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Kushinagar News: जिले में बिक रहा मिलावटी घी-दही, नामी कंपनियों के नमूने भी फेल
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पडरौना। मकर संक्रांति पर दही और घी की मांग को देखते हुए मिलावटखोर भी पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। ताज्जुब तो यह है कि मिलावट सिर्फ शहर से लेकर गांव के चौक-चौराहों तक खुले में बिक रहे घी और दही में ही नहीं, बल्कि नामी कंपनियों के उत्पादों में भी हो रही है।
अभी हाल ही में आई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। घी में बटर ऑयल तो दही में हाइड्रोजेनेटेड तेल या सस्ते वनस्पति तेल की मिलावट मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी घी और दही का लगातार सेवन हार्ट अटैक, पाचन तंत्र की खराबी और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
विभाग के अनुसार, करीब चार महीने पहले खाद्य विभाग की तरफ से घी के आठ नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उनमें से तीन नमूने फेल मिले हैं। इनमें बटर ऑयल की मिलावट मिली। वहीं दही के लिए गए चार नमूनों में से दो नमूने फेल मिले। इसमें फैट कम मिला।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार दही के चार नमूनों में से पारस और मदरडेयरी के एक-एक नमूने फेल मिले हैं। इसमें फैट कम पाया गया है। इसी तरह विभाग की तरफ से एकत्र नमूनों में से मधूसूदन और ज्ञान कंपनी के तीन नमूने जांच में अधोमानक मिले।
खुशबू के लिए केमिकल का इस्तेमाल : जानकार बताते हैं कि मिलावटखोर देसी घी की खुशबू के लिए केमिकल डाई एसिटाइल की कुछ बूंदे डालते हैं। सस्ते के चक्कर में मिलावट वाला घी बाजार में बिक रहा है। ग्राहक तो समझ नहीं पाएगा कि यह असली है या मिलावटी, जबकि दुकानदार को पूरी जानकारी होती है। बाजार में स्पर्धा को देखते हुए रेट कम कर देशी घी बेचने के चक्कर में मिलावट वाला बेचा जा रहा है। शुद्ध देशी घी बाजार में कम से कम 1200 रुपये प्रति किलो की दर से मिलता है। बाजार में पैक घी अलग-अलग रेट का है। औसतन 600 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भी घी मिलता है। सस्ते दर पर मिलने वाले घी में मिलावट होती है।
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अभी हाल ही में आई खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। घी में बटर ऑयल तो दही में हाइड्रोजेनेटेड तेल या सस्ते वनस्पति तेल की मिलावट मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी घी और दही का लगातार सेवन हार्ट अटैक, पाचन तंत्र की खराबी और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
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विभाग के अनुसार, करीब चार महीने पहले खाद्य विभाग की तरफ से घी के आठ नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। उनमें से तीन नमूने फेल मिले हैं। इनमें बटर ऑयल की मिलावट मिली। वहीं दही के लिए गए चार नमूनों में से दो नमूने फेल मिले। इसमें फैट कम मिला।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार दही के चार नमूनों में से पारस और मदरडेयरी के एक-एक नमूने फेल मिले हैं। इसमें फैट कम पाया गया है। इसी तरह विभाग की तरफ से एकत्र नमूनों में से मधूसूदन और ज्ञान कंपनी के तीन नमूने जांच में अधोमानक मिले।
खुशबू के लिए केमिकल का इस्तेमाल : जानकार बताते हैं कि मिलावटखोर देसी घी की खुशबू के लिए केमिकल डाई एसिटाइल की कुछ बूंदे डालते हैं। सस्ते के चक्कर में मिलावट वाला घी बाजार में बिक रहा है। ग्राहक तो समझ नहीं पाएगा कि यह असली है या मिलावटी, जबकि दुकानदार को पूरी जानकारी होती है। बाजार में स्पर्धा को देखते हुए रेट कम कर देशी घी बेचने के चक्कर में मिलावट वाला बेचा जा रहा है। शुद्ध देशी घी बाजार में कम से कम 1200 रुपये प्रति किलो की दर से मिलता है। बाजार में पैक घी अलग-अलग रेट का है। औसतन 600 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भी घी मिलता है। सस्ते दर पर मिलने वाले घी में मिलावट होती है।
