कानपुर: मुश्किल में भारत-अमेरिका ट्रेड डील, 2000 करोड़ का निर्यात दांव पर, विशेषज्ञ बोले- अब नए देशों का रुख
Kanpur News: कानपुर के चर्म व निर्यात उद्योग पर भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता के बाद बड़ा संकट मंडराने लगा है। केंद्रीय वित्त मंत्री के ताजा बयान के बाद शहर के निर्यातकों में खलबली है, जिससे अमेरिका को होने वाला लगभग 2,000 करोड़ का निर्यात दांव पर लग गया है।
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अमेरिका-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर असमंजस वाले वित्तमंत्री के बयान ने कानपुर के निर्यातकों में भी खलबली मचा दी है। शहर के निर्यातकों के लिए सबसे बड़े बाजार अमेरिका को होने वाले दो हजार करोड़ से ज्यादा का निर्यात दांव पर लगा है। निर्यातक पहले से ही टैरिफ, कच्चा माल की महंगाई, माल भाड़ा की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। एक साल से अधिक समय से अमेरिकी टैरिफ की धमकियों से भी परेशान हैं।
अब भविष्य में भी जल्द समझौता न होने की अटकलों ने परेशानियां और बढ़ा दी हैं। अमेरिका के 22.50 प्रतिशत मौजूदा टैरिफ के कारण उत्पादों की लागत पहले ही बढ़ी है। अमेरिकी सीनेट ने तेल खरीद पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अनुमति अमेरिकी राष्ट्रपति को दे दी है। अमेरिका में शहर के चमड़ा उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग होती रही है।
नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं
साल 2024 में शहर से 1800 करोड़ का चमड़ा उत्पादों का निर्यात किया गया जो 2025 में 2300 करोड़ हो गया था। 2026 में ये 1700 करोड़ के करीब आ गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले तिमाही के निर्यात आंकड़ों में 571 करोड़ की कमी दर्ज की गई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से पानी के जहाजों से जाने वाले कंसाइनमेंट जाना बंद हो गए या लंबी दूरी तय करके जा रहे हैं। इससे निर्यातकों की उत्पाद लागत बढ़ गई है। नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं।
व्यापार समझौते पर वित्तमंत्री के बयान से निर्यातक भी असमंजस में हैं। टैरिफ संबंधी विधेयक पास होने के बाद निर्यात आर्डर होल्ड पर हैं। इसके अलावा अमेरिका-ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध से भी निर्यातकों की परेशानी बढ़ी है। अब वो नए-नए देशों के बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। -आलोक श्रीवास्तव, फियो, उत्तर प्रदेश, प्रमुख
जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उनको देखते हुए निर्यातक अब अमेरिका पर निर्भरता कम करेंगे और कर भी रहे हैं। अमेरिका के बाद यूरोपीय यूनियन शहर के निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार है। अब यहां पर तेजी से पैठ बनाई जा रही है। इसके अलावा लंदन, कनाडा, रूस, बेलारूस, जापान के साथ कारोबारी रिश्ते बढ़ा रहे हैं। -यादवेंद्र सचान, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
निर्यातकों के सामने समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हर प्रकार का केमिकल महंगा हो चुका है। माल भाड़ा अपने उच्चतम स्तर पर है। नए आर्डर मिल नहीं रहे हैं। अमेरिका के साथ कारोबारी रिश्ते बेहद नाजुक दौर में पहुंच गए हैं। होर्मुज बंद होने से समस्या और बढ़ गई है। क्रिसमस का 500 करोड़ का बाजार इस बार नहीं मिल पाया। -असद इराकी, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद