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Kanpur: तीन दिन तक दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर 17.50 लाख ठगे, पुलिस स्टेशन का अधिकारी बनकर डराया-धमकाया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:00 PM IST
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डिजिटल अरेस्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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पुलिस के लगातार सतर्क करने के बावजूद भी लोग डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं। चकेरी थाना क्षेत्र में भी ऐसा मामला सामने आया। साइबर ठगों ने पीड़ित दंपती को फोन कर खुद को सीबीआई और मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बता उन्हें डराया, धमकाया। मुंबई में पीड़ित के आधार कार्ड से बैंक खोलकर अवैध लेनदेन का झांसा दिया। दंपती को वीडियो कॉल कर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। मामला निपटाने की बात कहकर 17.50 लाख की ठगी कर ली। ठगी के बाद से पीड़ित बीमार है।
सफीपुर निवासी एयरफोर्स से रिटायर्ड मास्टर वारंट ऑफिसर बलवीर सिंह के मुताबिक बीती 13 नवंबर 2025 को फोन आया। बलवीर ने पुलिस को बताया कि कॉलर ने उन्हें व उनकी पत्नी हरजीत कौर को वीडियो काॅल किया। खुद को सीबीआई व मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड के जरिये मुंबई में एक बैंक खोला गया है। जिससे अवैध लेन-देन हुए हैं। उनका आधार इस्तेमाल होने के कारण वह इस बैंक के मालिक हुए। आरोपियों ने दबाव बनाकर ने उन्हें और उनकी पत्नी को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस पर उन्होंने 14 नवंबर 2025 को उनके बताए खाताधारक श्री प्रकाश के खाते में 12.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। दूसरे दिन 15 नवंबर 2025 को फिर आरोपियों ने कोर्ट और वकील फीस के नाम पर पांच लाख रुपयों की मांग की। अपने एक परिचित से रुपये उधार लेकर उनके बताए खाते सुपर ट्रेडर्स पर पांच लाख रुपये जमा किए। आरोपियों का नंबर बंद बताने पर उन्हें ठगी की जानकारी हुई।
शौचालय तक नहीं जाने देते थे
पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने इतना डरा दिया कि शौचालय जाने, सोने, और किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने की भी अनुमति नहीं देते थे। इस दौरान उन्होंने एक नकली वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी दिखाई। फिर वारंट भेजकर कहा कि एक जज नियुक्त किया जाएगा जो उनके मामले की सुनवाई करेगा। इसके बाद मामला निपटाने के लिए रुपयों की मांग शुरू की।
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सफीपुर निवासी एयरफोर्स से रिटायर्ड मास्टर वारंट ऑफिसर बलवीर सिंह के मुताबिक बीती 13 नवंबर 2025 को फोन आया। बलवीर ने पुलिस को बताया कि कॉलर ने उन्हें व उनकी पत्नी हरजीत कौर को वीडियो काॅल किया। खुद को सीबीआई व मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड के जरिये मुंबई में एक बैंक खोला गया है। जिससे अवैध लेन-देन हुए हैं। उनका आधार इस्तेमाल होने के कारण वह इस बैंक के मालिक हुए। आरोपियों ने दबाव बनाकर ने उन्हें और उनकी पत्नी को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस पर उन्होंने 14 नवंबर 2025 को उनके बताए खाताधारक श्री प्रकाश के खाते में 12.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। दूसरे दिन 15 नवंबर 2025 को फिर आरोपियों ने कोर्ट और वकील फीस के नाम पर पांच लाख रुपयों की मांग की। अपने एक परिचित से रुपये उधार लेकर उनके बताए खाते सुपर ट्रेडर्स पर पांच लाख रुपये जमा किए। आरोपियों का नंबर बंद बताने पर उन्हें ठगी की जानकारी हुई।
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शौचालय तक नहीं जाने देते थे
पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने इतना डरा दिया कि शौचालय जाने, सोने, और किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करने की भी अनुमति नहीं देते थे। इस दौरान उन्होंने एक नकली वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी दिखाई। फिर वारंट भेजकर कहा कि एक जज नियुक्त किया जाएगा जो उनके मामले की सुनवाई करेगा। इसके बाद मामला निपटाने के लिए रुपयों की मांग शुरू की।
पीड़ित की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है। - अभिषेक पांडे, एसीपी चकेरी