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Kannauj News: जेल से फरार दोनों बंदी ने पुलिस को दिया चकमा
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कन्नौज। जेल से फरार हुए दो शातिर बंदियों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। कड़ी घेराबंदी और ताबड़तोड़ दबिशों के बावजूद अंकित और शिवा उर्फ डिंपी पुलिस को चकमा देने में कामयाब है। ताजा घटनाक्रम में पुलिस की टीमों ने गुजरात में उनके छिपे होने की सूचना पर जाल बिछाया पर दोनों पुलिस के पहुंचने से पहले ही रफूचक्कर हो गए।
जेल प्रशासन और पुलिस के लिए सिरदर्द बने इन दोनों बंदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। फरार बंदी अंकित और शिवा उर्फ डिंपी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। इनकी तलाश में पुलिस की पांच विशेष टीमें दिन-रात एक कर रही हैं। इन टीमों में एसओजी, सर्विलांस और पुलिस के तेजतर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया है।
बंदियों और कैदियों की सुरक्षा पर लगा सवालिया निशान
बंदियों के भागने के प्रकरण ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल की ऊंची दीवारों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को धता बताकर फरार हुए इन बंदियों ने विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। हालांकि, घटना के बाद से ही पुलिस आपसी समन्वय के साथ उनकी धरपकड़ में जुटी है। शासन ने इस मामले में जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है तो जेलर विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद व तीन जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच कानपुर परिक्षेत्र के डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता कर रहे हैं।
वर्जन
पुलिस की पांच टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। हालांकि दोनों पुलिस को चकमा देने में सफल रहे, लेकिन उनके सभी संभावित नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। उनके परिजनों और करीबी रिश्तेदारों पर भी नजर रखी जा रही है। बहुत जल्द दोनों बंदी सलाखों के पीछे होंगे।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक
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जेल प्रशासन और पुलिस के लिए सिरदर्द बने इन दोनों बंदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। फरार बंदी अंकित और शिवा उर्फ डिंपी पर 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। इनकी तलाश में पुलिस की पांच विशेष टीमें दिन-रात एक कर रही हैं। इन टीमों में एसओजी, सर्विलांस और पुलिस के तेजतर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया है।
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बंदियों और कैदियों की सुरक्षा पर लगा सवालिया निशान
बंदियों के भागने के प्रकरण ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल की ऊंची दीवारों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को धता बताकर फरार हुए इन बंदियों ने विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। हालांकि, घटना के बाद से ही पुलिस आपसी समन्वय के साथ उनकी धरपकड़ में जुटी है। शासन ने इस मामले में जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है तो जेलर विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद व तीन जेल वार्डरों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच कानपुर परिक्षेत्र के डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता कर रहे हैं।
वर्जन
पुलिस की पांच टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। हालांकि दोनों पुलिस को चकमा देने में सफल रहे, लेकिन उनके सभी संभावित नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। उनके परिजनों और करीबी रिश्तेदारों पर भी नजर रखी जा रही है। बहुत जल्द दोनों बंदी सलाखों के पीछे होंगे।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक
