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ललितपुर: बिजली बिल मामले में अधिशासी अभियंता को अदालत की अंतिम चेतावनी, हाजिर नहीं हुए तो खाते से होगी वसूली
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: दीपक महाजन
Updated Fri, 15 May 2026 12:55 PM IST
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सार
न्यायालय इससे पहले अधिशासी अभियंता कार्यालय की कुर्की तक की चेतावनी दे चुका है। इसके बावजूद न तो अधिकारी अदालत में पेश हुए और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ।
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना के मामले में अधिशासी अभियंता विद्युत प्रथम को व्यक्तिगत रूप से तलब करते हुए अंतिम चेतावनी जारी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस बार भी आदेश का पालन नहीं हुआ तो बकाया राशि की वसूली सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक खाते से की जाएगी।
न्यायालय इससे पहले अधिशासी अभियंता कार्यालय की कुर्की तक की चेतावनी दे चुका है। इसके बावजूद न तो अधिकारी अदालत में पेश हुए और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ।
आजादपुरा निवासी बलराम कुशवाहा ने वर्ष 2018 में गलत बिजली बिल के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। उनका आरोप था कि एक किलोवाट के कनेक्शन को जबरन दो किलोवाट दर्शाकर हजारों रुपये के बिल भेजे गए। पहले दस हजार रुपये, फिर 18 हजार, उसके बाद 46 हजार और बाद में 60 हजार रुपये तक के बिल भेजे गए।
पीड़ित ने कई बार बिजली विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद स्थायी लोक अदालत ने बिजली विभाग को बिल सही करने के आदेश दिए, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। मामला बाद में जिला जज अदालत होते हुए सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत पहुंचा।
अनुपस्थिती पर होगी कार्रवाई
अदालत ने अधिशासी अभियंता को कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। न्यायाधीश राखी भदौरिया ने आदेश में कहा है कि अधिशासी अभियंता 18 मई को सुबह आठ बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। अनुपस्थित रहने पर संबंधित वाद की धनराशि उनके व्यक्तिगत बैंक खाते से वसूल की जाएगी।
कार्यालय कुर्की की भी चेतावनी
अदालत ने पूर्व में यह भी कहा था कि आदेश का पालन न होने पर अधिशासी अभियंता कार्यालय की कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे उपभोक्ता के मामले में अदालत के सख्त रुख से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
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न्यायालय इससे पहले अधिशासी अभियंता कार्यालय की कुर्की तक की चेतावनी दे चुका है। इसके बावजूद न तो अधिकारी अदालत में पेश हुए और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित हुआ।
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आजादपुरा निवासी बलराम कुशवाहा ने वर्ष 2018 में गलत बिजली बिल के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया था। उनका आरोप था कि एक किलोवाट के कनेक्शन को जबरन दो किलोवाट दर्शाकर हजारों रुपये के बिल भेजे गए। पहले दस हजार रुपये, फिर 18 हजार, उसके बाद 46 हजार और बाद में 60 हजार रुपये तक के बिल भेजे गए।
पीड़ित ने कई बार बिजली विभाग के चक्कर लगाए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद स्थायी लोक अदालत ने बिजली विभाग को बिल सही करने के आदेश दिए, लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। मामला बाद में जिला जज अदालत होते हुए सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत पहुंचा।
अनुपस्थिती पर होगी कार्रवाई
अदालत ने अधिशासी अभियंता को कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। न्यायाधीश राखी भदौरिया ने आदेश में कहा है कि अधिशासी अभियंता 18 मई को सुबह आठ बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। अनुपस्थित रहने पर संबंधित वाद की धनराशि उनके व्यक्तिगत बैंक खाते से वसूल की जाएगी।
कार्यालय कुर्की की भी चेतावनी
अदालत ने पूर्व में यह भी कहा था कि आदेश का पालन न होने पर अधिशासी अभियंता कार्यालय की कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहे उपभोक्ता के मामले में अदालत के सख्त रुख से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।