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Kannauj News: अभिलेखों में हेराफेरी, खतौनी में शिवालय को बना दिया शौचालय
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छिबरामऊ। पूर्वी बाईपास के निकट प्राचीन कैलाश पर्वत स्थित है। जमीन के अभिलेखों में हेरफेर करके यहां बने शिवालय को खतौनी में शौचालय दर्शाया गया है। शिकायत पर डीएम के निर्देश पर कराई गई जांच में पुराने चकबंदी अभिलेखों में शिवालय मिला, मौके पर भी शिवमंदिर बना हुआ है।
चकबंदी अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि पूर्वी बाईपास के निकट कैलाश पर्वत पर शिव मंदिर की 12 डेसीमल जमीन है। यह जमीन चकबंदी खतौनी में शौचालय की जमीन के रूप में दर्ज होने की शिकायत डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री से की गई थी। डीएम के निर्देश पर प्रकरण की जांच की गई तो 1377 फसली के चकबंदी अभिलेखों में गाटा संख्या 436 की यह जमीन शिवालय के नाम दर्ज पाई गई थी। इसके बाद दूसरी चकबंदी के दौरान इसी जमीन के नए गाटा संख्या 1128 में दर्ज यह जमीन खतौनी में शौचालय के नाम दर्ज मिली। स्थलीय निरीक्षण में इस जमीन पर सालों पुराना शिव मंदिर बना हुआ है। चकबंदी अधिकारी ने बताया कि आखिर यह चूक कहां से हुई है, इसकी जांच कराने के साथ ही अभिलेखों के ठीक करने के लिए उप संचालक एडीएम न्यायिक विजय मिश्रा को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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चकबंदी अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि पूर्वी बाईपास के निकट कैलाश पर्वत पर शिव मंदिर की 12 डेसीमल जमीन है। यह जमीन चकबंदी खतौनी में शौचालय की जमीन के रूप में दर्ज होने की शिकायत डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री से की गई थी। डीएम के निर्देश पर प्रकरण की जांच की गई तो 1377 फसली के चकबंदी अभिलेखों में गाटा संख्या 436 की यह जमीन शिवालय के नाम दर्ज पाई गई थी। इसके बाद दूसरी चकबंदी के दौरान इसी जमीन के नए गाटा संख्या 1128 में दर्ज यह जमीन खतौनी में शौचालय के नाम दर्ज मिली। स्थलीय निरीक्षण में इस जमीन पर सालों पुराना शिव मंदिर बना हुआ है। चकबंदी अधिकारी ने बताया कि आखिर यह चूक कहां से हुई है, इसकी जांच कराने के साथ ही अभिलेखों के ठीक करने के लिए उप संचालक एडीएम न्यायिक विजय मिश्रा को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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