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Lakhimpur Kheri News: नजूल फ्रीहोल्ड में अटका ब्याज, बुजुर्ग की नहीं सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:27 AM IST
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बुजुर्ग धर्मेंद्र कुमार गुप्ता
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लखीमपुर खीरी। नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराने से जुड़े मामले में प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। मोहल्ला थरवनगंज निवासी 70 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार गुप्ता पिछले छह वर्षों से जमा धनराशि पर मिलने वाले ब्याज के लिए अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-4 को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
धर्मेंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार, नजूल भूमि फ्रीहोल्ड मामले में वर्ष 2020 में उन्हें 1.60 लाख रुपये की मूल राशि वापस कर दी गई थी, लेकिन पांच प्रतिशत वार्षिक दर से 9 वर्ष 6 माह का ब्याज, जो करीब 76 हजार रुपये बनता है, अब तक नहीं दिया गया। उनका कहना है कि 15 जनवरी 2015 के शासनादेश के अनुसार, यदि कोई आवेदक फ्रीहोल्ड प्रक्रिया पूरी नहीं कराता और जमा राशि वापस लेता है, तो उसे साधारण ब्याज सहित भुगतान दिया जाना अनिवार्य है।
वर्ष 2021 में तत्कालीन एडीएम अरुण सिंह ने प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कहा था कि ब्याज मद में धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। पीड़ित का आरोप है कि उसका भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा है और शिकायत को अन्य मुद्दों में उलझाया जा रहा है।
पीड़ित ने मांग की है कि 76 हजार रुपये की मूल ब्याज राशि पर वर्ष 2026 तक का अतिरिक्त ब्याज जोड़कर पूरी रकम का भुगतान तत्काल किया जाए। उनका आरोप है कि एलबीसी शैलेंद्र वर्मा और एडीएम स्तर पर लापरवाही के कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं।
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इस तरह का मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। संबंधित पटल से जानकारी ली जाएगी और यदि मामला सही पाया गया तो समाधान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित लिखित शिकायत भी दे सकते हैं। -नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम प्रशासन
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धर्मेंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार, नजूल भूमि फ्रीहोल्ड मामले में वर्ष 2020 में उन्हें 1.60 लाख रुपये की मूल राशि वापस कर दी गई थी, लेकिन पांच प्रतिशत वार्षिक दर से 9 वर्ष 6 माह का ब्याज, जो करीब 76 हजार रुपये बनता है, अब तक नहीं दिया गया। उनका कहना है कि 15 जनवरी 2015 के शासनादेश के अनुसार, यदि कोई आवेदक फ्रीहोल्ड प्रक्रिया पूरी नहीं कराता और जमा राशि वापस लेता है, तो उसे साधारण ब्याज सहित भुगतान दिया जाना अनिवार्य है।
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वर्ष 2021 में तत्कालीन एडीएम अरुण सिंह ने प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कहा था कि ब्याज मद में धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। पीड़ित का आरोप है कि उसका भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा है और शिकायत को अन्य मुद्दों में उलझाया जा रहा है।
पीड़ित ने मांग की है कि 76 हजार रुपये की मूल ब्याज राशि पर वर्ष 2026 तक का अतिरिक्त ब्याज जोड़कर पूरी रकम का भुगतान तत्काल किया जाए। उनका आरोप है कि एलबीसी शैलेंद्र वर्मा और एडीएम स्तर पर लापरवाही के कारण वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं।
इस तरह का मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। संबंधित पटल से जानकारी ली जाएगी और यदि मामला सही पाया गया तो समाधान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित लिखित शिकायत भी दे सकते हैं। -नरेंद्र बहादुर सिंह, एडीएम प्रशासन

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