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Kushinagar News: विरवट कोन्हवलिया में धंसने लगा एप्रन का हिस्सा
Wed, 08 Jul 2026 02:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:53 AM IST
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तमकुहीरोड। गंडक नदी में छोड़े जा रहे पानी के उतार चढ़ाव के चलते विरवट कोन्हवलिया में पिछले साल निर्मित एप्रन का एक हिस्सा धंसने लगा है। इससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, खतरे को देखते हुए यहां विभाग की ओर से 40 मीटर के दायरे में आरसीसी परक्यूपाइन लगाया गया है। इसके बावजूद लोगों को आशंका है कि समय रहते इस हिस्से को मजबूत नहीं किया गया तो भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने पर यहां कटान का खतरा बढ़ सकता है।
पिछले साल एपी बांध का जवही दयाल में किमी 4.000 से विरवट कोन्हवलिया किमी 7.200 के बीच और नरवाजोत का किमी 1.700 बना ठोकर बाढ़ व कटान के चपेट में आ गया था। इसे लेकर शासन की ओर से स्वीकृत 72 करोड़ की सात परियोजनाओं के माध्यम से बचाव कार्य के जरिए तटबंधो की सुरक्षा सुनिश्चित कराई गई थी। इससे स्पर, स्टड, रिवेटमेंट, कटर, काउंटर वर्म सहित एप्रन निर्माण आदि का कार्य शामिल था, अब जब इस साल वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में पानी छोड़े जाने का सिलसिला शुरू हो गया है, तो इस साल भी बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, बिनटोली, जवही दयाल, विरवट कोन्हवालिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है।
यही नहीं, गंडक नदी के पानी के उतार चढ़ाव के चलते विरवट कोन्हवलिया में पिछले साल बने एप्रन के किमी 6.660 से किमी 6.700 के बीच का कुछ हिस्सा धंसने लगा है। हालांकि बाढ़ खंड की ओर से इस जगह आरसीसी परक्यूपाइन लगा दिया गया है। क्षेत्र के पप्पू यादव, गुड्डू कुमार, मुन्ना कुमार, गौतम सिंह आदि का कहना है कि यदि समय रहते इस हिस्से में बांध को पुख्ता नहीं कराया गया तो नदी का डिस्चार्ज बढ़ने पर यहां बांध के साथ गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इन लोगों बाढ़ खंड विभाग से इस हिस्से को भी मजबूत बनाए जाने की मांग की है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि क्षतिग्रस्त एप्रन के पास परक्यूपाइन लगाया गया है। फिलहाल बांध के उस हिस्से मे अभी कोई खतरा नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर उसे भी सुरक्षित बनाया जाएगा।
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पिछले साल एपी बांध का जवही दयाल में किमी 4.000 से विरवट कोन्हवलिया किमी 7.200 के बीच और नरवाजोत का किमी 1.700 बना ठोकर बाढ़ व कटान के चपेट में आ गया था। इसे लेकर शासन की ओर से स्वीकृत 72 करोड़ की सात परियोजनाओं के माध्यम से बचाव कार्य के जरिए तटबंधो की सुरक्षा सुनिश्चित कराई गई थी। इससे स्पर, स्टड, रिवेटमेंट, कटर, काउंटर वर्म सहित एप्रन निर्माण आदि का कार्य शामिल था, अब जब इस साल वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में पानी छोड़े जाने का सिलसिला शुरू हो गया है, तो इस साल भी बांध के किनारे बसे नरवाजोत, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, बिनटोली, जवही दयाल, विरवट कोन्हवालिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, अहिरौलीदान आदि गांवों के लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है।
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यही नहीं, गंडक नदी के पानी के उतार चढ़ाव के चलते विरवट कोन्हवलिया में पिछले साल बने एप्रन के किमी 6.660 से किमी 6.700 के बीच का कुछ हिस्सा धंसने लगा है। हालांकि बाढ़ खंड की ओर से इस जगह आरसीसी परक्यूपाइन लगा दिया गया है। क्षेत्र के पप्पू यादव, गुड्डू कुमार, मुन्ना कुमार, गौतम सिंह आदि का कहना है कि यदि समय रहते इस हिस्से में बांध को पुख्ता नहीं कराया गया तो नदी का डिस्चार्ज बढ़ने पर यहां बांध के साथ गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इन लोगों बाढ़ खंड विभाग से इस हिस्से को भी मजबूत बनाए जाने की मांग की है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि क्षतिग्रस्त एप्रन के पास परक्यूपाइन लगाया गया है। फिलहाल बांध के उस हिस्से मे अभी कोई खतरा नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर उसे भी सुरक्षित बनाया जाएगा।
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