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Kanpur News: पॉप मशीन पर श्रमिकों के अंगूठा लगाने की अड़चन, मोटे अनाज की खरीद ठप
Mon, 26 Oct 2026 12:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:12 AM IST
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कानपुर देहात। पॉप मशीन पर केंद्र प्रभारी, कम से कम चार श्रमिक (पल्लेदार) और फिर किसान का अंगूठा लगाकर खरीद की जानी है। इसमें परेशानी आने के चलते मोटे अनाज की सरकारी खरीद ठहर गई है। 43 केंद्रों में केवल पुखरायां मंडी समिति क्रय केंद्र पर बाजरा खरीद हो सकी है।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में मोटे अनाज (बाजरा, मक्का व ज्वार) की सरकारी खरीद तकनीकी नियमों में उलझ गई है। पॉइंट ऑफ परचेज यानी पॉप मशीन पर अंगूठा लगाने के नियम में इस बार बदलाव किया गया है। यह नियम अब परेशानी की वजह बना है। दरअसल सरकारी क्रय केंद्रों पर पॉप मशीन पर केंद्र प्रभारी का अंगूठा लगता था जबकि श्रमिकों की उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज होती थी। तौल के बाद फीडिंग के समय किसान का अंगूठा लगवाया जाता था। इसके बाद प्रक्रिया पूरी हो जाती थी। अब बदले नियम में पॉप मशीन पर केंद्र प्रभारी अंगूठा लगाकर लॉगइन करेंगे। तुरंत बाद पॉप मशीन पर प्रति केंद्र कम से कम चार श्रमिकों का अंगूठा लगेगा। इसके बाद किसान का अंगूठा लगेगा। इसके बाद ही खरीद शुरू हो सकेगी। कई बार पॉप मशीन पर श्रमिक का अंगूठा नहीं लग रहा तो किसानों का अंगूठा भी मशीन नहीं ले रही।
बता दें कि जनपद में खाद्य विभाग के कुल 43 क्रय केंद्र बनाए हैं। बाजरा के लिए 18, ज्वार के लिए 16 और मक्का की खरीद के लिए नौ क्रय केंद्र बने हैं। एक अक्तूबर से 31 दिसंबर तक मोटे अनाज की खरीद की जानी है। ज्वार के लिए 11 हजार मीट्रिक टन, मक्का के लिए दो हजार मीट्रिक टन और बाजरा के लिए 15 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला है। अक्तूबर लगभग खत्म होने को है लेकिन अब तक केवल पुखरायां में तीन किसानों से 102 क्विंटल बाजरा की खरीद हो सकी है। अन्य 42 केंद्रों पर खरीद की बोहनी नहीं हुई है। जानकारों का कहना है कि मोटे अनाज की खरीद अटकी होने के पीछे पॉप मशीन पर कम से कम चार श्रमिकों का अंगूठा लगने के बाद किसान का अंगूठा लगेगा तभी खरीद हो सकेगी। क्रय नीति की इस तकनीकी अड़चन से खरीद अटकी है।
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जल्द समाधान की उम्मीद
इस बार पॉप मशीन पर कम से कम चार श्रमिकों के अंगूठा लगाने के बाद खरीद शुरू करने का नियम क्रय नीति में शामिल किया गया है। इसमें तकनीकी दिक्कतें हैं। अड़चन दूर करने के लिए सरकार की ओर से पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समिति तीन दिन में सरकारी खरीद में तकनीकी को लेकर आ रही दिक्कतों पर रिपोर्ट देगी। इसके बाद छूट मिलने या फिर नियम में परिवर्तन की उम्मीद है। फिलहाल केंद्र पर किसानों के अनाज खेप लेकर आने पर तौल कराई जा रही है। पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग नहीं हो रही है। - देवेंद्र सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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किसान पंजीकरण में एग्रीस्टैक की परेशानी
