{"_id":"6a53fa0ab160fa67b20eb9fb","slug":"lack-of-facilities-at-the-districts-only-trauma-center-patients-facing-hardship-lalitpur-news-c-11-1-jhs1037-833763-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: जिले के इकलौते ट्रामा सेंटर में सुविधाओं की कमी, मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: जिले के इकलौते ट्रामा सेंटर में सुविधाओं की कमी, मरीज परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के इकलौते ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में भी सुविधाओं में विस्तार नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज से सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी हालत जस के तस बने हुए हैं। महज 12 बेडों के सहारे ट्रामा सेंटर चल रहा है। आपात स्थिति में ऑपरेशन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। यही नहीं समुचित संसाधन भी नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह 150 मरीज रेफर हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज स्थित ट्रामा सेंटर में 100 किलोमीटर के हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायल तथा गांव व ब्लॉक, तहसील क्षेत्र की सड़क दुर्घटनाओं में घायल व अन्य समस्याओं और बीमारियों के मरीज उपचार के लिए आते हैं। आंकड़ाें के अनुसार 24 घंटे में लगभग 100 से 150 मरीज तक आते हैं। जिले की इकलौती अस्पताल होने से जनपद के साथ ही सीमा से सटे मध्यप्रदेश के मरीज भी आते हैं। लेकिन, मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। संसाधन व सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जा रहा है। प्रतिदिन पांच से छह मरीज रेफर हो रहे हैं।
-- -
12 बेड के सहारे संचालित हो रही इमरजेंसी/ट्रामा सेंटर
मेडिकल कॉलेज स्थित ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में अधिक भीड़ होने पर मरीजों को बेड तक नसीब नहीं होता है। कारण वर्तमान में इमरजेंसी में महज 12 बेड ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अधिक मरीज आने पर बेड मिलने तक उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। यही नहीं सीमित मात्रा में ही मॉनीटर लगे हुए हैं। ऐसे में किसी दिन बड़ी दुर्घटना होने पर स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
-- -
वेंटिलेटर की नहीं है सुविधा
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में विभागीय अधिकारी भले ही वेंटिलेटर की सुविधा होने का दावा कर रहे हों। लेकिन, हकीकत यह है कि इमरजेंसी विभाग में एक भी वेंटीलेटर स्थापित नहीं हैं। ऐसे में वेंटीलेटर की आवश्यकता वाले मरीजों को अन्य वार्ड आईसीयू में भेजना पड़ता है। ऐसे में मरीज को इधर-उधर करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समस्या होती है।
-- -
नहीं है 24 घंटे ऑपरेशन की सुविधा
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी का नाम तो रख दिया है। लेकिन, अब तक इमरजेंसी में ऑपरेशन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि परिसर में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा है, लेकिन सीमित समय ही ऑपरेशन किए जाते हैं। स्टाॅफ की कमी से महज दिन में दो बजे के बाद ही बंद कर दिया जाता है। इसके बाद ताला लटकता रहता है। जबकि तीन शिफ्टों में स्टॉफ तैनात कर चलाना चाहिए।
-- -
विशेषज्ञों की कमी
यहां पर सर्जरी, ऑर्थो, मेडिसिन, पीडियाट्रिक आदि विशेषज्ञ होना चाहिए। हालांकि विभागीय अधिकारियाें का कहना है कि आवश्यकता पर चिकित्सक तत्काल में आते हैं। वहीं टेक्नीशियन स्टॉफ की भी कमी बनी हुई है।
-- -
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में वेंटीलेटर की सुविधा है। आवश्यकता पर खोला जाता है। साथ ही, आधुनिक सुविधाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
-डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
ललितपुर। जिले के इकलौते ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में भी सुविधाओं में विस्तार नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज से सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन दो वर्ष बाद भी हालत जस के तस बने हुए हैं। महज 12 बेडों के सहारे ट्रामा सेंटर चल रहा है। आपात स्थिति में ऑपरेशन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। यही नहीं समुचित संसाधन भी नहीं हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रतिमाह 150 मरीज रेफर हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज स्थित ट्रामा सेंटर में 100 किलोमीटर के हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं के घायल तथा गांव व ब्लॉक, तहसील क्षेत्र की सड़क दुर्घटनाओं में घायल व अन्य समस्याओं और बीमारियों के मरीज उपचार के लिए आते हैं। आंकड़ाें के अनुसार 24 घंटे में लगभग 100 से 150 मरीज तक आते हैं। जिले की इकलौती अस्पताल होने से जनपद के साथ ही सीमा से सटे मध्यप्रदेश के मरीज भी आते हैं। लेकिन, मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। संसाधन व सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया जा रहा है। प्रतिदिन पांच से छह मरीज रेफर हो रहे हैं।
विज्ञापन
12 बेड के सहारे संचालित हो रही इमरजेंसी/ट्रामा सेंटर
मेडिकल कॉलेज स्थित ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में अधिक भीड़ होने पर मरीजों को बेड तक नसीब नहीं होता है। कारण वर्तमान में इमरजेंसी में महज 12 बेड ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अधिक मरीज आने पर बेड मिलने तक उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। यही नहीं सीमित मात्रा में ही मॉनीटर लगे हुए हैं। ऐसे में किसी दिन बड़ी दुर्घटना होने पर स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
वेंटिलेटर की नहीं है सुविधा
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में विभागीय अधिकारी भले ही वेंटिलेटर की सुविधा होने का दावा कर रहे हों। लेकिन, हकीकत यह है कि इमरजेंसी विभाग में एक भी वेंटीलेटर स्थापित नहीं हैं। ऐसे में वेंटीलेटर की आवश्यकता वाले मरीजों को अन्य वार्ड आईसीयू में भेजना पड़ता है। ऐसे में मरीज को इधर-उधर करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समस्या होती है।
नहीं है 24 घंटे ऑपरेशन की सुविधा
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी का नाम तो रख दिया है। लेकिन, अब तक इमरजेंसी में ऑपरेशन की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि परिसर में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा है, लेकिन सीमित समय ही ऑपरेशन किए जाते हैं। स्टाॅफ की कमी से महज दिन में दो बजे के बाद ही बंद कर दिया जाता है। इसके बाद ताला लटकता रहता है। जबकि तीन शिफ्टों में स्टॉफ तैनात कर चलाना चाहिए।
विशेषज्ञों की कमी
यहां पर सर्जरी, ऑर्थो, मेडिसिन, पीडियाट्रिक आदि विशेषज्ञ होना चाहिए। हालांकि विभागीय अधिकारियाें का कहना है कि आवश्यकता पर चिकित्सक तत्काल में आते हैं। वहीं टेक्नीशियन स्टॉफ की भी कमी बनी हुई है।
ट्रामा सेंटर/इमरजेंसी में वेंटीलेटर की सुविधा है। आवश्यकता पर खोला जाता है। साथ ही, आधुनिक सुविधाओं के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
-डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज