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Kushinagar News: पत्राचार पाठ्यक्रम के 700 परीक्षार्थियों का आवेदन निरस्त

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 02:28 AM IST
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Applications of 700 candidates for correspondence course cancelled
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पडरौना। पत्राचार पंजीकरण केंद्र के रूप में नामित गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज पडरौना के इंटर परीक्षा वर्ष 2026 के लिए आवेदन किए 700 विद्यार्थियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। अब ये परीक्षार्थी बुधवार से शुरू हो परीक्षा में शामिल नहीं होगी। इनके अनुक्रमांक को विलोपित करने की संस्तुति कर दी गई है।
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यह जानकारी डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि पत्राचार पाठ्यक्रम के तहत पंजीकरण वर्ष 2024 में निर्धारित समयावधि के भीतर पंजीकरण नहीं कराया गया। इनका शुल्क भी 20 सितंबर 2024 तक जमा नहीं किया गया। इसके अलावा आवेदन पत्रों को आवश्यक अभिलेखों एवं अर्हता प्रमाण-पत्रों सहित पूर्ण रूप से पूरित नहीं किया गया। कई आवेदन पत्रों में जरूरी विवरण अंकित नहीं पाए गए और एक वर्षीय/द्विवर्षीय पाठ्यक्रम से संबंधित अनिवार्य प्रमाण-पत्र भी संलग्न नहीं थे। इसके अलावा प्रमाण-पत्रों पर नामित नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी, प्रधानाचार्य, पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय इंटर काॅलेज के स्थान पर नियमविरुद्ध रूप से गोस्वामी तुलसी इंटर कॉलेज के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक के द्वारा हस्ताक्षर किए गए। इस तरह की लापरवाही अनियमितता है। इसको गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद, उप्र, प्रयागराज के सचिव इस पत्राचार पंजीकरण केंद्र से पंजीकृत सभी 700 परीक्षार्थियों का आवेदन पत्र निरस्त करते हुए आवंटित अनुक्रमांकों को फ्रीज/विलोपित करने का निर्देश जारी किया है। उनके निर्देश का अनुपालन करते हुए संबंधित परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा पर रोक लगाते हुए क्षेत्रीय कार्यालय, गोरखपुर की जांच आख्या के आधार पर प्रकरण परीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत कर पंजीकरण केंद्र के विरुद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिए। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि मामले में ज्ञान प्रकाश पाठक, प्रधान लिपिक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संस्था प्रबंधक को निर्देश दिया जा चुका है। उन्हें परिषदीय बोर्ड परीक्षा कार्यों से पृथक कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विकास मणि त्रिपाठी, प्रधानाचार्य के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित किया जा चुका है। इस मामले की याचिका उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कोई अंतरिम राहत प्रदान नहीं की है। न्यायालय ने चार सप्ताह के भीतर प्रतिशपथ-पत्र दाखिल किए जाने का आदेश पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा की शुचिता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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