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नेपाल चुनाव : रेशम चौधरी का नामांकन खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 23 Jan 2026 11:00 PM IST
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उन्मुक्ति पार्टी से उम्मीदवार रेशम चौधरी। स्रोत :पार्टी
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धनगढ़ी (नेपाल)। प्रतिनिधि सभा निर्वाचन के लिए कैलाली जिले के निर्वाचन क्षेत्र से नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के उम्मीदवार रेशम चौधरी को बड़ा झटका लगा है। निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया।
रेशम चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ धनगढ़ी स्थित निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर जोर-शोर से अपना नामांकन दाखिल किया था। इस क्षेत्र से चौधरी के अलावा तीन महिलाओं और छह निर्दलीय उम्मीदवारों सहित कुल 19 लोगों ने पर्चा भरा था। नामांकन प्रक्रिया के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार सत्य नारायण भट्टराई ने चौधरी की उम्मीदवारी पर लिखित विरोध दर्ज कराया था।
भट्टराई ने दलील दी थी कि प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन निर्देशिका के अनुसार, हत्या जैसे गंभीर मामले में दोषी पाए जाने वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए निर्वाचन अधिकारी देवराज भट्ट ने बताया कि सन 2015 में हुए चर्चित टीकापुर हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रेशम चौधरी को दोषी ठहराते हुए जन्मकैद की सजा सुनाई थी।
हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से माफी मिलने के बाद वे जेल से रिहा हो चुके हैं लेकिन निर्वाचन निर्देशिका की दफा 16 के प्रावधान के तहत जन्मकैद की सजा पाए व्यक्ति को उम्मीदवार बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर जांच के बाद उनका नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया गया है। चौधरी का नामांकन खारिज होने के बाद क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और उन्मुक्ति पार्टी के खेमे में मायूसी देखी जा रही है।
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रेशम चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ धनगढ़ी स्थित निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर जोर-शोर से अपना नामांकन दाखिल किया था। इस क्षेत्र से चौधरी के अलावा तीन महिलाओं और छह निर्दलीय उम्मीदवारों सहित कुल 19 लोगों ने पर्चा भरा था। नामांकन प्रक्रिया के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार सत्य नारायण भट्टराई ने चौधरी की उम्मीदवारी पर लिखित विरोध दर्ज कराया था।
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भट्टराई ने दलील दी थी कि प्रतिनिधि सभा सदस्य निर्वाचन निर्देशिका के अनुसार, हत्या जैसे गंभीर मामले में दोषी पाए जाने वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। इस मामले पर फैसला सुनाते हुए निर्वाचन अधिकारी देवराज भट्ट ने बताया कि सन 2015 में हुए चर्चित टीकापुर हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने रेशम चौधरी को दोषी ठहराते हुए जन्मकैद की सजा सुनाई थी।
हालांकि, राष्ट्रपति की ओर से माफी मिलने के बाद वे जेल से रिहा हो चुके हैं लेकिन निर्वाचन निर्देशिका की दफा 16 के प्रावधान के तहत जन्मकैद की सजा पाए व्यक्ति को उम्मीदवार बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर जांच के बाद उनका नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया गया है। चौधरी का नामांकन खारिज होने के बाद क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और उन्मुक्ति पार्टी के खेमे में मायूसी देखी जा रही है।