कानपुर देहात। एग्रीस्टैक में फसल ब्योरा दर्ज नहीं होने से किसान ऑनलाइन पंजीकरण के लिए भटक रहे हैं। इसका असर भी सरकारी अनाज खरीद पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन में भले ही अनाज की खरीद की नीति लागू कर दी गई है लेकिन धरातल पर अड़चनें बहुत हैं। हालात ये हैं कि सरकारी अनाज खरीद के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीयन करना अनिवार्य है। अब किसान पंजीयन करने की कोशिश कर रहे हैं तो ऑनलाइन खसरा के एक गाटे में फसल प्रदर्शित नहीं होने से पंजीयन नहीं हो पा रहा है। किसी गाटे में कोई फसल फीड नहीं होने से किसान परेशान हैं। किसी का एग्रीस्टैक नहीं होना भी परेशानी की वजह बना है। जनसेवा केंद्र या फिर मोबाइल पर खुद की पंजीयन की कोशिश सफल नहीं होने पर किसान भटक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एग्रीस्टैक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड होता है। किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में खतौनी/भू-अभिलेख से जोड़ा जाता है। कई बार फार्मर रजिस्ट्री करने के दौरान किसान सभी गाटे फीड नहीं कराते या किन्हीं कारणों से गाटे छूट जाते हैं तो खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। वहीं, खसरा पर फसलों की फीडिंग नहीं होने से ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो रहा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एग्रीस्टैक की परेशानी अन्य विभाग से संबंधित है। मक्का बेचने के लिए करीब 65 किसानों का अब तक पंजीयन हुआ है। बाजरा व ज्वार के लिए 800-800 किसानों ने पंजीयन कराया है। (संवाद)
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फोटो-10 सिकंदर, अमिलिया।
ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो रहा
नौ बीघा में बाजरा व पांच बीघा में ज्वार बोई थी। अब फसल तैयार है। सरकारी क्रय केंद्र पर अनाज बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो पा रहा है। - सिकंदर, अमिलिया ब्लॉक अमरौधा
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फोटो-11 नदीम अहमद, सट्टी।
मक्का बेचने के लिए कागज नहीं बने
दस बीघा में मक्का बोई थी। अब फसल कट गई। मक्का बेचना है लेकिन एग्रीस्टैक में खसरा दर्ज नहीं होने से ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो पा रहा है। - नदीम अहमद, सट्टी ब्लॉक अमरौधा
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खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में मोटे अनाज (बाजरा, मक्का व ज्वार) की सरकारी खरीद तकनीकी नियमों में उलझ गई है। पॉइंट ऑफ परचेज यानी पॉप मशीन पर अंगूठा लगाने के नियम में इस बार बदलाव किया गया है। यह नियम अब परेशानी की वजह बना है। दरअसल सरकारी क्रय केंद्रों पर पॉप मशीन पर केंद्र प्रभारी का अंगूठा लगता था जबकि श्रमिकों की उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज होती थी। तौल के बाद फीडिंग के समय किसान का अंगूठा लगवाया जाता था। इसके बाद प्रक्रिया पूरी हो जाती थी। अब बदले नियम में पॉप मशीन पर केंद्र प्रभारी अंगूठा लगाकर लॉगइन करेंगे। तुरंत बाद पॉप मशीन पर प्रति केंद्र कम से कम चार श्रमिकों का अंगूठा लगेगा। इसके बाद किसान का अंगूठा लगेगा। इसके बाद ही खरीद शुरू हो सकेगी। कई बार पॉप मशीन पर श्रमिक का अंगूठा नहीं लग रहा तो किसानों का अंगूठा भी मशीन नहीं ले रही।
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बता दें कि जनपद में खाद्य विभाग के कुल 43 क्रय केंद्र बनाए हैं। बाजरा के लिए 18, ज्वार के लिए 16 और मक्का की खरीद के लिए नौ क्रय केंद्र बने हैं। एक अक्तूबर से 31 दिसंबर तक मोटे अनाज की खरीद की जानी है। ज्वार के लिए 11 हजार मीट्रिक टन, मक्का के लिए दो हजार मीट्रिक टन और बाजरा के लिए 15 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला है। अक्तूबर लगभग खत्म होने को है लेकिन अब तक केवल पुखरायां में तीन किसानों से 102 क्विंटल बाजरा की खरीद हो सकी है। अन्य 42 केंद्रों पर खरीद की बोहनी नहीं हुई है। जानकारों का कहना है कि मोटे अनाज की खरीद अटकी होने के पीछे पॉप मशीन पर कम से कम चार श्रमिकों का अंगूठा लगने के बाद किसान का अंगूठा लगेगा तभी खरीद हो सकेगी। क्रय नीति की इस तकनीकी अड़चन से खरीद अटकी है।
