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Kushinagar News: स्वयं सहायता समूह से मिली उड़ान, मोटे अनाज के कारोबार सेे बदल दी तकदीर
Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
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सोहंग गांव में आटा तैयार करती पूनम सिंह और अन्य महिलाएं। संवाद
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कसया। तहसील क्षेत्र के गांव सोहंग निवासी पूनम सिंह ने मोटे अनाज के प्रसंस्करण को रोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने करीब दो वर्ष पहले 40 से 50 हजार रुपये की लागत से इस कारोबार की शुरुआत की थी। अब उनके अनुसार हर माह करीब 5 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। इस इकाई से करीब 12 महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
पूनम सिंह ने बताया कि उनकी इकाई में ज्वार, मड़ुवा (रागी) और मक्का, जौ, बाजरा जैसे मोटे अनाजों का प्रसंस्करण कर मिश्रित आटा तैयार किया जाता है। अनाज की साफ-सफाई, कुटाई, पिसाई, पैकिंग और अन्य सभी कार्यों में महिलाएं सक्रिय रूप से सहयोग करती हैं। तैयार उत्पाद की पैकिंग के बाद उसे बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि कारोबार की शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआती दिनों में उत्पाद तैयार करने के साथ ही बाजार में पहचान बनाने और बिक्री के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। धीरे-धीरे लोगों में मोटे अनाज के प्रति जागरूकता बढ़ी, जिससे उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ने लगी।
पूनम सिंह का कहना है कि वर्तमान में उनके द्वारा तैयार मिश्रित आटा और अन्य मोटे अनाज के उत्पाद बाजार में आसानी से बिक रहे हैं।
्रउनका मानना है कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।न
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पूनम सिंह ने बताया कि उनकी इकाई में ज्वार, मड़ुवा (रागी) और मक्का, जौ, बाजरा जैसे मोटे अनाजों का प्रसंस्करण कर मिश्रित आटा तैयार किया जाता है। अनाज की साफ-सफाई, कुटाई, पिसाई, पैकिंग और अन्य सभी कार्यों में महिलाएं सक्रिय रूप से सहयोग करती हैं। तैयार उत्पाद की पैकिंग के बाद उसे बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि कारोबार की शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआती दिनों में उत्पाद तैयार करने के साथ ही बाजार में पहचान बनाने और बिक्री के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। धीरे-धीरे लोगों में मोटे अनाज के प्रति जागरूकता बढ़ी, जिससे उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ने लगी।
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पूनम सिंह का कहना है कि वर्तमान में उनके द्वारा तैयार मिश्रित आटा और अन्य मोटे अनाज के उत्पाद बाजार में आसानी से बिक रहे हैं।
्रउनका मानना है कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।न