सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Banda Case Judge Awards Death Penalty to Convicted Sexual Assault Accused in Banda POCSO Case

UP: 'च्यूइंगम चबाता रहा दोषी... फैसला सुनते ही कांपने लगे हाथ-पांव', लड़खड़ाते हुए फर्श पर बैठ गया अमित

राजीव त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 07 Jan 2026 12:17 PM IST
विज्ञापन
सार

बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पाॅक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ। जज का फैसला सुनते ही आरोपी के हाथ-पांव कांपने लगे और वह लड़खड़ाते हुए फर्श पर बैठ गया।

Banda Case Judge Awards Death Penalty to Convicted Sexual Assault Accused in Banda POCSO Case
banda harassment case - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

बांदा के दुष्कर्म कांड में अदालत का माहौल उस समय अचानक बदल गया, जब 56 दिनों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाने की प्रक्रिया शुरू की। इससे पहले तक आरोपी अमित रैकवार अदालत के कटघरे में बेपरवाह नजर आ रहा था। 
Trending Videos


दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के दौरान वह च्यूइंगम चबाता रहा, मानो उसे आने वाले फैसले की गंभीरता का अंदाजा ही न हो। वहीं, पिता बाबूलाल ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है। जैसे ही अदालत ने पॉक्सो एक्ट के मामले में उसे दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई, अमित के हाथ-पांव कांपने लगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

वह कुछ क्षणों तक खड़ा नहीं रह सका और फर्श पर बैठ गया। सिर दीवार से टिकाए वह खुद को संभालने की कोशिश करता रहा लेकिन डर और घबराहट उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी। उसे सीधे जिला कारागार भेज दिया गया। जहां रास्ते में वह बार-बार खुद को निर्दोष बताते हुए कह जा रहा था कि मैं घर में था ही नहीं, मुझे निर्दोष फंसाया जा रहा है। 

पीड़ित परिवार को मिला सुकून
बांदा के महोरछा गांव में मासूम से दुष्कर्म के दोषी अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार के चेहरों पर सुकून और चिंता के मिले-जुले भाव नजर आए। पीड़िता की मां ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पूरी तरह सुकून तो तब मिलेगा, जब वो फंदे पर लटक जाएगा।
 

दुष्कर्म पीड़िता छह वर्षीय मासूम की मां ने बताया कि घटना की यादें अभी भी परिवार को सताती हैं। 25 जुलाई 2025 को स्कूल से लौट रही बच्ची को अमित ने दो रुपये की टॉफी का लालच देते हुए 10 रुपये का नोट देकर गुटका मंगाने के लिए अपने घर बुलाया और हैवानियत की हदें पार कर दीं थीं। बच्ची के शरीर पर काटने के निशान और गंभीर चोटें थीं।
 

यहां तक कि मासूम की कटी जीभ आरोपी के घर के नाली में पुलिस को मिली। मेडिकल कालेज में डॉक्टरों ने दुष्कर्म पीड़िता का प्राथमिक उपचार कर देर रात ही कानपुर के लिए रेफर कर दिया था। जहां पर उसकी तीन सर्जरी की गईं। वहीं 17-18 वर्ष की आयु पूरी करने पर बच्चेदानी की सर्जरी भी कराई जाएगी। पिता ने बताया कि बच्ची अब स्कूल नहीं जाती, रातों को चीखती है। 

'मरते दम तक फंदे पर लटकाओ', जज ने दुष्कर्म के दोषी को सुनाई मौत की सजा
बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पाॅक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ। मंगलवार सुबह न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा, दोषी को मरते दम तक फंदे से लटका कर रखा जाए। इसके बाद उन्होंने कलम की निब तोड़ दी।

न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है। यह सनसनीखेज घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। दोषी अमित रैकवार स्कूल से लौट रही छह साल की बच्ची को फुसलाकर अपने घर ले गया था।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने बच्ची को गुटखा मंगाने के बहाने रोका और फिर घर ले जाकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। दुष्कर्म के दौरान बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए और मेडिकल जांच में पता चला कि पीड़िता के शरीर में कई जगहों पर गंभीर चोटें थीं।

पुलिस ने वारदात के बाद ही देर रात अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। तीन दिन बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था। सात अक्तूबर 2025 को कालिंजर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा छह और भारतीय नवीन दंड संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।

12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमा शुरू हुआ। कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 10 गवाह पेश किए गए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले तीन डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक, डीएनए, मेडिकल रिपोर्ट और बीएनएसएस की धारा 180 व 183 के तहत दर्ज बयान शामिल थे। इन सभी सबूतों ने आरोपी को पुख्ता तौर पर दोषी साबित किया।



सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी ने मासूम को पहले बहलाया, फिर घर में ले जाकर दुष्कर्म किया। अधिवक्ता ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में बताते हुए मौत की सजा को ही न्यायोचित बताया। बचाव पक्ष ने सबूतों की कमी का हवाला दिया लेकिन, अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed