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Lalitpur News: डीआरएम ने किया जाखलौन नॉन इंटरलॉकिंग कार्य में सुरक्षा और गुणवत्ता का निरीक्षण
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- जाखलौन में तीसरी लाइन के लिए चल रहा नॉन-इंटरलॉकिंग का कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जाखलौन रेलवे स्टेशन पर डाली जा रही तीसरी रेल लाइन के लिए चल रहे नॉन इंटरलॉकिंग कार्य का बुधवार को मंडल रेल प्रबंधक ने निरीक्षण कर गुणवत्ता को परखा और अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
जाखलौन से धौर्रा के मध्य अधूरी आठ किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन बिछाने का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है, जिसमें लगभग एक सप्ताह का और समय लग सकता है। वहीं, जाखलौन स्टेशन और यार्ड में नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इसके चलते बुधवार को मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार जाखलौन पहुंचे और उन्होंने यहां नॉन इंटर लॉकिंग कार्य की प्रगति, सुरक्षा प्रबंधों और तकनीकी पहलुओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान डीआरएम ने कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्य की वर्तमान स्थिति, निर्धारित समय सीमा और संरक्षा से जुड़े प्रबंधों की जानकारी संबंधी सवाल पूछे। उन्होंने निर्देश दिए कि ब्लॉक अवधि के दौरान सभी कार्य निर्धारित समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और रेल संरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने इस दौरान यहां मौजूद इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूर संचार व अन्य संबंधित विभागों की टीमों समन्वय बनाकर कार्य करने को कहा, ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किए जाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कार्य के प्रत्येक चरण में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे और कर्मचारियों के लिए सभी संरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। जाखलौन-धौर्रा रेल खंड में तीसरी रेल लाइन निर्माण से संबंधित कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो लगभग एक सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसी के चलते जाखलौन में यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग और सिग्नलिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद नई लाइन के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे इस रेल खंड पर रेल यातायात और अधिक सुचारू, सुरक्षित, सक्षम बन सकेगा। वहीं, यह तीसरी लाइन का काम पूरा होने और नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा होने के बाद आगासौद से झांसी तक तीसरी रेल लाइन पर सुचारू संचालन हो सकेगा। इस परियोजना के पूरा होने से भविष्य में ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। इससे रेल यातायात दबाव में कमी आएगी और यात्रियों व माम ढुलाई दोनों के लिए बेहतर और विश्वसनीय रेल सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जाखलौन रेलवे स्टेशन पर डाली जा रही तीसरी रेल लाइन के लिए चल रहे नॉन इंटरलॉकिंग कार्य का बुधवार को मंडल रेल प्रबंधक ने निरीक्षण कर गुणवत्ता को परखा और अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए।
जाखलौन से धौर्रा के मध्य अधूरी आठ किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन बिछाने का कार्य अंतिम दौर में चल रहा है, जिसमें लगभग एक सप्ताह का और समय लग सकता है। वहीं, जाखलौन स्टेशन और यार्ड में नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इसके चलते बुधवार को मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार जाखलौन पहुंचे और उन्होंने यहां नॉन इंटर लॉकिंग कार्य की प्रगति, सुरक्षा प्रबंधों और तकनीकी पहलुओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान डीआरएम ने कार्यों का निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्य की वर्तमान स्थिति, निर्धारित समय सीमा और संरक्षा से जुड़े प्रबंधों की जानकारी संबंधी सवाल पूछे। उन्होंने निर्देश दिए कि ब्लॉक अवधि के दौरान सभी कार्य निर्धारित समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं और रेल संरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने इस दौरान यहां मौजूद इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं दूर संचार व अन्य संबंधित विभागों की टीमों समन्वय बनाकर कार्य करने को कहा, ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किए जाने के निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि कार्य के प्रत्येक चरण में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे और कर्मचारियों के लिए सभी संरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। जाखलौन-धौर्रा रेल खंड में तीसरी रेल लाइन निर्माण से संबंधित कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जो लगभग एक सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसी के चलते जाखलौन में यार्ड में नॉन-इंटरलॉकिंग और सिग्नलिंग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने के बाद नई लाइन के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे इस रेल खंड पर रेल यातायात और अधिक सुचारू, सुरक्षित, सक्षम बन सकेगा। वहीं, यह तीसरी लाइन का काम पूरा होने और नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा होने के बाद आगासौद से झांसी तक तीसरी रेल लाइन पर सुचारू संचालन हो सकेगा। इस परियोजना के पूरा होने से भविष्य में ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। इससे रेल यातायात दबाव में कमी आएगी और यात्रियों व माम ढुलाई दोनों के लिए बेहतर और विश्वसनीय रेल सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।