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खेत-खलिहानों से लेकर स्कूल, कॉलेज तक महिलाएं असुरक्षित : कृष्णा अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:28 PM IST
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आंबेडकर पार्क में कार्यक्रम को संबोधित करती भाकपा माले केंद्रीय कमेटी की सदस्य कृष्णा अधिकारी।
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लखीमपुर खीरी। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की जिला इकाई ने तीन जनवरी से नौ जनवरी तक महिलाओं की शिक्षा, रोजगार पर जोर देने के लिए और महिला उत्पीड़न के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया। यह अभियान सावित्रीबाई फुले व फातमा शेख के जन्मदिन के मौके पर आयोजित हुआ। अभियान के समापन पर शुक्रवार को पार्टी कार्यालय से आंबेडकर पार्क तक जुलूस निकाला गया, जहां सभा आयोजित की गई।
सभा में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य व ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार महिलाओं पर मनुस्मृति थोपने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सोच के चलते नाबालिग दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म जैसे मामले सामने आए और दोषियों को संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि खेत-खलिहानों से लेकर स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों तक महिलाएं असुरक्षित हैं और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा एक धोखा साबित हुआ है।
ऐपवा की जिला सचिव तपेश्वरी ने कहा कि महिला संगठनों और प्रगतिशील जनमानस के संघर्ष के कारण ही सुप्रीम कोर्ट को सजा निलंबन का फैसला वापस लेना पड़ा।
कार्यक्रम में सहसचिव माला सिंह, लीसा, ओमकार पाल, अनीता निषाद, चंद्रावती सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे। सावित्री देवी, उर्मिला, मुन्नी देवी, लक्ष्मी, द्रौपदी, नेतराम, अलगू, बालचंद सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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सभा में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य व ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार महिलाओं पर मनुस्मृति थोपने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी सोच के चलते नाबालिग दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म जैसे मामले सामने आए और दोषियों को संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि खेत-खलिहानों से लेकर स्कूल, कॉलेज और कार्यस्थलों तक महिलाएं असुरक्षित हैं और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा एक धोखा साबित हुआ है।
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ऐपवा की जिला सचिव तपेश्वरी ने कहा कि महिला संगठनों और प्रगतिशील जनमानस के संघर्ष के कारण ही सुप्रीम कोर्ट को सजा निलंबन का फैसला वापस लेना पड़ा।
कार्यक्रम में सहसचिव माला सिंह, लीसा, ओमकार पाल, अनीता निषाद, चंद्रावती सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे। सावित्री देवी, उर्मिला, मुन्नी देवी, लक्ष्मी, द्रौपदी, नेतराम, अलगू, बालचंद सहित बड़ी संख्या में महिलाएं व कार्यकर्ता मौजूद रहे।