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कानपुर: 24 घंटे में दो बार देते थे नशे का इंजेक्शन, 100 कोरे कागजों पर कराए हस्ताक्षर, प्रणवपत का बड़ा खुलासा

Thu, 29 Oct 2026 09:44 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 29 Oct 2026 09:44 AM IST
सार

Kanpur News: सिंहानिया परिवार संपत्ति हड़पने के मामले में पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुई पूछताछ के दौरान पीड़ित प्रणवपत सिंहानिया ने बताया कि आरोपियों ने उसे नशे की लत में रखकर 100 से अधिक कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए थे। पुलिस को आशंका है कि आरोपी इन सादे कागजों का इस्तेमाल कोर्ट में यह साबित करने के लिए कर सकते हैं कि प्राथमिकी पुलिस के दबाव में दर्ज कराई गई थी। 

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Kanpur Injections of intoxicants twice every 24 hours signatures were obtained on 100 blank sheets of paper
पीड़ित प्रणव अपने भाई के साथ पुलिस कार्यालय - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में सिंहानिया परिवार के युवक प्रणवपत सिंहानिया से उसकी करोड़ों की संपत्ति हड़पने वाले बिल्डर बेहद शातिर हैं। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने फंसने से पहले ही अपने बचने का रास्ता बना रखा है। बुधवार को प्रणव को पूछताछ के लिए पुलिस कमिश्नर कार्यालय लाया गया। यहां प्रणवपत ने बताया कि होटल में नशे की हालत में आरोपियों ने उससे कोरे 100 से अधिक कागजों पर हस्ताक्षर कराए हैं। यह सुनकर पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट गए।

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पुलिस को आशंका है कि उन्हीं में से किसी एक कागज का इस्तेमाल आरोपी पुलिस के खिलाफ कोर्ट में भी कर सकते हैं। बीती 24 अक्तूबर को प्रणवपत ने बिल्डर सुयश अस्थाना, उसके पिता अनूप अस्थाना, बृजेंद्रनाथ मिश्रा और मेडिकल स्टोर संचालक श्रीराम उर्फ रमित पर केस दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि सभी ने मिलकर उनके परिवार की करोड़ों की संपत्ति हड़प ली। स्वरूपनगर पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बुधवार को प्रणवपत ने पूछताछ में बताया कि संपत्ति के कागजातों के अलावा बिल्डरों ने उनसे कोरे कागजों पर भी हस्ताक्षर लिए हैं।

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अपने बचाव के रास्ते भी बना रखे थे
सूत्राें के अनुसार कोरे कागजों से पुलिस को आशंका है कि कहीं आरोपी उन पर यह न लिखकर कोर्ट में प्रस्तुत कर दें कि पुलिस के दबाव में आकर प्रणव ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इससे पुलिस इतने बड़े मामले में गलत साबित हो सकती है। इसके अलावा प्रणव ने पुलिस को यह भी बताया कि रॉयल क्लिफ और रीजेंटा होटलों के जिन कमरों में उन्हें रखा गया वहां रजिस्टर में वे दोनों कमरे सुयश के नाम पर दर्ज हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आरोपियों को पता था कि मामले में कभी भी पुलिस उन पर शिकंजा कस सकती है इसलिए उन्होंने अपने बचाव के रास्ते भी बना रखे थे।

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सुयश 24 घंटे में दो बार देता था नशे का इंजेक्शन
प्रणव ने बताया कि होटलों के कमरों में उससे विक्रय अनुबंध (सेल डीड) कराया गया और रजिस्ट्रार दफ्तर ले जाकर रजिस्ट्री कराई गई। आरोपियों को जब भी कोई लिखापढ़ी करानी होती थी तो उससे 24 घंटे पहले सुयश अस्थाना उन्हें नशे का इंजेक्शन देता था। नशे का इस कदर आदी हो गया था कि न मिलने पर शरीर ऐंठने लगता था। हस्ताक्षर कराने के बाद उसे दूसरा इंजेक्शन दिया जाता था। पहले अनूप और सुयश ने कोपरगंज की दुकानों की लिखापढ़ी अपने नाम कराई। फिर फजलगंज स्थित राधा कुंज मकान का हिस्सा रमित ने अपनी बहन पूर्णिमा दीक्षित के नाम उससे लिखवा ली। प्रणव के मुताबिक बिल्डरों का मुख्य फाइनेंसर रमित ही है। चारों की नजर उनके दूसरे परिवार की संपत्ति पर भी थी, जिसे पाने के लिए उन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। तीन माह पूर्व फजलगंज में दर्ज कराई गई प्राथमिकी इसी साजिश का एक हिस्सा थी।

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मां को लौटाया, हालत बिगड़ी तो नौकर को बुलाया
प्रणव ने बताया कि होटल में बंधक बनाए जाने के दौरान एक बार उनकी मां अंबिका उनसे मिलने आईं तो आरोपियों ने यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि अभी प्रणव बेहद व्यस्त है। परिवार के किसी सदस्य से मोबाइल पर बात तक नहीं कराते थे। अगस्त 2026 में नशे की वजह से जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तब पुराने घरेलू नौकर अजय को जरूर कुछ दिनों के लिए उनके साथ होटल में रखा गया।

सुयश व अनूप ने रुपये वापस भी ले लिए
बताया कि आरोपी न सिर्फ उनका होटल बल्कि उनका कमरा और फ्लोर भी बार-बार बदला करते थे, ताकि किसी को कोई संदेह न हो। प्रणव के बड़े भाई अद्वैतपत ने बताया कि जब कभी वह थाने में छोटे भाई को बंधक बनाए जाने की शिकायत करते तो आरोपी पुलिस को यह कहकर गुमराह कर देते थे कि इन लोगों का आपसी विवाद है। पुलिस को बीच में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है। अद्वैतपत के मुताबिक बिल्डरों ने भाई के अकाउंट में करीब दो करोड़ रुपये डाले फिर खाली चेकों पर साइन कराकर सुयश व अनूप ने रुपये वापस भी ले लिए।

होटल में कमरे किसके नाम से बुक थे। वहां के सीसीटीवी फुटेज देखे जाएंगे और नशे का इंजेक्शन पहुंचाने वाले का भी पता किया जाएगा। इसके अलावा पीड़ित से पूछताछ कर साजिश के पीछे और कौन-कौन लोग हैं उनके नाम प्रकाश में लाए जाएंगे। सादे कागजों में हस्ताक्षर कराने के मामले को भी जांच में शामिल किया जाएगा।  -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर

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