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Navratri 2026: लखीमपुर के संकटा देवी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, जानिए यहां का इतिहास और मान्यता

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: Mukesh Kumar Updated Thu, 19 Mar 2026 04:21 PM IST
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सार

लखीमपुर खीरी में नवरात्र के पहले दिन संकटा देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। संकटा देवी को शहर की कुलदेवी माना जाता है। भक्तों ने बृहस्पतिवार को मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की। 

Crowds of devotees throng the Sankata Devi Temple in Lakhimpur Kheri
संकटा देवी मंदिर में दर्शन करते भक्त - फोटो : संवाद
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विस्तार

लखीमपुर खीरी में चैत्र नवरात्र के पहले दिन जिलेभर के देवी मंदिरों में बृहस्पतिवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और शंख की ध्वनि से माहौल भक्तिमय बना रहा।

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शहर के संकटा देवी मंदिर परिसर में माता का भव्य दरबार सजाया गया है। पंडाल में देवी के विभिन्न स्वरूपों की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जहां श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर में दर्शन के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। इसके अलावा मां शीतला देवी, बंकटा देवी और भुइयां माता मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में भी दिनभर चहल-पहल बनी रही।
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शहर में स्थित मां संकटा देवी मंदिर शहर की कुलदेवी है। यह मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मंदिर माता लक्ष्मी को समर्पित है, जिन्हें यहां संकट नाशिनी (संकटा देवी) के रूप में पूजा जाता है। यह जानकारी संकटा देवी मंदिर के पुजारी मदन शुक्ला ने दी। उन्होंने बताया कि संकटा देवी मंदिर शहर के चार प्रमुख शक्ति पीठों में से एक (और सबसे प्रमुख) है। 

पौराणिक इतिहास और स्थापना की कथा
स्थानीय मान्यता और पुराणों से जुड़ी कथा के अनुसार यह मंदिर द्वापर युग (महाभारत काल) का है। महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी रुक्मिणी और पांडवों के साथ पशुपतिनाथ (नेपाल) दर्शन के लिए जा रहे थे। रास्ते में यह क्षेत्र (तब घने वन और बड़े जलाशयों से घिरा सुंदर स्थान) बहुत भाया। रुक्मिणी ने यहां रुककर पूजा-अर्चना करने की इच्छा जताई।

श्रीकृष्ण ने उन्हें यहां ठहराकर पांडवों के साथ यात्रा पूरी की। लौटते समय उन्होंने एक विशाल जलाशय के किनारे माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और माता दुर्गा की पाषाण प्रतिमाएं स्थापित कीं। पांडवों के साथ विधि-विधान से पूजा की गई।  

संकटा देवी मंदिर की मान्यताएं 
पुजारी के मुताबिक भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि सच्चे मन से मां के दर्शन करने पर हर प्रकार के संकट, कष्ट, बाधा, रोग और आर्थिक समस्या दूर हो जाती है। मनोकामनाएं पूरी होती हैं, सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सुरक्षा मिलती है। विवाह, मुंडन, अन्नप्राशन, नामकरण, गृह प्रवेश आदि सभी शुभ संस्कार मां संकटा के दर्शन के बाद ही शुरू किए जाते हैं। नवविवाहित जोड़े भी पहले यहां माता के चरणों में नमन करते हैं। खीरी और आसपास के क्षेत्रों में यह कुलदेवी मानी जाती है। बिना उनके दर्शन के कोई शुभ कार्य अधूरा माना जाता है।

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