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Lalitpur News: मेडिकल कॉलेज में नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे मरीज व तीमारदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज के नए 300 बेड भवन में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। यहां पर अस्पताल के अंदर आते ही नेटवर्क प्रभावित होने लगता है। इससे लोग मोबाइल पर बात नहीं कर पाते हैं। इससे एक-दूसरे को खोजना तक मुश्किल हो जाता है। साथ ही ऑनलाइन कार्य करने में भी समस्या हो जाती है। यही नहीं वार्ड में भर्ती मरीजों से मिलने आ रहे लोगों को भी समस्या हो रही है।
मेडिकल कॉलेज का 300 बेड भवन तो आलीशान बना हुआ है। यहां पर प्रतिदिन ओपीडी समय में लगभग 1500 मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। साथ ही लगभग 600 से अधिक तीमारदार मरीजों के साथ आते हैं। इसके साथ ही 200 से अधिक स्टॉफ रहते हैं। वहीं द्वितीय तल पर 150 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। प्रत्येक मरीज के साथ कम-से-कम एक तीमारदार भी रहता है।
इससे सुविधाएं तो मिल रही हैं। लेकिन, नेटवर्क न आने से खासी परेशानी बनी हुई है। यहां पर लोग ओपीडी परिसर व प्रथम तल और द्वितीय तल पर बात नहीं कर पा रहे हैं। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों के तीमारदारों व लोगों को मरीजों के पास पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधिक परेशान हो रहे हैं। कई बार तो मरीज के परिजन घंटों अपने मरीज को खोजते हुए भटकते रहते हैं। इसके बाद भी उन तक नहीं पहुंच पाते हैं।
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज के नए 300 बेड भवन में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। यहां पर अस्पताल के अंदर आते ही नेटवर्क प्रभावित होने लगता है। इससे लोग मोबाइल पर बात नहीं कर पाते हैं। इससे एक-दूसरे को खोजना तक मुश्किल हो जाता है। साथ ही ऑनलाइन कार्य करने में भी समस्या हो जाती है। यही नहीं वार्ड में भर्ती मरीजों से मिलने आ रहे लोगों को भी समस्या हो रही है।
मेडिकल कॉलेज का 300 बेड भवन तो आलीशान बना हुआ है। यहां पर प्रतिदिन ओपीडी समय में लगभग 1500 मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। साथ ही लगभग 600 से अधिक तीमारदार मरीजों के साथ आते हैं। इसके साथ ही 200 से अधिक स्टॉफ रहते हैं। वहीं द्वितीय तल पर 150 मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। प्रत्येक मरीज के साथ कम-से-कम एक तीमारदार भी रहता है।
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इससे सुविधाएं तो मिल रही हैं। लेकिन, नेटवर्क न आने से खासी परेशानी बनी हुई है। यहां पर लोग ओपीडी परिसर व प्रथम तल और द्वितीय तल पर बात नहीं कर पा रहे हैं। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों के तीमारदारों व लोगों को मरीजों के पास पहुंचना मुश्किल हो रहा है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधिक परेशान हो रहे हैं। कई बार तो मरीज के परिजन घंटों अपने मरीज को खोजते हुए भटकते रहते हैं। इसके बाद भी उन तक नहीं पहुंच पाते हैं।
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