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Kanpur: भाई की दिमाग की नस फटी, तंगी के कारण पढ़ाई छूटने से छात्रा ने दे दी जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:21 PM IST
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सार
तीन महीने पहले बेटे के इलाज के कारण लाखों का कर्ज हो गया था। पिता ने मजबूरी में तीनों बच्चों की पढ़ाई बंद करा दी थी। जिससे छात्रा अवसाद में थी।
छात्रा मुस्कान की घटना की जानकारी देते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिधनू थानाक्षेत्र के अरखईया गांव में 12 वर्षीय कक्षा आठ की छात्रा मुस्कान ने बुधवार शाम फंदा लगाकर जान दे दी। भाई की दिमाग की नस फटने से इलाज के कारण पिता पर कर्ज हो गया था। तीन माह पूर्व फीस जमा न कर पाने के कारण मुस्कान और उसके दो छोटे भाइयों की पढ़ाई छूट गई थी जिसके बाद से वह अवसाद में थी। सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने जांच पड़ताल कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
अरखईया गांव निवासी छविराम ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में उनकी पत्नी वंदना और तीन बच्चे - मुस्कान, अंकुश और लवकुश हैं। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे दहेली उजागर के एक स्कूल में पढ़ रहे थे। मुस्कान कक्षा आठ, अंकुश कक्षा छह और लवकुश कक्षा चार में था। तीन महीने पहले छोटे बेटे लवकुश के दिमाग की नस फट गई। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। बेटे के इलाज के लिए नवंबर 2025 में कई लोगों से ढाई लाख रुपये का कर्ज लिया। ऑपरेशन में अधिक खर्च होने के कारण लगातार किस्तों का भुगतान करना पड़ रहा था।
कर्ज की किस्तों का भुगतान और अन्य खर्चों के चलते नवंबर, दिसंबर और जनवरी की स्कूल फीस जमा नहीं कर पाए। फीस न भर पाने से बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। इससे बड़ी बेटी मुस्कान अवसाद में रहने लगी। बुधवार को लवकुश अपने ननिहाल गया हुआ था जबकि वंदना और अंकुश खेत में चारा लेने गए थे। इसी दौरान मुस्कान ने घर में दीवार के सहारे रखी गिट्टी-मौरंग की बोरियों पर चढ़कर साड़ी से फंदा बांध जान दे दी। नए सत्र में बच्चों को फिर से स्कूल भेजने की तैयारी थ। बिधनू थाना प्रभारी तेजबहादुर ने बताया कि छात्रा की मानसिक स्थिति ठीक न होने की जानकारी मिली है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
भैंस भी बेचनी पड़ी
पिता छवीराम ने रुंधे गले बताया कि छोटे बेटे लवकुश की नाक से अचानक खून आने लगता था। इस कारण तीन महीने पहले उन्होंने ब्याज पर दो लाख रुपये लेकर उसका ऑपरेशन कराया था। इलाज में दवा के लिए पैसा और कम पड़ा था उन्हें भैंस बेच दी थी।
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अरखईया गांव निवासी छविराम ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में उनकी पत्नी वंदना और तीन बच्चे - मुस्कान, अंकुश और लवकुश हैं। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे दहेली उजागर के एक स्कूल में पढ़ रहे थे। मुस्कान कक्षा आठ, अंकुश कक्षा छह और लवकुश कक्षा चार में था। तीन महीने पहले छोटे बेटे लवकुश के दिमाग की नस फट गई। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। बेटे के इलाज के लिए नवंबर 2025 में कई लोगों से ढाई लाख रुपये का कर्ज लिया। ऑपरेशन में अधिक खर्च होने के कारण लगातार किस्तों का भुगतान करना पड़ रहा था।
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कर्ज की किस्तों का भुगतान और अन्य खर्चों के चलते नवंबर, दिसंबर और जनवरी की स्कूल फीस जमा नहीं कर पाए। फीस न भर पाने से बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया। इससे बड़ी बेटी मुस्कान अवसाद में रहने लगी। बुधवार को लवकुश अपने ननिहाल गया हुआ था जबकि वंदना और अंकुश खेत में चारा लेने गए थे। इसी दौरान मुस्कान ने घर में दीवार के सहारे रखी गिट्टी-मौरंग की बोरियों पर चढ़कर साड़ी से फंदा बांध जान दे दी। नए सत्र में बच्चों को फिर से स्कूल भेजने की तैयारी थ। बिधनू थाना प्रभारी तेजबहादुर ने बताया कि छात्रा की मानसिक स्थिति ठीक न होने की जानकारी मिली है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
भैंस भी बेचनी पड़ी
पिता छवीराम ने रुंधे गले बताया कि छोटे बेटे लवकुश की नाक से अचानक खून आने लगता था। इस कारण तीन महीने पहले उन्होंने ब्याज पर दो लाख रुपये लेकर उसका ऑपरेशन कराया था। इलाज में दवा के लिए पैसा और कम पड़ा था उन्हें भैंस बेच दी थी।
