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अधिवक्ता हत्याकांड : विवेचना में इंस्पेक्टर आशीष ने किया था खेल
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कानपुर। वन स्टॉप सेंटर में महिला की आत्महत्या के मामले में बर्खास्त इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी पर एक बार फिर आरोप लगे हैं। इस बार 22 दिसंबर 2021 को नवाबगंज थाना क्षेत्र में हुए अधिवक्ता राजाराम हत्याकांड के वादी नरेंद्र देव ने तत्कालीन इंस्पेक्टर आशीष पर विवेचना को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विवेचना के नाम पर आशीष ने कई आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।
नरेंद्र देव के अनुसार वर्ष 2021 में इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी नवाबगंज थाना प्रभारी थे। 22 दिसंबर की शाम करीब 7:15 बजे पिता राजाराम घर के अंदर थे। तभी उनके मोबाइल फोन पर किसी का फोन आया। फोन सुनने के बाद वे घर के अंदर से मेनगेट की ओर आए। उसी समय उन्हें कनपटी पर गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई। परिजनों ने दो लोगों को हाथ में तमंचा लेकर पास में खड़ी बाइक से भागते देखा था।
नरेंद्र के अनुसार पिता का जमीन का विवाद एनआरआई सिटी के निदेशकों से और कल्याणपुर निवासी राजबहादुर से था। इसके कारण निदेशकों राजबहादुर व दो अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना खुद इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी कर रहे थे। उन्होंने रामखिलावन, बिठूर के फत्तेपुर निवासी अंकित यादव, चौबेपुर के बूढ़नपुर निवासी दिलनाज और छोटे भाई की पत्नी रेखा वर्मा को आरोपी बनाया। आरोप है कि इंस्पेक्टर आशीष ने निदेशकों से मोटी डील करके उनके नाम हटा दिए थे।
नरेंद्र ने बताया कि छोटे भाई शिवाजी की पत्नी रेखा बैंक कर्मी हैं। उन्होंने पिता राजाराम व अन्य परिजन के खिलाफ वर्ष 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रेखा ने हत्याकांड से करीब तीन साल दिसंबर 2018 में दो वकीलों को जमीन का एग्रीमेंट किया था। उन्होंने तीन आराजी की कुल 2.12 हेक्टेयर जमीन शारदानगर और नवाबगंज के सुक्खुपुरवा नई बस्ती निवासी अधिवक्ता से एग्रीमेंट की थी। पिता राजाराम को जानकारी हुई तो उन्होंने रेखा के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने के लिए तहरीर दी थी। हालांकि, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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नरेंद्र देव के अनुसार वर्ष 2021 में इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी नवाबगंज थाना प्रभारी थे। 22 दिसंबर की शाम करीब 7:15 बजे पिता राजाराम घर के अंदर थे। तभी उनके मोबाइल फोन पर किसी का फोन आया। फोन सुनने के बाद वे घर के अंदर से मेनगेट की ओर आए। उसी समय उन्हें कनपटी पर गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गई। परिजनों ने दो लोगों को हाथ में तमंचा लेकर पास में खड़ी बाइक से भागते देखा था।
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नरेंद्र के अनुसार पिता का जमीन का विवाद एनआरआई सिटी के निदेशकों से और कल्याणपुर निवासी राजबहादुर से था। इसके कारण निदेशकों राजबहादुर व दो अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना खुद इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी कर रहे थे। उन्होंने रामखिलावन, बिठूर के फत्तेपुर निवासी अंकित यादव, चौबेपुर के बूढ़नपुर निवासी दिलनाज और छोटे भाई की पत्नी रेखा वर्मा को आरोपी बनाया। आरोप है कि इंस्पेक्टर आशीष ने निदेशकों से मोटी डील करके उनके नाम हटा दिए थे।
नरेंद्र ने बताया कि छोटे भाई शिवाजी की पत्नी रेखा बैंक कर्मी हैं। उन्होंने पिता राजाराम व अन्य परिजन के खिलाफ वर्ष 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रेखा ने हत्याकांड से करीब तीन साल दिसंबर 2018 में दो वकीलों को जमीन का एग्रीमेंट किया था। उन्होंने तीन आराजी की कुल 2.12 हेक्टेयर जमीन शारदानगर और नवाबगंज के सुक्खुपुरवा नई बस्ती निवासी अधिवक्ता से एग्रीमेंट की थी। पिता राजाराम को जानकारी हुई तो उन्होंने रेखा के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने के लिए तहरीर दी थी। हालांकि, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
