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Kushinagar News: विद्यालयों में 50 फीसदी ही पहुंचीं किताबें, सत्र शुरू
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संतकबीरनगर। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए दो दिन हो गए हैं। जनपद में परिषदीय विद्यालयों में पूरी किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। कक्षा-छह से आठ तक 50 फीसदी ही किताबें पहुंची हैं।
जिले में 1247 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब एक लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसलिए शासन ने जनवरी से ही किताबों की आपूर्ति समय से सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है। 14 लाख 81 हजार 704 किताबों का ऑर्डर दिया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 10 लाख 93 हजार 833 किताबें जिले पर पहुंच चुकी हैं।
तीन लाख 87 हजार 833 किताबें जिले पर अभी आने वाली हैं, जिसमें से 7 लाख 27 हजार 779 किताबें गंतव्य स्थल तक पहुंचा दी गई हैं। 3 लाख 66 हजार 604 किताबें विद्यालयों पर पहुंचाना अभी अवशेष है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। ऐसे में आठवीं तक के विद्यार्थियों की सभी किताबें शासन से आती हैं।
इस बार भी किताबें आई हैं, लेकिन वह करीब 70 फीसदी ही हैं। कक्षा-एक से आठ तक की किसी भी कक्षा की पूरी किताबें नहीं हैं। ऐसे में उनके बस्ते अधूरे हैं। हिंदी की किताब है तो गणित की नहीं है। किसी कक्षा में गणित की हैं तो विज्ञान की किताबें नहीं पहुंची हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है बीते वर्षों की तुलना में इस बार किताबें समय से आई हैं, लेकिन यह भी बात सच है कि वह 70 से 80 ही फीसदी हैं। किताबें एनपीआरसी के माध्यम से विद्यालयों में भेजी जा रही हैं। चूंकि ज्यादा पहले किताबों का वितरण नहीं किया जा सकता। इसलिए ज्यादातर विद्यालयों में किताबों का वितरण नए सत्र में ही होना है।
कक्षा छह से आठ में 50 फीसदी किताबें आईं हैं। विभागीय अधिकारी कक्षा एक से पांच की 70 से 80 फीसदी और कक्षा छह से आठ की 50 फीसदी तक किताबें प्राप्त होने का दावा कर रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों में पहुंचीं किताबें वाकई 70 फीसदी तक हैं, लेकिन अनेक उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें अभी तक छह से आठ की किताबें ही नहीं पहुंची हैं।
बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया किताबों को समय से विद्यालयों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शीघ्र सभी बच्चों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
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जिले में 1247 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब एक लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसलिए शासन ने जनवरी से ही किताबों की आपूर्ति समय से सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है। 14 लाख 81 हजार 704 किताबों का ऑर्डर दिया गया था। इसके सापेक्ष अब तक 10 लाख 93 हजार 833 किताबें जिले पर पहुंच चुकी हैं।
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तीन लाख 87 हजार 833 किताबें जिले पर अभी आने वाली हैं, जिसमें से 7 लाख 27 हजार 779 किताबें गंतव्य स्थल तक पहुंचा दी गई हैं। 3 लाख 66 हजार 604 किताबें विद्यालयों पर पहुंचाना अभी अवशेष है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। ऐसे में आठवीं तक के विद्यार्थियों की सभी किताबें शासन से आती हैं।
इस बार भी किताबें आई हैं, लेकिन वह करीब 70 फीसदी ही हैं। कक्षा-एक से आठ तक की किसी भी कक्षा की पूरी किताबें नहीं हैं। ऐसे में उनके बस्ते अधूरे हैं। हिंदी की किताब है तो गणित की नहीं है। किसी कक्षा में गणित की हैं तो विज्ञान की किताबें नहीं पहुंची हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है बीते वर्षों की तुलना में इस बार किताबें समय से आई हैं, लेकिन यह भी बात सच है कि वह 70 से 80 ही फीसदी हैं। किताबें एनपीआरसी के माध्यम से विद्यालयों में भेजी जा रही हैं। चूंकि ज्यादा पहले किताबों का वितरण नहीं किया जा सकता। इसलिए ज्यादातर विद्यालयों में किताबों का वितरण नए सत्र में ही होना है।
कक्षा छह से आठ में 50 फीसदी किताबें आईं हैं। विभागीय अधिकारी कक्षा एक से पांच की 70 से 80 फीसदी और कक्षा छह से आठ की 50 फीसदी तक किताबें प्राप्त होने का दावा कर रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों में पहुंचीं किताबें वाकई 70 फीसदी तक हैं, लेकिन अनेक उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें अभी तक छह से आठ की किताबें ही नहीं पहुंची हैं।
बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया किताबों को समय से विद्यालयों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शीघ्र सभी बच्चों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
