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Kannauj News: फिजियोथेरेपी लगा रही सर्दियों में उभरे दर्द पर मरहम
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फोटो :04: मरीज की फिजियोथेरेपी करतीं डॉ. तृप्ति विश्वास। संवाद
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कन्नौज। सर्दियों में पैर, हाथ, घुटनों के दर्द और पीठ की तकलीफ बढ़ जाती है। दर्द निवारक दवाइयाें का सेवन शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। फिजियोथेरेपी न केवल दर्द से राहत प्रदान करती है बल्कि इसका लंबे समय तक काेई दुष्प्रभाव भी नहीं होते हैं। ऐसे में मरीज फिजियोथेरेपी को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. तृप्ति विश्वास ने बताया कि जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीज फिजियोथेरेपी के लिए आ रहे है। इससे साफ जाहिर है कि मरीजों का फिजियोथेरेपी की ओर रुझान बढ़ रहा है। भविष्य में यह चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग बनेगी। इनमें कंधे की जकड़न, घुटनों की अकड़न, रीढ़ की हड्डी के दर्द, लकवाग्रस्त मरीजों और खेलकूद से जुड़ी चोटों से पीड़ित लोग शामिल हैं। इन सभी को फिजियोथेरेपी से बेहतर परिणाम मिले हैं।
डॉ. तृप्ति ने बताया कि लगातार दर्द निवारक दवाइयों के सेवन से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है लेकिन फिजियोथेरेपी प्राकृतिक तरीके से दर्द को नियंत्रित करती है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाकर शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। फिजियोथेरेपी को सबसे सुरक्षित इलाज माना जाता है जिससे मरीज अपनी दैनिक गतिविधियों को सामान्य रूप से कर पाते हैं और लंबे समय तक चलने-फिरने की क्षमता बनाए रख पाते हैं।
फिजियोथेरेपी ने दर्द से दी राहत
मरीज अलका ने बताया कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण गर्दन से दर्द उठकर बाएं हाथ तक आ रहा था। फिजियोथेरेपी कराने से काफी राहत मिली है। बक्शीपुरवा निवासी दिलीप ने बताया कि दाएं पैर का नीकैप टूट गया था। ऑपरेशन के बाद बैठने में दिक्कत होती थी। फिजियोथेरेपी कराने के बाद पैर मुड़ने लगा है। ग्राम बकोटी निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि दाएं पैर में दर्द के कारण सोने में दिक्कत हो रही थी। फिजियोथेरेपी कराने से दर्द में काफी राहत मिली है।
फिजियोथेरेपी के जरिए हड्डियों के दर्द में काफी राहत मिलती है। दर्द की दवा के सेवन से बचना चाहिए। फिजियोथेरेपी बेहतर उपचार है। फिजियोथेरेपिस्ट वार्डों में जाकर भी इलाज कर रहे हैं जिससे मरीज को लाभ भी मिल रहा है। -डॉ. शक्ति बसु, सीएमएस
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फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. तृप्ति विश्वास ने बताया कि जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीज फिजियोथेरेपी के लिए आ रहे है। इससे साफ जाहिर है कि मरीजों का फिजियोथेरेपी की ओर रुझान बढ़ रहा है। भविष्य में यह चिकित्सा पद्धति का अभिन्न अंग बनेगी। इनमें कंधे की जकड़न, घुटनों की अकड़न, रीढ़ की हड्डी के दर्द, लकवाग्रस्त मरीजों और खेलकूद से जुड़ी चोटों से पीड़ित लोग शामिल हैं। इन सभी को फिजियोथेरेपी से बेहतर परिणाम मिले हैं।
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डॉ. तृप्ति ने बताया कि लगातार दर्द निवारक दवाइयों के सेवन से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है लेकिन फिजियोथेरेपी प्राकृतिक तरीके से दर्द को नियंत्रित करती है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाकर शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। फिजियोथेरेपी को सबसे सुरक्षित इलाज माना जाता है जिससे मरीज अपनी दैनिक गतिविधियों को सामान्य रूप से कर पाते हैं और लंबे समय तक चलने-फिरने की क्षमता बनाए रख पाते हैं।
फिजियोथेरेपी ने दर्द से दी राहत
मरीज अलका ने बताया कि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण गर्दन से दर्द उठकर बाएं हाथ तक आ रहा था। फिजियोथेरेपी कराने से काफी राहत मिली है। बक्शीपुरवा निवासी दिलीप ने बताया कि दाएं पैर का नीकैप टूट गया था। ऑपरेशन के बाद बैठने में दिक्कत होती थी। फिजियोथेरेपी कराने के बाद पैर मुड़ने लगा है। ग्राम बकोटी निवासी अरविंद कुमार ने बताया कि दाएं पैर में दर्द के कारण सोने में दिक्कत हो रही थी। फिजियोथेरेपी कराने से दर्द में काफी राहत मिली है।
फिजियोथेरेपी के जरिए हड्डियों के दर्द में काफी राहत मिलती है। दर्द की दवा के सेवन से बचना चाहिए। फिजियोथेरेपी बेहतर उपचार है। फिजियोथेरेपिस्ट वार्डों में जाकर भी इलाज कर रहे हैं जिससे मरीज को लाभ भी मिल रहा है। -डॉ. शक्ति बसु, सीएमएस
