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UP: पहलवानी के सीखे पेच, जुआ के फड़ भी बटोरे, फिर बने राजनीति में उस्ताद; विवादों से सियासत के शिखर तक

अमर उजाला नेटवर्क, फर्रुखाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 19 Mar 2026 03:30 PM IST
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सार

भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में हत्या के बाद सियासत के शिखर पर पहुंचा पूर्व विधायक विजय सिंह का राजनीतिक सफर उम्रकैद की सजा होने के बाद खत्म हो गया। 

Ex-MLA Vijay Singh Journey Ends After Life Sentence From Controversies to Political Rise Details in Hindi
पूर्व विधायक विजय सिंह - फोटो : amar ujala
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विस्तार

हत्यारोपी पूर्व विधायक विजय सिंह लगातार तीन बार विधायक बना। उसने अखाड़े में पहलवानी के पेंच सीखने के बाद जुए के फड़ भी जीतकर बटोरे। इसके साथ ही राजनीति का उस्ताद बन गया। राजनीतिक सफर की मंजिल तय करने के दौरान उसकी पूर्व मंत्री से रंजिश चलती रही। फिलहाल वह पूर्व मंत्री की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
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घर में हुए धमाके बाद पूर्व विधायक फिर एक बार चर्चा में आ गया है। राजनीतिक सफर के उस्ताद कहे जाने वाले पूर्व विधायक विजय सिंह की कभी तूती बोलती थी। जो जेल जाने के बाद चुप्पी में बदल गई है। पूर्व विधायक विजय सिंह के पिता प्रेम सिंह पहलवान का अखाड़ा मशहूर था। 
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यहां कई जनपदों के पहलवान अखाड़े में अपने पेंच आजमाते थे। इससे पूर्व विधायक का पहलवानी पेंचों से बचपन का नाता था। इसके बाद वह जुए में दांव लगाने लगे। उसमें लाखों के वारे-न्यारे किए। वह पड़ोसी जनपदों में भी जुए में दांव लगाया करते थे। 

 

इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाया और वर्ष 1995 में उनकी पत्नी दमयंती सिंह नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष बनीं। हालांकि सत्ता की हनक पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पास थी। विजय सिंह का राजनीतिक दायरा बढ़ने के साथ दबंगई भी बढ़ती गई। 
 


नाै फरवरी 1997 की रात पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी गई। इसमें विजय सिंह को मुख्य आरोपी माना गया। इसके बावजूद उसका राजनीतिक सफर बढ़ता गया। दबदबा इतना बढ़ा कि उनकी तूती बोलने लगी और समर्थकों ने उसे राजनीति में उस्ताद की उपाधि दे दी।

भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में हत्या के बाद सियासत के शिखर पर पहुंचा पूर्व विधायक विजय सिंह का राजनीतिक सफर उम्रकैद की सजा होने के बाद खत्म हो गया। जाने-माने पहलवान पिता के साथ साधारण जाट परिवार में परवरिश हुई। छोटे-मोटे मामलों में चर्चा मिली तो उनमें राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग गई। उस दौर में भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या में संलिप्तता ने तकदीर बदल दी।

 

तीन बार विधायक बनने से सपा के शासन में विजय सिंह की जिले में तूती बोलती थी। बड़े-बड़े अधिकारी उनके दरवाजे पर खड़े देखे गए। अब परिवार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विजय सिंह के पिता प्रेम पहलवान नाला मछरट्टा स्थित अखाड़े में कुश्ती लड़ते थे। यहीं से उनकी परवरिश हुई। शुरुआती दौर में छोटे-छोटे मामलों की वजह से वह चर्चा में आने लगे। यहीं से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग गई। उस समय भाजपा में प्रदेश की राजनीति में शिखर पर ब्रह्मदत्त द्विवेदी को ही रास्ते से हटाने का कुचक्र रचा। 

10 फरवरी 1997 को ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी गई। इसमें विजय सिंह की संलिप्तता उजागर हुई और सीबीआई ने नामजद कर लिया था। यहीं से उसका राजनीतिक ग्राफ तेजी से बढ़ा। वर्ष 2002 में निर्दलीय चुनाव लड़कर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी प्रभा द्विवेदी को पराजित किया। वर्ष 2007 में सपा से चुनाव जीतकर विधायक बने। बाद में उन्होंने इस्तीफा देकर बसपा का दामन थामा और मुख्यमंत्री मायावती के करीबी माने गए।

 

वर्ष 2012 में ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को 147 वोटों के मामूली अंतर से पराजित कर तीसरी बार विधायक बना। पूर्व विधायक पर राजनीतिक सफलता के बीच कानूनी संकट गहराता गया। 2003 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

 

हाईकोर्ट ने कुछ समय के लिए रोक लगाई लेकिन 26 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सजा को बरकरार रखा। इसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा। इस समय बनारस जेल में सजा काट रहा है। संघर्ष के दौर से गुजर रहा परिवार विस्फोट के बाद बुरे संकट में फंसता नजर आ रहा है।
 

पूर्व विधायक की पुत्रवधू ने सपा से लड़ा था पालिकाध्यक्ष का चुनाव
फर्रुखाबाद। पूर्व विधायक विजय सिंह की पुत्रवधू एकता सिंह ने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। तब वह दूसरे नंबर पर रहकर चुनाव हारी थीं जबकि पूर्व विधायक की पत्नी दमयंती सिंह दो बार पालिकाध्यक्ष रह चुकी हैं।

 

पूर्व मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह ने लगातार तीन बार चुनाव जीता। उनकी पत्नी दमयंती सिंह लगातार दो चुनाव जीतकर 1995 से 2005 तक नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। इसके बाद पालिका की सत्ता वर्ष 2006 से पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल के हाथ में चली गई। वर्ष 2012 में पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल की पत्नी वत्सला अग्रवाल पालिकाध्यक्ष बनीं।
 

इसके बाद 2017 व 2023 में भी वत्सला अग्रवाल लगातार तीसरी बार पालिकाध्यक्ष चुनी गईं। वर्ष 2023 के निकाय चुनाव में पूर्व विधायक विजय सिंह के पुत्र विक्की की पत्नी एकता सिंह ने पालिकाध्यक्ष पद पर समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा था। हालांकि वह दूसरे नंबर पर रहकर वत्सला अग्रवाल से चुनाव हार गई थीं। फिलहाल पूर्व विधायक का राजनीतिक इतिहास दशकों पुराना हो चुका है। मकान में हुए विस्फोट को लेकर पूर्व पालिकाध्यक्ष दमयंती सिंह ने साजिश की आशंका भी जताई थी।
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