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Kushinagar News: नरवाजोत बांध का संवेदनशील ठोकर अब भी गंडक के निशाने परह
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 08 Jun 2026 02:29 AM IST
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नरवाजोत में किमी 1.700 के पास ठोकर।संवाद
- फोटो : मनीष शर्मा
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संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। मानसून की दस्तक में अब महज दस दिन का समय शेष है, लेकिन गंडक नदी के किनारे बसे लोगों की चिंता कम नहीं हो रही है। नरवाजोत बांध के किमी 1.700 पर स्थित ठोकर तीन वर्षों से लगातार गंडक नदी के निशाने पर रहा है। कटान के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे इस स्थल पर 11.32 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश शासन ने मानसून सत्र में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए एपी बांध और नरवाजोत बांध की सुरक्षा संबंधी 32.71 करोड़ की लागत की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके तहत बाढ़ खंड विभाग की ओर से युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है। नरवाजोत बांध के किमी 1.700 पर स्थित क्षतिग्रस्त ठोकर को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से गंडक नदी यहां लगातार कटान कर रही है। पिछले वर्ष नदी के तेज बहाव से ठोकर का नोज कटान की चपेट में आ गया था। इसके अलावा एक निजी विद्यालय का पुराना भवन, छठ पूजा स्थल तथा डाउन और अप स्ट्रीम क्षेत्र की कई एकड़ उपजाऊ भूमि भी नदी में समा गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन की उच्चस्तरीय समिति की संस्तुति पर इस वर्ष 11.32 की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके तहत ठोकर के नोज भाग की मजबूती, ट्रांजिट एप्रन निर्माण, किमी 1.950 से 2.100 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना, किमी 0.000 से 0.100 के बीच रिवेटमेंट कार्य तथा तीन पंक्तियों में परक्यूपाइन लगाने का काम कराया जा रहा है।
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तमकुहीरोड। मानसून की दस्तक में अब महज दस दिन का समय शेष है, लेकिन गंडक नदी के किनारे बसे लोगों की चिंता कम नहीं हो रही है। नरवाजोत बांध के किमी 1.700 पर स्थित ठोकर तीन वर्षों से लगातार गंडक नदी के निशाने पर रहा है। कटान के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे इस स्थल पर 11.32 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश शासन ने मानसून सत्र में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए एपी बांध और नरवाजोत बांध की सुरक्षा संबंधी 32.71 करोड़ की लागत की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसके तहत बाढ़ खंड विभाग की ओर से युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है। नरवाजोत बांध के किमी 1.700 पर स्थित क्षतिग्रस्त ठोकर को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। पिछले तीन वर्षों से गंडक नदी यहां लगातार कटान कर रही है। पिछले वर्ष नदी के तेज बहाव से ठोकर का नोज कटान की चपेट में आ गया था। इसके अलावा एक निजी विद्यालय का पुराना भवन, छठ पूजा स्थल तथा डाउन और अप स्ट्रीम क्षेत्र की कई एकड़ उपजाऊ भूमि भी नदी में समा गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन की उच्चस्तरीय समिति की संस्तुति पर इस वर्ष 11.32 की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके तहत ठोकर के नोज भाग की मजबूती, ट्रांजिट एप्रन निर्माण, किमी 1.950 से 2.100 के बीच रिवेटमेंट पुनर्स्थापना, किमी 0.000 से 0.100 के बीच रिवेटमेंट कार्य तथा तीन पंक्तियों में परक्यूपाइन लगाने का काम कराया जा रहा है।
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