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Kannauj News: तिर्वा एस्टेट के गाटा संख्या चिह्नांकन में जुटी तहसील
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तिर्वा। अपर आयुक्त कानपुर न्यायालय द्वारा तिर्वा एस्टेट की 67.29 एकड़ भूमि को राजस्व अभिलेखों में सरकार के नाम दर्ज करने के आदेश के बाद तहसील प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। आदेश के अनुपालन में राजस्व टीम अब खतौनी में दर्ज भूमि के आधार पर संबंधित गाटा संख्याओं की पहचान और सत्यापन में जुट गई है। अब तक 20 से अधिक गाटा संख्याओं को चिह्नित किया जा चुका है जबकि अन्य की भी गहन जांच जारी है।
प्रशासनिक जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि चिह्नित की गई कुछ गाटा संख्याओं पर पहले से ही मकान बने हुए हैं। ऐसे मामलों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तहसील प्रशासन ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त किए जा सकें। वहीं, जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सीलिंग की इस भूमि के बारे में जानकारी होने के बावजूद कई जमीन विक्रेताओं ने धड़ल्ले से प्लॉटिंग कर जमीन की बिक्री कर दी। इससे न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि कई खरीदारों के सामने भी कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। तहसीलदार अवनीश सिंह का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की जा रही है। जिन स्थानों पर अवैध निर्माण या बिक्री है उसकी भी रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दी गई है।
जमीन चिह्नित हो तो बनेगा केंद्रीय विद्यालय
सोमवार को जमीन का निरीक्षण करने के दौरान एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति मिल गई है, जिसके लिए जमीन को चिह्नित किया जाना था। ऐसे में कोर्ट द्वारा मिले आदेश के बाद जल्द ही जमीन को चिह्नित कर केंद्रीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित की जाएगी।
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वर्जन
तिर्वा एस्टेट की जमीन की पैमाइश के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद जल्द ही भूमि का सीमांकन कर अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी
प्रशासनिक जांच के दौरान एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि चिह्नित की गई कुछ गाटा संख्याओं पर पहले से ही मकान बने हुए हैं। ऐसे मामलों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तहसील प्रशासन ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी है, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए दिशा-निर्देश प्राप्त किए जा सकें। वहीं, जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि सीलिंग की इस भूमि के बारे में जानकारी होने के बावजूद कई जमीन विक्रेताओं ने धड़ल्ले से प्लॉटिंग कर जमीन की बिक्री कर दी। इससे न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि कई खरीदारों के सामने भी कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। तहसीलदार अवनीश सिंह का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की जा रही है। जिन स्थानों पर अवैध निर्माण या बिक्री है उसकी भी रिपोर्ट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दी गई है।
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जमीन चिह्नित हो तो बनेगा केंद्रीय विद्यालय
सोमवार को जमीन का निरीक्षण करने के दौरान एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति मिल गई है, जिसके लिए जमीन को चिह्नित किया जाना था। ऐसे में कोर्ट द्वारा मिले आदेश के बाद जल्द ही जमीन को चिह्नित कर केंद्रीय विद्यालय के लिए प्रस्तावित की जाएगी।
वर्जन
तिर्वा एस्टेट की जमीन की पैमाइश के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद जल्द ही भूमि का सीमांकन कर अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी