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कानपुर: शहर में 300 एक्यूआई का प्रदूषण, सिगरेट के पैकेट जितना नुकसान दायक, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Sat, 24 Oct 2026 11:46 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Sat, 24 Oct 2026 11:46 PM IST
सार

कार्डियोप्रिवेंट-2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा चार गुना तक बढ़ने की आशंका है। 

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Kanpur: City’s AQI hits 300—as harmful as a pack of cigarettes; experts express concern
डॉ पुनीत अग्रवाल व प्रो डॉ. अक्षय प्रधान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर में 250 से 300 के बीच बना वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों के मुताबिक 300 एक्यूआई के प्रदूषण में रहना एक दिन में सिगरेट का पूरा पैकेट पीने जितना नुकसान पहुंचा सकता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा चार गुना तक बढ़ सकता है। प्रदूषण के सूक्ष्म कण रक्त वाहिकाओं में सूजन और सिकुड़न पैदा करने के साथ ब्लॉकेज और खून के थक्के बनने का जोखिम बढ़ाते हैं। यही थक्का दिमाग तक पहुंच जाए तो स्ट्रोक और दिल तक पहुंच जाए तो हार्ट अटैक हो जाता है। यह जानकारी बिठूर स्थित एक होटल में शनिवार को आयोजित कार्डियोप्रिवेंट-2026 में दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से आए डॉ. पुनीत अग्रवाल ने दी।
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कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के यूपी चैप्टर और एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी के सहयोग से सम्मेलन आयोजित किया गया। इसका शुभारंभ निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा, डॉ. सतेंद्र तिवारी, डॉ. अवधेश शर्मा और डॉ. उमेश्वर पांडेय ने दीप जलाकर किया। सम्मेलन में नौ वैज्ञानिक सत्रों के तहत 34 सत्र आयोजित हुए जिनमें लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, मेरठ, नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और रांची सहित देश-प्रदेश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। एसजीपीजीआई लखनऊ से आए मुख्य अतिथि डॉ. सत्येंद्र तिवारी ने हृदय रोगों के जोखिम का पता लगाने के लिए लिपोप्रोटीन-ए (एलपीए) और एपोलिपोप्रोटीन की जांच को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र से कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने और जीवन में कम से कम एक बार एलपीए टेस्ट कराने की सलाह दी।
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उन्होंने बताया कि 45 वर्ष से कम उम्र के दो हजार युवा हृदय रोगियों पर किए गए अध्ययन में 20 प्रतिशत लोगों का लिपोप्रोटीन बढ़ा हुआ मिला। उन्होंने कहा कि अगर समय से जांच और इलाज होता तो यह स्थिति नहीं आती। सम्मेलन में एसजीपीजीआई की डॉ. रूपाली खन्ना, डॉ. नकुल सिन्हा और डॉ. नवीन गर्ग सहित कई विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। मौके पर डॉ. संतोष कुमार सिन्हा, डॉ. एमएम रजी, डॉ. मोहित सचान, डॉ. मुकेश झा और डॉ. नीरज आदि मौजूद रहे।
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बिना डॉक्टर की सलाह न बंद करें दवा
केजीएमयू के प्रो. अक्षय प्रधान ने कहा कि कोलेस्ट्रॉल में दवा से सुधार होने पर भी डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बंद नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने के लिए साल में दो बार दिए जाने वाले इंजेक्शन का विकल्प भी उपलब्ध है। जम्मू-कश्मीर के डॉ. नजीबुल्लाह ने बताया कि स्मार्टवॉच हृदय गति में असामान्यता का संकेत देती है। ऐसे में लोगों को समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इसमें से दो प्रतिशत मामले ऐसे होते हैं, जो आगे चलकर किसी बड़े खतरे में पड़ते हैं।

 

ह्रदय रोगों की बदली गाइडलाइन

- बीपी अब 130-80 सामान्य।
- कोलेस्ट्रॉल की जांच 20 वर्ष में शुरू कर दें।
-एलपीए-जीवन में एक बार जांच जरूर कराएं।
- एक्सरसाइज को दवा की तरह आवश्यक रूप से करें।
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