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Kannauj News: औद्योगिक गलियारे को लॉजिस्टिक क्लस्टर के रूप में विकसित करेगा यूपीडा
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कन्नौज। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ठठिया क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक गलियारा विकसित कर रहा है। इसे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय इत्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना और हजारों रोजगार पैदा करना है। इत्रनगरी उन 27 जिलों में शामिल है जहां राज्य सरकार आधुनिक विनिर्माण और रसद क्लस्टर बना रही है।
यह गलियारा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित है जिससे दिल्ली और लखनऊ जैसे बाजारों तक माल परिवहन आसान होगा। निवेशकों को यहां चौड़ी सड़कें, 24घंटे बिजली और जल निकासी जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यूपीडा उद्योगों की स्थापना के लिए तेज क्लीयरेंस और नीति-आधारित प्रोत्साहन देने को प्रतिबद्ध है। इससे विनिर्माण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। प्लॉट आवंटन और निवेश की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी। उपजिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि औद्योगिक गलियारे के लिए 352 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। 600 किसानों से जमीन खरीदी जा रही है, जिसमें 200 बैनामे मार्च तक पूरे हो जाएंगे।
निवेशकों के लिए भूखंड आवंटन
ठठिया स्थित औद्योगिक गलियारे में भूखंड 30 साल के लीज पर दिए जाएंगे। इसे बाद में 90 साल तक बढ़ाया जा सकता है जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी। आवंटन पत्र जारी होने के बाद कुल लागत का 20 से 30 फीसदी अग्रिम भुगतान करना होगा। शेष 70 से 80 फीसदी राशि को अगले 10 वर्षों में अर्धवार्षिक किस्तों में चुकाया जा सकेगा। इन किस्तों पर वर्तमान में करीब 9.5 फीसदी वार्षिक ब्याज लागू होगा।
इत्र उद्योग को वैश्विक मंच
यूपीडा के औद्योगिक गलियारे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय इत्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है। बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इत्र क्षेत्र में निवेश करने वाली इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन मिलेंगे। यह पहल इत्रनगरी की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूत करेगी।
वर्जन
औद्योगिक गलियारे के लिए 352 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसके तहत करीब 600 किसानों से जमीन खरीदी जा रही है। अभी 200 बैनामे शेष हैं, जिन्हें इस माह में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अधिग्रहीत भूमि यूपीडा को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
-राजेश कुमार, उपजिलाधिकारी, तिर्वा
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई। चालू वित्तीय वित्तीय वर्ष में अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी होने के बाद निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसे लॉजिस्टिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।
-राजेश पांडेय, नोडल अधिकारी, यूपीडा
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यह गलियारा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित है जिससे दिल्ली और लखनऊ जैसे बाजारों तक माल परिवहन आसान होगा। निवेशकों को यहां चौड़ी सड़कें, 24घंटे बिजली और जल निकासी जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यूपीडा उद्योगों की स्थापना के लिए तेज क्लीयरेंस और नीति-आधारित प्रोत्साहन देने को प्रतिबद्ध है। इससे विनिर्माण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। प्लॉट आवंटन और निवेश की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी। उपजिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि औद्योगिक गलियारे के लिए 352 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। 600 किसानों से जमीन खरीदी जा रही है, जिसमें 200 बैनामे मार्च तक पूरे हो जाएंगे।
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निवेशकों के लिए भूखंड आवंटन
ठठिया स्थित औद्योगिक गलियारे में भूखंड 30 साल के लीज पर दिए जाएंगे। इसे बाद में 90 साल तक बढ़ाया जा सकता है जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक स्थिरता मिलेगी। आवंटन पत्र जारी होने के बाद कुल लागत का 20 से 30 फीसदी अग्रिम भुगतान करना होगा। शेष 70 से 80 फीसदी राशि को अगले 10 वर्षों में अर्धवार्षिक किस्तों में चुकाया जा सकेगा। इन किस्तों पर वर्तमान में करीब 9.5 फीसदी वार्षिक ब्याज लागू होगा।
इत्र उद्योग को वैश्विक मंच
यूपीडा के औद्योगिक गलियारे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय इत्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है। बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं से उत्पादों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इत्र क्षेत्र में निवेश करने वाली इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन मिलेंगे। यह पहल इत्रनगरी की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूत करेगी।
वर्जन
औद्योगिक गलियारे के लिए 352 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसके तहत करीब 600 किसानों से जमीन खरीदी जा रही है। अभी 200 बैनामे शेष हैं, जिन्हें इस माह में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अधिग्रहीत भूमि यूपीडा को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
-राजेश कुमार, उपजिलाधिकारी, तिर्वा
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई। चालू वित्तीय वित्तीय वर्ष में अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी होने के बाद निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसे लॉजिस्टिक क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे हजारों बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।
-राजेश पांडेय, नोडल अधिकारी, यूपीडा
