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7 कमरे में 3 स्कूल: BRC के 12 में से 5 कमरे बने दफ्तर, एक कमरे में पांच कक्षाएं-359 बच्चों का भविष्य अधर में
Wed, 15 Jul 2026 05:37 PM IST
Rohit Singh
निलांबुज मिश्रा, कुशीनगर
निलांबुज मिश्रा, कुशीनगर
Published by: Rohit Singh
Updated Wed, 15 Jul 2026 05:37 PM IST
सार
बीआरसी परिसर में कुल 12 कमरे हैं, लेकिन इनमें से पांच शिक्षा से इतर विभागीय कार्यों में इस्तेमाल होते हैं। किसी कमरे में बीईओ कार्यालय है तो किसी में आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं, एक कमरे में किताबों का भंडारण है तो एक अन्य कमरे में नगर पालिका की प्रयोगशाला संचालित है।
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चलती कक्षाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सरकारी स्कूलों के कायाकल्प, स्मार्ट क्लास और बेहतर शिक्षा के दावों के बीच कुशीनगर के ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) परिसर की तस्वीर अलग ही कहानी बयां करती है। यहां तीन परिषदीय विद्यालय महज सात कमरों में संचालित हैं। हालात ऐसे हैं कि एक कमरे में पहली से पांचवीं तक की पांच कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ते हैं।
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तीनों विद्यालयों में कुल 359 बच्चे पंजीकृत हैं। यदि सभी बच्चे एक साथ स्कूल पहुंच जाएं तो पढ़ाई करना तो दूर, कक्षाओं में खड़े होने तक की जगह नहीं बचे। बीआरसी परिसर में कुल 12 कमरे हैं, लेकिन इनमें से पांच शिक्षा से इतर विभागीय कार्यों में इस्तेमाल होते हैं।
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किसी कमरे में बीईओ कार्यालय है तो किसी में आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं, एक कमरे में किताबों का भंडारण है तो एक अन्य कमरे में नगर पालिका की प्रयोगशाला संचालित है। मंगलवार को परिसर का नजारा इस बदहाल व्यवस्था की गवाही दे रहा था।
उच्च प्राथमिक विद्यालय पडरौना (संविलयन) के बच्चों की कक्षाएं चल रही थीं। प्रधानाध्यापक बिंदा चौहान ने बताया कि कमरों की कमी के कारण कई बार बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। बारिश या तेज धूप के दिनों में यह व्यवस्था और मुश्किल हो जाती है।
करीब दो वर्ष पहले किराये के भवन में संचालित प्राथमिक विद्यालय नौका टोला को भी बीआरसी परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार को इस विद्यालय की पहली से पांचवीं तक के 21 बच्चे एक ही कमरे में बैठे दिखे। दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय साहबगंज (संविलयन) के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे उपलब्ध हैं।
करीब दो वर्ष पहले किराये के भवन में संचालित प्राथमिक विद्यालय नौका टोला को भी बीआरसी परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। मंगलवार को इस विद्यालय की पहली से पांचवीं तक के 21 बच्चे एक ही कमरे में बैठे दिखे। दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालय साहबगंज (संविलयन) के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे उपलब्ध हैं।