इस घटना के कारण पिछले तीन दशकों से अधिक समय से ग्राम सभा के निवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब नवगठित भूमि प्रबंध समिति के सदस्यों के सुझावों और सहयोग से जले हुए राजस्व अभिलेखों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी।
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खड़िनी ग्राम पंचायत सचिवालय में ग्राम प्रधान सतेंद्र सिंह उर्फ सुधीर पाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सहायक चकबंदी अधिकारी मनोज कुमार नीरस भी मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति में, सर्वसम्मति से 11 सदस्यीय चकबंदी समिति का चयन किया गया। समिति में ग्राम प्रधान सतेंद्र सिंह उर्फ सुधीर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख मगन सिंह बैस, राम बाबू गुप्ता, ओमप्रकाश शाक्य, राकेश चंद्र चक्रवर्ती, रामलखन वर्मा, सियाराम, कैलाश चंद्र, स्वामीदयाल, चंद्र शेखर और पूजा शाक्य को शामिल किया गया है।
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सहायक चकबंदी अधिकारी मनोज कुमार नीरस ने बैठक में बताया कि वर्ष 1990 में एक अग्निकांड में ग्राम सभा के सभी राजस्व अभिलेख जलकर नष्ट हो गए थे। इस घटना के कारण पिछले तीन दशकों से अधिक समय से ग्राम सभा के निवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब नवगठित भूमि प्रबंध समिति के सदस्यों के सुझावों और सहयोग से जले हुए राजस्व अभिलेखों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी।
