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Kanpur News: लीज की जमीन पर तान दिए मकान, होटल, नोटिस जारी
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कानपुर। रेलवे की लीज पर दी गई जमीनों पर अब पक्के मकान और होटल तक बन गए हैं। शहर में रेलवे की जमीनों पर करीब तीन हजार अवैध निर्माण पाए गए हैं। रेलवे ने इन कब्जों को खाली कराने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत सेंट्रल स्टेशन के आसपास के 52 भवन स्वामियों को नोटिस भेजा गया है।
शहर के दादानगर, गोविंदनगर, अनरगंज, कोपरगंज, झकरकटी पुल के नीचे, सेंट्रल स्टेशन के आसपास और मंधना जैसे इलाकों में रेलवे की बेशकीमती जमीनें हैं। इन जमीनों पर अब कच्चे-पक्के मकानों के साथ-साथ होटल भी बन गए हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, पूर्व में ये जमीनें वर्तमान निवासियों के पूर्वजों को लीज पर दी गई थीं। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद जमीनें खाली नहीं की गईं जिसके परिणामस्वरूप अब इन पर भवन निर्माण हो चुका है।
रेलवे ने सेंट्रल स्टेशन के आसपास के 52 कब्जेदारों को नोटिस जारी किया है। इनमें से 35 से अधिक कब्जेदारों ने नोटिस प्राप्त कर ली है जबकि शेष के भूखंडों पर नोटिस चस्पा की गई है। इन सभी से 13 फरवरी को संपदा न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। न्यायालय के आदेश के बाद रेलवे आगे की कार्रवाई करेगा।
ऐतिहासिक रेलवे लाइनों पर बस्तियां
इतिहासकारों के अनुसार, शहर के बीच से पहले रेलवे लाइनें गुजरती थीं। ऐसी 33 जगहें थीं जहां से रेलवे लाइनें गुजरी थीं लेकिन अब इन स्थानों पर बस्तियां बस गई हैं। इनमें जरीबचौकी, पीरोड, सेंट्रल स्टेशन से कोपरगंज, परेड बिजलीघर से म्योर मिल तक, रेलवे माल गोदाम से एल्गिन मिल तक, गोविंदपुरी से फजलगंज, और सर्वोदय नगर जैसे इलाके शामिल हैं। हालांकि, रेलवे के पास इन जमीनों के मालिकाना हक का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
वर्जन
रेलवे की जमीनों से कब्जे हटाने के लिए योजना बनाई गई है। न्यायालय के निर्देशों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
-शशिकांत त्रिपाठी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-मध्य रेलवे
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शहर के दादानगर, गोविंदनगर, अनरगंज, कोपरगंज, झकरकटी पुल के नीचे, सेंट्रल स्टेशन के आसपास और मंधना जैसे इलाकों में रेलवे की बेशकीमती जमीनें हैं। इन जमीनों पर अब कच्चे-पक्के मकानों के साथ-साथ होटल भी बन गए हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार, पूर्व में ये जमीनें वर्तमान निवासियों के पूर्वजों को लीज पर दी गई थीं। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद जमीनें खाली नहीं की गईं जिसके परिणामस्वरूप अब इन पर भवन निर्माण हो चुका है।
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रेलवे ने सेंट्रल स्टेशन के आसपास के 52 कब्जेदारों को नोटिस जारी किया है। इनमें से 35 से अधिक कब्जेदारों ने नोटिस प्राप्त कर ली है जबकि शेष के भूखंडों पर नोटिस चस्पा की गई है। इन सभी से 13 फरवरी को संपदा न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। न्यायालय के आदेश के बाद रेलवे आगे की कार्रवाई करेगा।
ऐतिहासिक रेलवे लाइनों पर बस्तियां
इतिहासकारों के अनुसार, शहर के बीच से पहले रेलवे लाइनें गुजरती थीं। ऐसी 33 जगहें थीं जहां से रेलवे लाइनें गुजरी थीं लेकिन अब इन स्थानों पर बस्तियां बस गई हैं। इनमें जरीबचौकी, पीरोड, सेंट्रल स्टेशन से कोपरगंज, परेड बिजलीघर से म्योर मिल तक, रेलवे माल गोदाम से एल्गिन मिल तक, गोविंदपुरी से फजलगंज, और सर्वोदय नगर जैसे इलाके शामिल हैं। हालांकि, रेलवे के पास इन जमीनों के मालिकाना हक का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
वर्जन
रेलवे की जमीनों से कब्जे हटाने के लिए योजना बनाई गई है। न्यायालय के निर्देशों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
-शशिकांत त्रिपाठी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-मध्य रेलवे
