UP: स्मार्टफोन छीन रहा सुकून; ग्रामीण महिलाओं में बढ़ा स्क्रीन एडिक्शन, किशोरों में बढ़ा एकांतवास, पढ़ें रिपोर्ट
Kanpur News: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सर्वे के अनुसार, स्क्रीन की लत ग्रामीण महिलाओं में पारिवारिक कलह और किशोरियों में अवसाद का मुख्य कारण बन गई है। फोन की निर्भरता के कारण युवाओं में उग्रता और याददाश्त की कमी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
विस्तार
- केस एक: पतारा में लगे मेगा हेल्थ कैंप में आई एक 19 वर्षीय लड़की के परिजनों ने बताया कि वह रोज आठ से 10 घंटे मोबाइल देखती है। इस कारण उसने रात में सोना बंद कर दिया। पढ़ाई बंद कर दी। अवसाद में चली गई। परिजनों ने कैंप में स्वास्थ्य परीक्षण कराया और दवा शुरू की गई।
- केस दो: बिधनू सीएचसी के कैंप में आया 18 साल का युवक हर वक्त फोन पर गेम खेलता था। उसने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया। इंटर में दो साल फेल हुआ। घर वालों के फोन छीनने पर जान देने की बात करता। स्वभाव आवेगी हो गया। कैंप में उसे दवा दी गई।
मोबाइल की स्क्रीन घंटों देखने की लत नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में एक जैसी है। इस लत की वजह से किशोर और युवा समाज से कट रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं का स्क्रीन एडिक्शन अवसाद और पारिवारिक कलह की वजह बन रहा है। यह बात राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सर्वे में सामने आई है। नगरीय इलाकों से तुलना करें तो ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में स्क्रीन की लत अधिक है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 में जिले के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक स्वास्थ्य मेगा कैंप का आयोजन किया गया। इनमें कुल 1625 रोगियों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविरों में आठ से 65 साल आयु वर्ग के रोगी आए। शिविर में किशोरियों और महिलाओं की संख्या 813 रही है। इनमें ज्यादातर में स्क्रीन की लत पाई गई। मनोरोग चिकित्सा प्रभारी डॉ. चिरंजीव प्रसाद ने बताया कि महिलाओं में स्क्रीन एडिक्शन पारिवारिक कलह की वजह बन रहा है।
किशोरियों में स्क्रीन की लत बन रही अवसाद की वजह
महिलाएं वर्चुअल संसार से अपनी स्थिति की तुलना करने लगती हैं। यह भी अवसाद की वजह बनता है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि स्क्रीन की लत की वजह से किशोर और युवाओं में एकांतवास की आदत पनप रही है। चिड़चिड़ापन होता है और वे आवेगी भी हो गए हैं। गुस्से में कोई भी घातक कदम उठा सकते हैं। किशोरियों में स्क्रीन की लत अवसाद की वजह बन रही है।
छात्र-छात्राओं की याददाश्त पर भी आ रहा है असर
पुरुषों के काम पर जाने के बाद ग्रामीण इलाकों की ग्रहणियों का वक्त स्क्रीन पर गुजरता है। इससे घरेलू कलह होने लगती है। शिविरों में उदासी और एंजाइटी के रोगियों की संख्या अधिक रही। अभिभावकों ने यह भी शिकायत की कि फोन छीनने पर किशोर और युवा उग्र हो जाते हैं। सबसे अधिक नुकसान पढ़ाई का हो रहा है। स्क्रीन की लत का प्रतिकूल प्रभाव छात्र-छात्राओं की याददाश्त पर भी आ रहा है।
शहर में महिला-पुरुष रोगियों का अनुपात 45-55 का
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मनोरोगियों में पुरुषों की संख्या अधिक रहती है। विभाग की ओपीडी में औसत 100 रोगी प्रतिदिन आते हैं। इनमें 55 फीसदी पुरुष होते हैं और 45 फीसदी महिला रोगी होती है। वहींं राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आंकड़ों के मुताबिक सीएचसी पर लगने वाले मेगा हेल्थ कैंप में पुरुष और महिला रोगी 50-50 फीसदी होते हैं।
