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Maharajganj News: अफसरों पर कानूनी फंदा फेंक संपत्ति व धन बचाने में जुटा ब्रिटिश मौलाना
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खलीलाबाद एसडीएम कोर्ट ने मदरसा ध्वस्तीकरण का दिया था आदेश
मदरसा ध्वस्तीकरण मामले में कमिश्नर कोर्ट में दाखिल की है निगरानी याचिका
आयुक्त न्यायालय से फैसला आने के पहले की खटखटा दिया हाईकोर्ट का दरवाजा
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान व उसके परिजन अफसरों पर कानूनी फंदा फेंक कर संपत्ति व धन बचाने में जुट गए हैं। विनियमित प्राधिकारी, एसडीएम खलीलाबाद की कोर्ट ने मोतीनगर स्थित मदरसा के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। डीएम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की, जहां आदेश सुरक्षित कर दिया गया है। इस बीच आयुक्त कोर्ट से फैसला आने से पूर्व ही मदरसा प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इसके लिए 25 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका का पंजीकरण हुआ। हाईकोर्ट की याचिका में बैंक खातों से धन की निकासी पर रोक हटाने की मांग भी शामिल है। यह याचिका मदरसा प्रबंधन और मौलाना के परिजनों की ओर से दाखिल की गई है।
मदरसा सील होने के बाद आरबीओ एक्ट के तहत ध्वस्तीकरण का नोटिस प्रबंध तंत्र को एसडीएम कोर्ट से तीन नवंबर 2025 को दिया गया। इसके बाद प्रबंध तंत्र हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट में डबल बेंच की सुनवाई के बाद स्थानीय प्राधिकारी के यहां जाने का आदेश दिया गया।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रबंध तंत्र मामले में स्थानीय प्राधिकारी कोर्ट पहुंचा। जहां सुनवाई के बाद नोटिस को सही ठहराते हुए 13 जनवरी को 15 दिन के भीतर मदरसा ध्वस्तीकरण का नोटिस मदरसे पर चस्पा किया गया। एसडीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ मदरसा प्रबंध तंत्र ने 22 जनवरी को डीएम कोर्ट में अपील करने के साथ ही स्थगन आदेश के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। साथ ही एक बार फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने एक बार फिर डीएम को तय समय सीमा के अंदर मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए अधिकृत किया। डीएम कोर्ट ने सुनवाई के बाद 22 जनवरी को स्थगन प्रार्थना पत्र निस्तारित करने के कुछ दिन बाद अपील भी खारिज कर दी। इसके बाद प्रबंध तंत्र ने 11 मार्च को आयुक्त बस्ती मंडल कोर्ट में निगरानी दाखिल की।
जानकारों के मुताबिक वहां भी 18 के बजाय 19 मार्च को सुनवाई के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया गया। इसके बाद प्रबंध तंत्र ने एक बार फिर से हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि आयुक्त बस्ती मंडल के यहां से अभी तक निगरानी पर फैसला नहीं आने की सूचना है। इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी मिल सकेगी।
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मदरसा धवस्तीकरण की याचिका में इनके नाम हैं शामिल
- स्टेट आफ यूपी एंड 4 अन्य
- कमिश्नर बस्ती
- डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट
- एसपी संतकबीरनगर
- सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट/प्रिसक्राइब्ड एथारिटी
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कोर्ट से फ्रीज खातों को भी बहाल करने की मांग
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा फेमा मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद विवेचक ने बैंक अधिकारियों से मिलकर प्रबंध कमेटी एवं मौलाना के परिजनों के ज्यादातर बैंक खातों को फ्रीज करा दिया। जांच के दौरान मदरसा प्रबंध कमेटी के साथ ही मौलाना शमशुल हुदा खान के बेटे तौसीफ रजा, पत्नी सकलैन और बहू नसरीन जहां के नाम से अलग-अलग बैंकों में 18 खाते संचालित होना पाया गया। इनमें जांच के समय लगभग 94.23 लाख रुपये मौजूद थे। जिन्हें विवेचक ने बैंक की मदद से जांच होने तक पूरी रकम को फ्रीज करा दिया।
