कानपुर: 25 साल पुराना मारपीट का मामला, 13 साल में एक भी गवाह पेश नहीं कर सका अभियोजन, साक्ष्य अभाव में दो बरी
Kanpur News: काकादेव क्षेत्र में वर्ष 2001 में भाजपा के दो गुटों के बीच हुई मारपीट और गोलीबारी के 25 साल पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवर्षि देव कुमार की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में भाजपा नेता गुड्डू मिश्रा और बब्लू मिश्रा को बरी कर दिया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष 13 साल तक एक भी गवाह पेश नहीं कर सका।
विस्तार
कानपुर में भाजपा के दो गुटों के बीच 25 साल पहले हुई मारपीट के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय देवर्षि देव कुमार की अदालत ने भाजपा नेताओं गुड्डू और बब्लू मिश्रा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। मुकदमे में अभियोजन पक्ष 13 साल एक भी गवाह अदालत में पेश नहीं कर सका। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान एक आरोपी की मौत भी हो चुकी है।
काकादेव के नवीन नगर निवासी और तत्कालीन भाजपा वार्ड अध्यक्ष सुजीत कुमार ने 10 अक्टूबर 2001 को काकादेव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि दोपहर में वह गोपाला टावर चौराहे पर खड़े थे। आरोप था कि उसी दौरान रावतपुर के रोशन नगर निवासी गुड्डू मिश्रा और रावतपुर गांव निवासी बब्लू मिश्रा अपने साथियों शेखर पांडे, दीपू पांडे और शिवबोधन मिश्रा के साथ वहां पहुंचे।
तमंचे से फायर करने का भी लगाया था आरोप
आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और 250 रुपये व घड़ी छीन ली। रिपोर्ट में गुड्डू मिश्रा पर तमंचे से फायर करने का भी आरोप लगाया गया था। आरोपियों के खिलाफ बलवा, लूट, हत्या के प्रयास, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने सिर्फ गुड्डू मिश्रा, बब्लू मिश्रा और शेखर पांडे के खिलाफ गाली-गलौज और मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की।
सुनवाई के दौरान आरोपी शेखर पांडे की हो चुकी है मौत
वर्ष 2012 में बयान मुल्जिम के बाद अभियोजन साक्ष्य की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद करीब 13 साल तक अभियोजन को गवाही पेश करने के कई अवसर दिए गए, लेकिन कोई गवाह अदालत नहीं पहुंचा। आखिरकार 10 जुलाई 2026 को अदालत ने अभियोजन साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया। इसके बाद आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। उन्होंने घटना को झूठा बताया। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने गुड्डू मिश्रा और बब्लू मिश्रा को बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान आरोपी शेखर पांडे की मौत हो चुकी है।
प्रेमलता-सरला समर्थकों के बीच गुटबाजी से जुड़ा था विवाद
गुड्डू मिश्रा के अधिवक्ता मनोज मिश्रा ने बताया कि घटना के समय गुड्डू युवा मोर्चा के जिला प्रभारी थे। उस दौरान भाजपा सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रेमलता कटियार और पूर्व महापौर सरला सिंह के समर्थकों के बीच गुटबाजी चल रही थी। अधिवक्ता के मुताबिक, इसी गुटबाजी के चलते मुकदमा दर्ज कराया गया था। विवेचना के दौरान दीपू पांडे और शिवबोधन मिश्रा के नाम हटा दिए गए थे। वहीं, शेखर पांडे की मौत के बाद गुड्डू और बब्लू के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई चल रही थी।