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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   4.93 lakh farmers in Hardoi excluded from Kisan Samman Nidhi payments halted due to various regulations

एक्सक्लूसिव: हरदोई में 4.93 लाख किसान सम्मान निधि से बेदखल, अलग-अलग नियमों से किस्त पर लगा ब्रेक, जानें वजहें

Tue, 06 Oct 2026 10:41 AM IST
Himanshu Awasthi आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई
आनंद मिश्रा, अमर उजाला, हरदोई Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 06 Oct 2026 10:41 AM IST
सार

Hardoi News: जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत नियमों और तकनीकी सत्यापन के कड़े फिल्टर लगने से 4.93 लाख किसान सूची से बाहर हो गए हैं। योजना की शुरुआत से अब तक कुल 8,33,289 किसानों को कम से कम एक बार किस्त मिली थी, लेकिन सभी 23 किस्तों का लगातार लाभ पाने वाले किसानों की संख्या महज 3,40,014 ही रह गई है।

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4.93 lakh farmers in Hardoi excluded from Kisan Samman Nidhi payments halted due to various regulations
पीएम किसान सम्मान निधि - फोटो : amar ujala

विस्तार

किसानों को सम्मान देने के प्रतीक के तौर पर प्रचारित-प्रसारित की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सात साल बीत चुके हैं। आंकड़ों का खेल देखें, तो हरदोई जिले के किसानों को भरपूर सम्मान मिला पर आंकड़ों को खंगाले तो पता चलता है कि नियमों के मकड़जाल में फंसकर किसानों का सबसे ज्यादा असम्मान भी जिले में ही हो गया।

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जनपद में 8,33,289 किसानों को कम से कम एक बार किसान सम्मान निधि मिली लेकिन बाद में नियमों के ताने बाने में फंसे किसानों में सिर्फ 3,40,014 ही ऐसे हैं जिन्हें योजना की शुरूआत से लेकर अब तक लगातार सम्मान मिला। अंतर 4.93 लाख का है। पढ़ने और सुनने में यह आंकड़े चौका सकते हैं, लेकिन तल्ख हकीकत यही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत वर्ष 2019 में हुई थी।

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लाभार्थियों के लिए कई नियम लागू हो गए
किसानों को इस योजना के तहत हर चार माह में दो-दो हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था है। यह निधि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। योजना लागू होने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद या यूं कहें कि केंद्र की सत्ता में भाजपा की वापसी के बाद लाभार्थियों के लिए कई नियम लागू हो गए। नियम लागू होते ही विभाग ने अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत प्रणालियों का इस्तेमाल करते हुए फिल्टर लगा दिए।

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आधे से भी कम रह गई संख्या
फिल्टर लगने से लाभार्थियों की संख्या अलग-अलग वजहों से घटती चली गई। कृषि योग्य भूमि खरीदने वालों को सम्मान निधि नहीं मिल सकती। आयकर दाताओं को सम्मान निधि देने पर रोक है। पति पत्नी दोनों को सम्मान निधि नहीं दी जानी है। विरासत के तौर पर नाम दर्ज होने के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल किए बिना सम्मान नहीं दिया जा सकता। ऐसे कई नियमों के लागू होने के बाद लाभार्थियों की संख्या आधे से भी कम रह गई।

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एक नजर आंकड़ों पर

  • 8,33,289 किसान ऐसे हैं जिन्हें योजना की शुरूआत से अब तक कम से कम एक बार सम्मान निधि मिली है।
  • 6,62,966 किसान ऐसे हैं जिन्हें एक से ज्यादा किस्त मिली हैं लेकिन अब तक जारी सभी 23 किस्त नहीं मिलीं।
  • 3,40,014 किसान ऐसे हैं जिन्हें योजना की शुरूआत से अब तक हर बार सम्मान निधि मिली।
  • 4154 किसानों की सम्मान निधि इसलिए रोक दी गई क्योंकि वह आयकर दाता थे।
  • 12864 किसानों की सम्मान निधि इसलिए रोक दी गई कि लाभार्थी पति-पत्नी थे।
  • 32,000 किसानों की सम्मान निधि उनके मृत हो जाने के कारण रोक दी गई।
  • 31,123 किसानों की सम्मान निधि इसलिए रोक दी गई क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि उनके नाम भूमि किसकी विरासत से आई है।
  • 3841 किसानों की निधि इसलिए रोक दी गई कि उन्हें जमीन विरासत से नहीं किसी दूसरे स्रोत से मिली थी।

