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Kushinagar News: कुछ दावे ही रह गए, जो हकीकत बने वे उम्मीदें तोड़ रहे

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 01:23 AM IST
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Only a few claims remained, those that became reality are shattering expectations.
कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट
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पडरौना। भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए बीते एक दशक में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए गए। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ई-कार्ट वाहन, पर्यटन परियोजनाएं और कनेक्टिविटी के दावे किए गए लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कुशीनगर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। कुछ योजनाएं घोषणाओं तक रह गईं तो जो परियोजनाएं धरातल पर उतरीं वे भी उम्मीदों को उड़ान नहीं दे सकीं।
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अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा :
बना, उद्घाटन हुआ पर उड़ान अब तक नहीं
कुशीनगर में करोड़ों रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनकर तैयार है। अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण के समय इसे पूर्वांचल और बौद्ध सर्किट के लिए ‘गेमचेंजर’ बताया गया था। दावा था कि यहां से बोधगया, सारनाथ, लुंबिनी, वैशाली समेत कई अंतरराष्ट्रीय बौद्ध स्थलों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होंगी। लेकिन चार साल बीतने के बाद भी आज तक नियमित यात्री उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं। न तो एयरलाइंस के साथ ठोस समझौता हुआ, न ही यात्रियों के लिए स्पष्ट उड़ान शेड्यूल।
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रेलवे कनेक्टिविटी: सिर्फ फाइलों में दौड़ रही ट्रेन

गोरखपुर के सरदारनगर से हेतिमपुर होते हुए कुशीनगर-पडरौना को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना वर्षों से लंबित है। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर न सर्वे पूरा हुआ, न अधिग्रहण। आज भी कुशीनगर रेल नेटवर्क से कटा हुआ है, जबकि देश-विदेश से आने वाले अधिकांश पर्यटक रेल मार्ग पर निर्भर रहते हैं।

बौद्ध सर्किट बस सेवा: घोषणा बहुत, बसें शून्य

पर्यटन विभाग द्वारा बार-बार यह कहा गया कि कुशीनगर को बोधगया, सारनाथ, लुंबिनी और वैशाली से सीधी बस सेवा से जोड़ा जाएगा लेकिन आज भी ऐसी कोई नियमित बस सेवा संचालित नहीं है। पर्यटक निजी टैक्सी या अन्य गंतव्यों पर निर्भर हैं। इसका नतीजा है कि पर्यटक कुशीनगर पहुंचकर रुकने के बजाय सीधे अन्य स्थलों की ओर रवाना हो जाते हैं।

29 लाख के ई-कार्ट: सुविधा के लिए खरीदे शोपीस बन कर रह गए

विश्व पर्यटन दिवस 2022 पर कसाडा ने 29 लाख रुपये की लागत से चार ई-कार्ट वाहन खरीदे। उद्देश्य था बुजुर्ग, विदेशी और दिव्यांग पर्यटकों को बौद्ध स्थलों का आसान भ्रमण। लेकिन कुछ महीनों बाद सेवा अचानक ठप हो गई और आज ये वाहन निरस्त मैत्रेय परियोजना परिसर में धूल फांक रहे हैं। जेई प्रदीप चौरसिया ने कहा कि इन्हें चलाने के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से चालक व परिचालक के नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल, अभी कोई मेहमान आता है तो उन्हें बौद्ध स्थलों का भ्रमण कराया जाता है।


सूचना केंद्र और पुलिस बूथ:
नाम के, काम के नहीं

कुशीनगर मंदिर परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केंद्र भी बना है पर वह बंद पड़ा है। न गाइड है न ही सूचना सामग्री। पुलिस बूथ भी अधिकतर समय खाली रहता है। विदेशी पर्यटकों को इससे ज्यादा परेशानी होती है।


ठहराव सबसे बड़ी बाधा : ट्रांजिट पॉइंट बनकर रह गया

स्थानीय होटल व्यवसायियों और गाइडों का कहना है कि कुशीनगर में हर बजट वर्ग के लिए पर्याप्त ठहरने की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पर्यटक कुछ घंटों के ठहराव के बाद आगे बढ़ जाते हैं। लुंबिनी से आने वाले पर्यटक सीधे कुशीनगर से वैशाली के लिए रवाना हो जाते हैं। यहीं हाल बोधगया से आने वाले पर्यटक लुंबिनी के लिए रवाना हो जाते हैं। यानी कुशीनगर सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट बनकर रह गया है।

उपनिदेशक पर्यटन, गोरखपुर राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पर्यटकों की सुविधाओं के लिए विभाग की तरफ से करोड़ों रुपये खर्च कर आकर्षण के नए केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। जल्द ही कुशीनगर की कई बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। देश-विदेश के पर्यटकों को लुभाएंगी। उनमें प्रमुख रूप से बुद्धा थीम पार्क व रामाभार स्तूप परिसर में बना साउंड एंड लाइट शो है। मार्च तक इनका आने वाले सैलानी लुत्फ उठा सकेंगे। यहां शाम होते ही बुद्ध के संदेश गूंजेंगे।
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