UPSHIACWB: चेयरमैन अली जैदी ने कहा-वक्फ बोर्ड मुस्लिम युवाओं को बनवाएगा अग्निवीर, एक सप्ताह में बनेगी हेल्प डेस्क
उप्र शिया वक्फ सेंट्रल बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी ने कहा आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं का आवेदन प्रक्रिया में आने वाला खर्च भी बोर्ड उठाएगा। वहीं, शत्रु संपत्ति के मामले में कहा कि शहर की दो वक्फ जायदाद को शत्रु संपत्ति बताने पर बोर्ड ट्रिब्यूनल या हाईकोर्ट जाएगा।
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अग्निपथ योजना के तहत प्रदेश के मुस्लिम युवाओं को अग्निवीर बनाने में उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड मदद करेगा। योजना में आवेदन कराने से लेकर उन्हें भर्ती तक पहुंचाने की कवायद की जाएगी। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर बोर्ड हेल्प डेस्क बनाएगा। यह डेस्क केंद्र व राज्य सरकार की अल्पसंख्यक युवाओं के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं में भी मदद करेगी। आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को आवेदन प्रक्रिया का खर्च बोर्ड ही उठाएगा।
शनिवार को वक्फ संपत्तियों का निरीक्षण करने ग्वालटोली, नवाबगंज बड़ी कर्बला पहुंचे उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम बेटियां, बेटों की पढ़ाई, उनकी शादियों और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
वक्फ संपत्ति नहीं हो सकती शत्रु संपत्ति: जैदी
अली जैदी ने कहा कि ग्वालटोली में वक्फ संपत्तियों 111/54ए और 11/157 के मुतवल्लियों ने उन्हें बताया है कि इन्हें प्रशासन ने शत्रु संपत्ति के तौर पर चिह्नित किया है, जबकि ये वक्फ संपत्तियां हैं। इनके रिकार्ड बोर्ड के पास मौजूद हैं। वक्फ संपत्ति शत्रु संपत्ति नहीं हो सकती। पहले बातचीत की जाएगी और बात न बनी तो वक्फ ट्रिब्यूनल या हाईकोर्ट का दरवाजा खुला है। वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों को बर्बाद नहीं होने देगा।
उन्होंने बताया कि शहर समेत प्रदेश में 12 हजार वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें करीब 10 हजार संपत्तियों का जीआईएस (जियोग्राफिकल इंन्फॉर्मेशन सिस्टम) सर्वे हो गया है। जिन संपत्तियों पर कब्जे हैं, उन्हें खाली कराया जाएगा। जिन लोगों ने निर्माण कराकर इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया है, उनसे विकास प्राधिकरणों की तरह बेटरमेंट, डेवलपमेंट चार्ज समेत अन्य शुल्क बोर्ड जमा कराएगा। बोर्ड की बैठक में इस पर फैसला होना है। इसके बाद उन्हें नियमित कर दिया जाएगा।
मस्जिदों के इमामों को देंगे 12 हजार वेतन
वक्फ बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि बोर्ड इस पर मंथन कर रहा है कि मस्जिदों में जो इमाम सुबह से शाम तक नियमित नमाज पढ़ाते हैं। उन्हें कम से कम 12 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। हालांकि यह भी तय होगा कि इमाम पढ़ा लिखा हो। इतनी समझ हो कि मस्जिदों में खुतबे और तकरीर के माध्यमों से नमाजियों और समाज को जागरूक कर सके। उन्होंने कहा कि जुमे की नमाज के बाद कई जगह जब हिंसा हुई तो बोर्ड ने पत्र जारी कर अपील की थी कि जुमे में इस तरह की तकरीर और खुतबा हो, जिससे शहर का माहौल शांत हो सके।