इन बैंक खातों की बहाली के लिए मदरसा प्रबंध तंत्र एवं मौलाना शमशुल हुदा खान के बेटे व बहू ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें जल्द ही सुनवाई की संभावना व्यक्त की जा रही है।
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मदरसा ध्वस्तीकरण मामले में कमिश्नर कोर्ट में दाखिल की है निगरानी याचिका
आयुक्त न्यायालय से फैसला आने के पहले की खटखटा दिया हाईकोर्ट का दरवाजा
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर निवासी मौलाना शमशुल हुदा खान व उसके परिजन अफसरों पर कानूनी फंदा फेंक कर संपत्ति व धन बचाने में जुट गए हैं। विनियमित प्राधिकारी, एसडीएम खलीलाबाद की कोर्ट ने मोतीनगर स्थित मदरसा के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। डीएम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की, जहां आदेश सुरक्षित कर दिया गया है। इस बीच आयुक्त कोर्ट से फैसला आने से पूर्व ही मदरसा प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इसके लिए 25 मार्च को हाईकोर्ट में याचिका का पंजीकरण हुआ। हाईकोर्ट की याचिका में बैंक खातों से धन की निकासी पर रोक हटाने की मांग भी शामिल है। यह याचिका मदरसा प्रबंधन और मौलाना के परिजनों की ओर से दाखिल की गई है।
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मदरसा सील होने के बाद आरबीओ एक्ट के तहत ध्वस्तीकरण का नोटिस प्रबंध तंत्र को एसडीएम कोर्ट से तीन नवंबर 2025 को दिया गया। इसके बाद प्रबंध तंत्र हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट में डबल बेंच की सुनवाई के बाद स्थानीय प्राधिकारी के यहां जाने का आदेश दिया गया।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रबंध तंत्र मामले में स्थानीय प्राधिकारी कोर्ट पहुंचा। जहां सुनवाई के बाद नोटिस को सही ठहराते हुए 13 जनवरी को 15 दिन के भीतर मदरसा ध्वस्तीकरण का नोटिस मदरसे पर चस्पा किया गया। एसडीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ मदरसा प्रबंध तंत्र ने 22 जनवरी को डीएम कोर्ट में अपील करने के साथ ही स्थगन आदेश के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। साथ ही एक बार फिर से हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने एक बार फिर डीएम को तय समय सीमा के अंदर मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए अधिकृत किया। डीएम कोर्ट ने सुनवाई के बाद 22 जनवरी को स्थगन प्रार्थना पत्र निस्तारित करने के कुछ दिन बाद अपील भी खारिज कर दी। इसके बाद प्रबंध तंत्र ने 11 मार्च को आयुक्त बस्ती मंडल कोर्ट में निगरानी दाखिल की।
जानकारों के मुताबिक वहां भी 18 के बजाय 19 मार्च को सुनवाई के बाद आदेश को सुरक्षित रख लिया गया। इसके बाद प्रबंध तंत्र ने एक बार फिर से हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि आयुक्त बस्ती मंडल के यहां से अभी तक निगरानी पर फैसला नहीं आने की सूचना है। इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी मिल सकेगी।
मदरसा धवस्तीकरण की याचिका में इनके नाम हैं शामिल
- स्टेट आफ यूपी एंड 4 अन्य
- कमिश्नर बस्ती
- डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट
- एसपी संतकबीरनगर
- सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट/प्रिसक्राइब्ड एथारिटी
कोर्ट से फ्रीज खातों को भी बहाल करने की मांग
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा फेमा मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद विवेचक ने बैंक अधिकारियों से मिलकर प्रबंध कमेटी एवं मौलाना के परिजनों के ज्यादातर बैंक खातों को फ्रीज करा दिया। जांच के दौरान मदरसा प्रबंध कमेटी के साथ ही मौलाना शमशुल हुदा खान के बेटे तौसीफ रजा, पत्नी सकलैन और बहू नसरीन जहां के नाम से अलग-अलग बैंकों में 18 खाते संचालित होना पाया गया। इनमें जांच के समय लगभग 94.23 लाख रुपये मौजूद थे। जिन्हें विवेचक ने बैंक की मदद से जांच होने तक पूरी रकम को फ्रीज करा दिया।
इन बैंक खातों की बहाली के लिए मदरसा प्रबंध तंत्र एवं मौलाना शमशुल हुदा खान के बेटे व बहू ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें जल्द ही सुनवाई की संभावना व्यक्त की जा रही है।