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जल्द समाधान की उम्मीद
इस बार पॉप मशीन पर कम से कम चार श्रमिकों के अंगूठा लगाने के बाद खरीद शुरू करने का नियम क्रय नीति में शामिल किया गया है। इसमें तकनीकी दिक्कतें हैं। अड़चन दूर करने के लिए सरकार की ओर से पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समिति तीन दिन में सरकारी खरीद में तकनीकी को लेकर आ रही दिक्कतों पर रिपोर्ट देगी। इसके बाद छूट मिलने या फिर नियम में परिवर्तन की उम्मीद है। फिलहाल केंद्र पर किसानों के अनाज खेप लेकर आने पर तौल कराई जा रही है। पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग नहीं हो रही है। - देवेंद्र सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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किसान पंजीकरण में एग्रीस्टैक की परेशानी
कानपुर देहात। एग्रीस्टैक में फसल ब्योरा दर्ज नहीं होने से किसान ऑनलाइन पंजीकरण के लिए भटक रहे हैं। इसका असर भी सरकारी अनाज खरीद पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन में भले ही अनाज की खरीद की नीति लागू कर दी गई है लेकिन धरातल पर अड़चनें बहुत हैं। हालात ये हैं कि सरकारी अनाज खरीद के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीयन करना अनिवार्य है। अब किसान पंजीयन करने की कोशिश कर रहे हैं तो ऑनलाइन खसरा के एक गाटे में फसल प्रदर्शित नहीं होने से पंजीयन नहीं हो पा रहा है। किसी गाटे में कोई फसल फीड नहीं होने से किसान परेशान हैं। किसी का एग्रीस्टैक नहीं होना भी परेशानी की वजह बना है। जनसेवा केंद्र या फिर मोबाइल पर खुद की पंजीयन की कोशिश सफल नहीं होने पर किसान भटक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एग्रीस्टैक डिजिटल भूमि रिकॉर्ड होता है। किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में खतौनी/भू-अभिलेख से जोड़ा जाता है। कई बार फार्मर रजिस्ट्री करने के दौरान किसान सभी गाटे फीड नहीं कराते या किन्हीं कारणों से गाटे छूट जाते हैं तो खाद्य विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। वहीं, खसरा पर फसलों की फीडिंग नहीं होने से ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो रहा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एग्रीस्टैक की परेशानी अन्य विभाग से संबंधित है। मक्का बेचने के लिए करीब 65 किसानों का अब तक पंजीयन हुआ है। बाजरा व ज्वार के लिए 800-800 किसानों ने पंजीयन कराया है। (संवाद)
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फोटो-10 सिकंदर, अमिलिया।
ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो रहा
नौ बीघा में बाजरा व पांच बीघा में ज्वार बोई थी। अब फसल तैयार है। सरकारी क्रय केंद्र पर अनाज बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो पा रहा है। - सिकंदर, अमिलिया ब्लॉक अमरौधा
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फोटो-11 नदीम अहमद, सट्टी।
मक्का बेचने के लिए कागज नहीं बने
दस बीघा में मक्का बोई थी। अब फसल कट गई। मक्का बेचना है लेकिन एग्रीस्टैक में खसरा दर्ज नहीं होने से ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो पा रहा है। - नदीम अहमद, सट्टी ब्लॉक अमरौधा