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उच्च शिक्षा का हाल : तीन प्रवक्ताओं के भरोसे 650 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई
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पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय में प्रवक्ता के पांच पद रिक्त
राज्यमंत्री के क्षेत्र में महाविद्यालय सहयोगी स्टाफ के अभाव से भी जूझ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/सिलावन। प्रदेश सरकार में श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद महरौनी का एकमात्र पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय वर्षों से स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि करीब 650 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई महज तीन प्रवक्ताओं के भरोसे चल रही है। आठ में से पांच प्रवक्ता पद खाली होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे छात्रों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बता दें कि महरौनी में वर्ष 1996 में करीब 16 एकड़ भूमि पर महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। इससे पहले क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था। वर्ष 2001 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के बाद यहां कला वर्ग की पढ़ाई शुरू हुई। वर्ष 2018-19 तक शिक्षण व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से महाविद्यालय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
महाविद्यालय में प्रवक्ता के आठ पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल तीन प्रवक्ता ही कार्यरत हैं, जबकि पांच पद रिक्त हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी के तीन पद भी खाली पड़े हैं। तृतीय श्रेणी का केवल एक पद भरा हुआ है। इस प्रकार कुल 12 सृजित पदों में से सिर्फ चार पद भरे हैं, जबकि आठ पद रिक्त चल रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने क्षेत्रीय विधायक व श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ से महाविद्यालय में रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति कराने की मांग की है।
फोटो-2
नगर का दुर्भाग्य है कि एकमात्र राजकीय शिक्षण संस्थान में वर्षों से प्रवक्ताओं की कमी बनी हुई है। इससे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। स्टाफ की कमी को लेकर शासन स्तर पर कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।
- पवन मोदी, अध्यक्ष, दिगंबर जैन पंचायत समिति, महरौनी
फोटो-3
राजकीय महाविद्यालय में लंबे समय से स्टाफ की कमी बनी हुई है। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो रही है।
— धर्मेंद्र श्रीवास्तव, अधिवक्ता
फोटो-4
राजकीय महाविद्यालय में प्रवक्ताओं की नियुक्ति लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है। प्रवक्ताओं की कमी को लेकर उच्च स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षण व्यवस्था सुचारु रखने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके चलते हर वर्ष छात्र संख्या में वृद्धि हो रही है।
- डॉ. आशुतोष यादव, प्राचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, महरौनी
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राज्यमंत्री के क्षेत्र में महाविद्यालय सहयोगी स्टाफ के अभाव से भी जूझ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
महरौनी/सिलावन। प्रदेश सरकार में श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री का क्षेत्र होने के बावजूद महरौनी का एकमात्र पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय वर्षों से स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि करीब 650 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई महज तीन प्रवक्ताओं के भरोसे चल रही है। आठ में से पांच प्रवक्ता पद खाली होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे छात्रों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बता दें कि महरौनी में वर्ष 1996 में करीब 16 एकड़ भूमि पर महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। इससे पहले क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था। वर्ष 2001 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के बाद यहां कला वर्ग की पढ़ाई शुरू हुई। वर्ष 2018-19 तक शिक्षण व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से महाविद्यालय स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
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महाविद्यालय में प्रवक्ता के आठ पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में केवल तीन प्रवक्ता ही कार्यरत हैं, जबकि पांच पद रिक्त हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी के तीन पद भी खाली पड़े हैं। तृतीय श्रेणी का केवल एक पद भरा हुआ है। इस प्रकार कुल 12 सृजित पदों में से सिर्फ चार पद भरे हैं, जबकि आठ पद रिक्त चल रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने क्षेत्रीय विधायक व श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल पंथ से महाविद्यालय में रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति कराने की मांग की है।
फोटो-2
नगर का दुर्भाग्य है कि एकमात्र राजकीय शिक्षण संस्थान में वर्षों से प्रवक्ताओं की कमी बनी हुई है। इससे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। स्टाफ की कमी को लेकर शासन स्तर पर कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा।
- पवन मोदी, अध्यक्ष, दिगंबर जैन पंचायत समिति, महरौनी
फोटो-3
राजकीय महाविद्यालय में लंबे समय से स्टाफ की कमी बनी हुई है। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो रही है।
— धर्मेंद्र श्रीवास्तव, अधिवक्ता
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राजकीय महाविद्यालय में प्रवक्ताओं की नियुक्ति लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है। प्रवक्ताओं की कमी को लेकर उच्च स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षण व्यवस्था सुचारु रखने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके चलते हर वर्ष छात्र संख्या में वृद्धि हो रही है।
- डॉ. आशुतोष यादव, प्राचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महाविद्यालय, महरौनी