UP: उर्सला में पैसे लेकर ‘आयुष्मान भव’, कार्ड होने पर भी वसूल रहे रुपये, निदेशक बोले- बिना झिझक करें शिकायत
Kanpur News: उर्सला अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों से स्ट्रेचर, ड्रेसिंग और सर्जरी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। निदेशक डॉ. बीसी पाल ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन देते हुए मरीजों से शिकायत करने की अपील की है।
विस्तार
- केस-1: रसूलाबाद निवासी लक्ष्मी के कान में कुछ समस्या थी। उन्होंने ईएनटी विभाग में दिखाया तो सर्जरी की सलाह दी गई। लक्ष्मी ने बताया कि उनके पास आयुष्मान कार्ड था। इसके बावजूद दस हजार रुपये हमसे लिए गए हैं। दवाएं भी बाहर से ही लिखी जा रही हैं।
- केस-2: बांदा निवासी प्रदीप ने बताया कि एक्सीडेंट में उसका पैर में फ्रैक्चर हो गया था। पहले किसी निजी अस्पताल से रॉड लगवाई तो कोई असर नहीं हुआ। अब डॉक्टर ने पैर काटने की सलाह दी। इसके लिए भी 15 हजार रुपये यहां जमा किए, तब जाकर सर्जरी हुई है। दवाओं के लिए भी अलग से पैसे देने पड़े।
- केस-3: फर्रुखाबाद निवासी महेंद्र ने बताया कि वे शुगर रोगी हैं। उनके पैर के अंगूठे में कालापन आया और दर्द होने लगा। यहां दिखाया तो पैर काटने को बताया। पहले घुटने के नीचे पैर काटा गया। उसके बाद अब घुटने के ऊपर तक काट दिया गया है। दो बार 15-15 हजार रुपये दे चुके हैं। आयुष्मान कार्ड भी लगाया है। फिर भी बाहर से दवाएं लिखी जा रही हैं।
कानपुर में उर्सला अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक रोगियों से भी उपकरणों और दवाओं के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं सर्जरी तक के लिए रोेगियों को पैसे देने पड़ रहे हैं। रोगियों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद पैसे देकर इलाज कराना मजबूरी है। रोगियों ने बताया कि जब उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जांच के लिए जाना पड़ता है, तो स्ट्रेचर की जरूरत पड़ती है।
इसके लिए भी जो स्ट्रेचर लेकर आता है, उसे भी 50 रुपये देने पड़ते हैं। मरहम पट्टी कराने में 100 रुपये तक देने पड़ते हैं। रोगियों का आराेप है कि आयुष्मान कार्ड है, फिर भी इम्प्लांट लगाने के नाम पर पैसे ले लिए। नाक-कान, गले और सामान्य सर्जरी तक में आठ से दस हजार रुपये देने ही पड़ रहे हैं। आयुष्मान कार्ड होने पर भी दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं। रोगियों और उनके तीमारदारों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर व स्टाफ उन्हें बरगलाते हैं कि आयुष्मान कार्ड में मिलने वाला इम्प्लांट अच्छा नहीं है।
डॉक्टरों ने छह हजार रुपये भी ले लिए, जबकि आयुष्मान कार्ड है
अगर थोड़ा अलग से खर्च करो तो बाहर वाला लगा दें, जो अच्छा रहेगा। उन्हीं से इलाज कराना तो मना भी नहीं कर पाते हैं। फर्रुखाबाद निवासी आदित्य ने बताया कि उनके रॉड पड़नी है। एक ऑपरेशन कूल्हे का पहले ही हो चुका है। अब पैर का हो रहा है। अभी इम्प्लांट पड़ा नहीं, लेकिन डॉक्टरों ने छह हजार रुपये भी ले लिए, जबकि आयुष्मान कार्ड है। दवाएं भी बाहर की लिख रहे थे पर भाई नाराज होने पर उन्होंने दवा यहां से लिखी।
कोई भी डॉक्टर रोगियों को बाहर की दवाएं नहीं लिखेगा और अगर जरूरत पड़ती है, तो उन्हें जनऔषधि केंद्र की दवाएं ही लिखी जाएं। एक रोगी पर्चा लेकर आया था कि उसे बाहर की दवा लिख दी है। उसे तुरंत यहीं से दवाएं दिलाई गई हैं। रोगियों से अगर कोई डॉक्टर पैसे लेता है, तो रोगी और उनके तीमारदार बिना झिझक शिकायत करें। कड़ी कार्रवाई होगी। -डॉ. बीसी पाल, निदेशक उर्सला