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Kaushambi News: जब विदा हो जाते हैं सारे आम तब सजता है फजली का दरबार
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पेड़ से टूटा फजली आम। संवाद
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आम की बात की जाए तो दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली हमेशा चर्चा के केंद्र में रहते हैं। वहीं कौशाम्बी के कड़ा क्षेत्र का 'फजली आम' अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है। जब अन्य सभी किस्मों के आम का सीजन खत्म हो जाता है, तब कड़ा का फजली बाजार में दस्तक देता है यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
कड़ा क्षेत्र का फजली आम वर्षों से अपनी मिठास, बड़े आकार और देर तक बाजार में उपलब्ध रहने के कारण खास स्थान रखता है। किसी समय कड़ा क्षेत्र में करीब एक हजार बीघे में फजली आम के बाग हुआ करते थे, लेकिन पुराने पेड़ों के सूखने और नई किस्मों की ओर किसानों के बढ़ते रुझान के कारण इसका रकबा लगातार घट रहा है। किसान अब चौसा, दशहरी, लंगड़ा और आम्रपाली जैसी व्यावसायिक किस्मों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
डेढ़ किलो तक होता है एक आम का वजन
फजली आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल आकार है। इसके एक फल का वजन करीब एक से डेढ़ किलोग्राम तक होता है। यह आम बेहद रसीला और सुगंधित होता है।
बनारस तक पहुंचती है फजली की खुशबू
फतेहशाहपुरवा के आम व्यापारी सरफराज अहमद बताते हैं कि फजली आम की खेप प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर, मिर्जापुर और बनारस तक भेजी जाती है। वहीं बाग मालिक मनीष सहगल का कहना है कि यह आम हर जगह आसानी से नहीं मिलता। हाल ही में अजमेर से आए कुछ लोग भी इसे अपने साथ ले गए।
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सितंबर के पहले सप्ताह तक बाजार में रहता है फजली
आम कारोबारी मोहम्मद आसिफ, गुलाब सोनकर और शमशाद अहमद बताते हैं कि फिलहाल फजली आम 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। जैसे ही अन्य किस्मों के आम बाजार से पूरी तरह खत्म होंगे, इसकी मांग और कीमत दोनों में उछाला आएगा। अगस्त भर इसकी अच्छी आवक रहती है और कई बार यह सितंबर के पहले सप्ताह तक भी बाजार में उपलब्ध रहता है। यही विशेषता कड़ा के फजली आम को विशिष्ट बनाती है।
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कड़ा क्षेत्र का फजली आम वर्षों से अपनी मिठास, बड़े आकार और देर तक बाजार में उपलब्ध रहने के कारण खास स्थान रखता है। किसी समय कड़ा क्षेत्र में करीब एक हजार बीघे में फजली आम के बाग हुआ करते थे, लेकिन पुराने पेड़ों के सूखने और नई किस्मों की ओर किसानों के बढ़ते रुझान के कारण इसका रकबा लगातार घट रहा है। किसान अब चौसा, दशहरी, लंगड़ा और आम्रपाली जैसी व्यावसायिक किस्मों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।
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डेढ़ किलो तक होता है एक आम का वजन
फजली आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल आकार है। इसके एक फल का वजन करीब एक से डेढ़ किलोग्राम तक होता है। यह आम बेहद रसीला और सुगंधित होता है।
बनारस तक पहुंचती है फजली की खुशबू
फतेहशाहपुरवा के आम व्यापारी सरफराज अहमद बताते हैं कि फजली आम की खेप प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर, मिर्जापुर और बनारस तक भेजी जाती है। वहीं बाग मालिक मनीष सहगल का कहना है कि यह आम हर जगह आसानी से नहीं मिलता। हाल ही में अजमेर से आए कुछ लोग भी इसे अपने साथ ले गए।
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सितंबर के पहले सप्ताह तक बाजार में रहता है फजली
आम कारोबारी मोहम्मद आसिफ, गुलाब सोनकर और शमशाद अहमद बताते हैं कि फिलहाल फजली आम 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। जैसे ही अन्य किस्मों के आम बाजार से पूरी तरह खत्म होंगे, इसकी मांग और कीमत दोनों में उछाला आएगा। अगस्त भर इसकी अच्छी आवक रहती है और कई बार यह सितंबर के पहले सप्ताह तक भी बाजार में उपलब्ध रहता है। यही विशेषता कड़ा के फजली आम को विशिष्ट बनाती है।

पेड़ से टूटा फजली आम। संवाद