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Lalitpur News: दलित महिला की जमीन पर कब्जे का मामला खुला, डीएम ने जांच के दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। अनुसूचित जाति की एक महिला की जमीन पर कथित कब्जे का मामला बैनामे की अनुमति प्रक्रिया के दौरान सामने आने पर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मामले में गलत आख्या देने वाले लेखपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
तहसील तालबेहट क्षेत्र के ग्राम खांदी के मजरा गनेशपुरा से जुड़ा यह मामला उस समय उजागर हुआ, जब आजादपुरा-तरगुवा निवासी एक अनुसूचित जाति की महिला की भूमि के विक्रय की अनुमति का प्रकरण जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचा। राजस्व अधिकारियों की आख्या में भूमि बेचने का कारण उपचार के लिए धन की आवश्यकता बताया गया था। जिलाधिकारी ने अनुमति देने से पहले महिला को तलब कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। महिला ने बताया कि वह अपनी जमीन बेचना नहीं चाहती, बल्कि उसकी भूमि पर वर्षों से एक व्यक्ति कब्जा कर खेती कर रहा है। कब्जा न मिलने और लगातार परेशान किए जाने के कारण वह भूमि बेचने को मजबूर हो रही थी।
महिला की बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी भूपेंद्र सिंह को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने कथित कब्जाधारी को तलब किया। अधिकारियों की सख्ती के बाद संबंधित व्यक्ति ने महिला की भूमि पर अपना कब्जा छोड़ने संबंधी लिखित सहमति प्रशासन को सौंप दी।
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जिलाधिकारी की पहल के बाद महिला को वर्षों से विवादित अपनी भूमि का कब्जा वापस मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं, गलत तथ्यों के आधार पर आख्या भेजने वाले राजस्व कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
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कब्जा दिलाने की बात सुनकर छलक पड़े आंसू
उपजिलाधिकारी भूपेंद्र सिंह ने जब महिला को उसकी जमीन का कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया तो वह भावुक हो गई। वर्षों से अपनी भूमि के लिए संघर्ष कर रही महिला की आंखों से आंसू निकल पड़े और उसने प्रशासन का आभार जताया।
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दलितों की जमीनों के सौदों पर उठे सवाल
तहसील क्षेत्र में अनुसूचित जाति की भूमि के विक्रय संबंधी मामलों में सक्रिय कथित सिंडिकेट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ बिचौलिए और दस्तावेज लेखक भोले-भाले किसानों को बहलाकर उनकी जमीनों के सौदे कराते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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प्रथम दृष्टया गलत आख्या देने के मामले में लेखपाल आलोक कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। इस तरह की लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
— भूपेंद्र सिंह, उपजिलाधिकारी, तालबेहट
तालबेहट। अनुसूचित जाति की एक महिला की जमीन पर कथित कब्जे का मामला बैनामे की अनुमति प्रक्रिया के दौरान सामने आने पर जिलाधिकारी सत्य प्रकाश ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इस मामले में गलत आख्या देने वाले लेखपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
तहसील तालबेहट क्षेत्र के ग्राम खांदी के मजरा गनेशपुरा से जुड़ा यह मामला उस समय उजागर हुआ, जब आजादपुरा-तरगुवा निवासी एक अनुसूचित जाति की महिला की भूमि के विक्रय की अनुमति का प्रकरण जिलाधिकारी के समक्ष पहुंचा। राजस्व अधिकारियों की आख्या में भूमि बेचने का कारण उपचार के लिए धन की आवश्यकता बताया गया था। जिलाधिकारी ने अनुमति देने से पहले महिला को तलब कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली। महिला ने बताया कि वह अपनी जमीन बेचना नहीं चाहती, बल्कि उसकी भूमि पर वर्षों से एक व्यक्ति कब्जा कर खेती कर रहा है। कब्जा न मिलने और लगातार परेशान किए जाने के कारण वह भूमि बेचने को मजबूर हो रही थी।
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महिला की बात सुनने के बाद जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी भूपेंद्र सिंह को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन ने कथित कब्जाधारी को तलब किया। अधिकारियों की सख्ती के बाद संबंधित व्यक्ति ने महिला की भूमि पर अपना कब्जा छोड़ने संबंधी लिखित सहमति प्रशासन को सौंप दी।
जिलाधिकारी की पहल के बाद महिला को वर्षों से विवादित अपनी भूमि का कब्जा वापस मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं, गलत तथ्यों के आधार पर आख्या भेजने वाले राजस्व कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
कब्जा दिलाने की बात सुनकर छलक पड़े आंसू
उपजिलाधिकारी भूपेंद्र सिंह ने जब महिला को उसकी जमीन का कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया तो वह भावुक हो गई। वर्षों से अपनी भूमि के लिए संघर्ष कर रही महिला की आंखों से आंसू निकल पड़े और उसने प्रशासन का आभार जताया।
दलितों की जमीनों के सौदों पर उठे सवाल
तहसील क्षेत्र में अनुसूचित जाति की भूमि के विक्रय संबंधी मामलों में सक्रिय कथित सिंडिकेट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ बिचौलिए और दस्तावेज लेखक भोले-भाले किसानों को बहलाकर उनकी जमीनों के सौदे कराते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रथम दृष्टया गलत आख्या देने के मामले में लेखपाल आलोक कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। इस तरह की लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
— भूपेंद्र सिंह, उपजिलाधिकारी, तालबेहट