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Lakhimpur Kheri News: ताले में अन्नपूर्णा भवन, गलियों में राशन पहुंचाने की जद्दोजहद
Wed, 28 Oct 2026 11:37 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:37 PM IST
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गोविंदनगर काॅलोनी में निर्माण होने के बाद से बंद पड़ा अन्नपूर्णा भवन। संवाद
लखीमपुर खीरी। राशन की दुकानों को गलियों से निकालकर मुख्य मार्ग पर लाने की योजना के बावजूद व्यवस्था नहीं बदल पा रही है। जिले में 204 अन्नपूर्णा भवन स्वीकृत हुए, जिनमें 130 का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 74 अधूरे हैं।
तैयार भवनों में भी करीब 25 प्रतिशत पर ताले लटके हैं। ऐसे में कई जगह राशन वितरण पुरानी दुकानों से ही हो रहा है और गलियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की समस्या बनी हुई है। प्रत्येक भवन के निर्माण की लागत 8.50 लाख रुपये है।
जिले में 1470 से अधिक राशन की दुकानें हैं। इनमें करीब 30 प्रतिशत गलियों में होने के कारण बड़े ट्रक नहीं पहुंच पाते। अधिकारियों का दावा है कि छोटी गाड़ियों से खाद्यान्न पहुंचाया जाता है, लेकिन नाम न छापने की शर्त पर कुछ कोटेदारों ने बताया कि उन्हें खुद ही अपनी दुकान तक राशन ले जाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए शासन ने अन्नपूर्णा भवन बनाने की योजना शुरू की थी।
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प्राथमिकता गलियों में संचालित दुकानों को नए भवनों में स्थानांतरित करने की है, लेकिन निर्माण और संचालन में देरी से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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8.40 लाख उपभोक्ताओं को मिलता है राशन
जिले में 1470 से अधिक राशन दुकानों के माध्यम से हर महीने 8.40 लाख उपभोक्ताओं को निशुल्क राशन दिया जाता है। इनमें एक लाख अंत्योदय और 7.30 लाख पात्र गृहस्थी के उपभोक्ता हैं। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र के 78.56 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र के 64.43 प्रतिशत उपभोक्ता इस व्यवस्था के दायरे में हैं।
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225 नए भवनों को मंजूरी का इंतजार
अब तक अन्नपूर्णा भवन मनरेगा से बनाए गए हैं। आगे पूर्ति विभाग अपने बजट से इनका निर्माण कराएगा। विभाग ने जिले में 225 नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्रत्येक भवन के निर्माण पर 8.50 लाख रुपये खर्च होने हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इनके निर्माण का रास्ता साफ होगा।
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कहीं भवन टपक रहा, कहीं वितरण शुरू नहीं
संपूर्णानगर के गोविंदनगर कॉलोनी में एक साल पहले अन्नपूर्णा भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अब तक वहां राशन वितरण शुरू नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, भवन बारिश में टपकता है, इसलिए इसका हैंडओवर नहीं लिया गया। कोटेदार अपने घर पर राशन वितरण करने को मजबूर है।
मोहम्मदी क्षेत्र में पांच भवनों में से दो पर ताले मिले। गोला क्षेत्र के ग्रापरसपुर में भवन बन चुका है, लेकिन वहां राशन वितरण नहीं होता। बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र में 10 भवन बनने के बाद चालू हैं, जबकि पांच निर्माणाधीन हैं। पसगवां क्षेत्र के मकसूदपुर, गणेशापुर, दुलहापुर, चौवियापुर और अमरोलिया के नए भवनों में राशन वितरण होने की बात सामने आई। मितौली क्षेत्र में सात दुकानें संचालित हैं और छह भवन निर्माणाधीन हैं। यहां 30 नए भवनों का प्रस्ताव भेजा गया है।
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225 नए अन्नपूर्णा भवनों के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इनका निर्माण पूर्ति विभाग से कराया जाना है। इससे पहले के भवन मनरेगा से बने हैं। सभी भवनों में राशन वितरण के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद कहीं दुकानें संचालित नहीं हो रही हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-सीमा त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी
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तैयार भवनों में भी करीब 25 प्रतिशत पर ताले लटके हैं। ऐसे में कई जगह राशन वितरण पुरानी दुकानों से ही हो रहा है और गलियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की समस्या बनी हुई है। प्रत्येक भवन के निर्माण की लागत 8.50 लाख रुपये है।
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जिले में 1470 से अधिक राशन की दुकानें हैं। इनमें करीब 30 प्रतिशत गलियों में होने के कारण बड़े ट्रक नहीं पहुंच पाते। अधिकारियों का दावा है कि छोटी गाड़ियों से खाद्यान्न पहुंचाया जाता है, लेकिन नाम न छापने की शर्त पर कुछ कोटेदारों ने बताया कि उन्हें खुद ही अपनी दुकान तक राशन ले जाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए शासन ने अन्नपूर्णा भवन बनाने की योजना शुरू की थी।
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प्राथमिकता गलियों में संचालित दुकानों को नए भवनों में स्थानांतरित करने की है, लेकिन निर्माण और संचालन में देरी से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
8.40 लाख उपभोक्ताओं को मिलता है राशन
जिले में 1470 से अधिक राशन दुकानों के माध्यम से हर महीने 8.40 लाख उपभोक्ताओं को निशुल्क राशन दिया जाता है। इनमें एक लाख अंत्योदय और 7.30 लाख पात्र गृहस्थी के उपभोक्ता हैं। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र के 78.56 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र के 64.43 प्रतिशत उपभोक्ता इस व्यवस्था के दायरे में हैं।
225 नए भवनों को मंजूरी का इंतजार
अब तक अन्नपूर्णा भवन मनरेगा से बनाए गए हैं। आगे पूर्ति विभाग अपने बजट से इनका निर्माण कराएगा। विभाग ने जिले में 225 नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। प्रत्येक भवन के निर्माण पर 8.50 लाख रुपये खर्च होने हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इनके निर्माण का रास्ता साफ होगा।
कहीं भवन टपक रहा, कहीं वितरण शुरू नहीं
संपूर्णानगर के गोविंदनगर कॉलोनी में एक साल पहले अन्नपूर्णा भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अब तक वहां राशन वितरण शुरू नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, भवन बारिश में टपकता है, इसलिए इसका हैंडओवर नहीं लिया गया। कोटेदार अपने घर पर राशन वितरण करने को मजबूर है।
मोहम्मदी क्षेत्र में पांच भवनों में से दो पर ताले मिले। गोला क्षेत्र के ग्रापरसपुर में भवन बन चुका है, लेकिन वहां राशन वितरण नहीं होता। बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र में 10 भवन बनने के बाद चालू हैं, जबकि पांच निर्माणाधीन हैं। पसगवां क्षेत्र के मकसूदपुर, गणेशापुर, दुलहापुर, चौवियापुर और अमरोलिया के नए भवनों में राशन वितरण होने की बात सामने आई। मितौली क्षेत्र में सात दुकानें संचालित हैं और छह भवन निर्माणाधीन हैं। यहां 30 नए भवनों का प्रस्ताव भेजा गया है।
225 नए अन्नपूर्णा भवनों के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इनका निर्माण पूर्ति विभाग से कराया जाना है। इससे पहले के भवन मनरेगा से बने हैं। सभी भवनों में राशन वितरण के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद कहीं दुकानें संचालित नहीं हो रही हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-सीमा त्रिपाठी, जिला पूर्ति अधिकारी