प्रकरण-1
भरखनी विकास खंड के कराही नकटौरा सिसाला निवासी उदयभान को किसान सम्मान निधि मिलती थी। पिछले कई बार से उन्हें सम्मान निधि नहीं मिल रही। पता चला कि उनके पिता महावीर के नाम किसान सम्मान निधि जाती थी। उनके निधन के बाद वही जमीन विरासत के रूप में उदयभान के नाम आ गई। महावीर को भी सम्मान निधि जाती रही। अब दोनों की सम्मान निधि रोक दी गई है।

प्रकरण- 2
टोडरपुर विकास खंड के नगरिया निवासी विकास सिंह के पिता अशोक सिंह को किसान सम्मान निधि मिलती थी। अशोक सिंह का निधन होने के बाद उनकी खेती विकास सिंह के नाम आ गई। विकास सिंह को भी किसान सम्मान निधि जाने लगी। इस बीच अभिलेखों का सत्यापन हुआ, तो पता चला कि अभिलेखों में अशोक सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र ही नहीं लगा है। ऐसे में विकास की सम्मान निधि रोक दी गई।

प्रकरण- 3
शाहाबाद विकास खंड के फदनापुर निवासी सुधाकर को भी किसान सम्मान निधि मिल रही थी। अचानक सुधाकर की सम्मान निधि पर रोक लग गई। जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि विरासत के तौर पर उन्हें खेती नहीं मिली। विरासत के अलावा किसी अन्य स्रोत जैसे वसीयत, दानपत्र आदि से खेत मिलने पर सम्मान निधि नहीं दी जाती है।

प्रकरण- 4
भरखनी विकास खंड की बरुआर पंचशाला की रहने वालीं सुमन काे किसान सम्मान निधि मिलती थी। अचानक उनकी सम्मान निधि पर रोक लगा दी गई। उनके पति राधेश्याम को भी सम्मान निधि मिलती थी। उनकी निधि पर भी रोक लगा दी गई। जब कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो पता चला कि पति पत्नी, दोनों को निधि नहीं दी जा सकती। इसलिए रोक लगा दी गई।

2019 के लोकसभा चुनाव में गेम चेंजर मानी गई थी किसान सम्मान निधि
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरूआत वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले की गई थी। चुनावी बयार में जब किसानों के खातों में योजना के तहत पहली किस्त के दो-दो हजार रुपये पहुंचे तो किसानों ने भाजपा पर जमकर वोट बरसाए। राजनीतिक विश्लेषक उस समय भी यही मानते थे कि 2019 के लोकसभा चुनाव में किसान सम्मान निधि गेम चेंजर साबित हुई।

अपात्राें को चिह्नित करने की प्रक्रिया और नए पात्रों को जोड़ने का काम लगातार चलता रहता है। अपात्र पाए गए लोगों से खासतौर से आयकर दाताओं से लगभग पौने दो करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। जो लोग अपात्र मिलते हैं उनकी सम्मान निधि रोककर शासन को सूचना भेज दी जाती है। किसान सम्मान निधि से जुड़ी कोई भी जानकारी ब्लॉक स्तर पर बने कार्यालयों से लेकर जिला मुख्यालय स्थित उपनिदेशक कृषि के कार्यालय में भी की जा सकती है। जिन मामलों में दंपती को सम्मान निधि मिल रही है उनका सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी।  -डॉ. राजेश कुमार, उपनिदेशक कृषि

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