Kaushambi : अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का रास्ता साफ, 15 अगस्त तक जारी हो सकती है अधिसूचना
सरसंवा ब्लॉक क्षेत्र की जैव विविधता से समृद्ध अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने की राह लगभग साफ हो गई है। वन विभाग के अनुसार, अंतिम औपचारिकताएं पूरी होते ही 15 अगस्त से पहले अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
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सरसंवा ब्लॉक क्षेत्र की जैव विविधता से समृद्ध अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने की राह लगभग साफ हो गई है। वन विभाग के अनुसार, अंतिम औपचारिकताएं पूरी होते ही 15 अगस्त से पहले अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। इससे करीब तीन दशक से विकास की प्रतीक्षा कर रही झील को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
करीब 425 हेक्टेयर में फैली अलवारा झील कौशाम्बी ही नहीं, बल्कि प्रयागराज मंडल की सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमियों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के साथ जलीय जीव-जंतु तथा दुर्लभ वनस्पतियां पाई जाती हैं। लंबे समय से पर्यावरणविद और विशेषज्ञ इसे रामसर सूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे।
वन विभाग ने दो माह पहले शासन को झील को वेटलैंड एवं रामसर स्थल घोषित करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पर मांगे गए स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज डीएफओ अजय कुमार पांडेय के नेतृत्व में समय से उपलब्ध करा दिए गए। इसके बाद शासन स्तर पर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
रामसर स्थल का दर्जा मिलने के बाद झील के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रबंधन योजना लागू होगी। जैव विविधता संरक्षण, अतिक्रमण और प्रदूषण पर प्रभावी निगरानी के साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार की विशेष योजनाओं के तहत वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
रामसर स्थल क्या है?
रामसर स्थल ऐसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्र क्षेत्र (वेटलैंड) होते हैं, जिन्हें जल, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष मान्यता दी जाती है। इसका नाम ईरान के रामसर शहर से पड़ा, जहाँ 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन (अंतरराष्ट्रीय संधि) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि के तहत नामित आर्द्र क्षेत्रों को ही रामसर स्थल कहा जाता है।
रामसर स्थल बनने पर क्या बदलता है?
रामसर स्थल घोषित होने के बाद आर्द्र क्षेत्र के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता मिलती है। केंद्र और राज्य सरकार से वित्तीय व तकनीकी सहयोग मिलने की संभावना बढ़ती है। जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों और प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साथ ही, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन, शोध और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
रामसर स्थल घोषित होने के बाद किसी आर्द्र क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिलती है। यह वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण वेटलैंड नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है, जिससे उसकी जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों को व्यापक मान्यता मिलती है। इसके कारण वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं को बढ़ावा मिलता है तथा ईको-टूरिज्म और स्थानीय विकास की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
वित्तीय सहायता पर प्रभाव
रामसर स्थल घोषित होने के बाद उस आर्द्र क्षेत्र के संरक्षण, पुनर्स्थापन और प्रबंधन के लिए केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं में प्राथमिकता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और संरक्षण कार्यक्रमों के साथ तकनीकी सहयोग तथा परियोजना-आधारित वित्तीय सहायता प्राप्त करने के अवसर भी बढ़ते हैं। हालांकि, रामसर का दर्जा मिलते ही स्वतः अलग से कोई निश्चित अनुदान या फंड उपलब्ध नहीं हो जाता।
जिले से भेजे गए प्रस्ताव पर शासन स्तर पर अलवारा झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले अधिसूचना जारी हो जाएगी। यह उपलब्धि न केवल कौशाम्बी, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण होगी और अलवारा झील के संरक्षण का नया अध्याय शुरू करेगी। - अजय कुमार पांडेय, डीएफओ
* रामसर स्थल बनने के बाद होंगे ये बदलाव
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार झील का संरक्षण।
- समग्र प्रबंधन योजना लागू होगी।
- जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा।
- अतिक्रमण और प्रदूषण पर सख्त निगरानी।
- ईको-टूरिज्म, शोध कार्य तथा केंद्र व राज्य सरकार से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।